Mumbai local train: मुंबई लोकल के यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और भीड़ कम करने के लिए रेलवे ने उठाया बड़ा कदम
Mumbai local train: मुंबई लोकल ट्रेन के रेलवे नेटवर्क पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। इसके तहत, कई स्टेशनों की मौजूदा सुविधाओं और यात्रियों की आवाजाही (फुटफॉल) का सर्व और दस्तावेजीकरण (Documentation) किया जाएगा। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर, प्रत्येक स्टेशन के लिए विशिष्ट भीड़ नियंत्रण और प्रबंधन योजनाएं तैयार होंगी।
इन विस्तृत सर्वेक्षणों का जिम्मा रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (RITES) को सौंपा गया है। RITES मुंबई के प्रमुख उपनगरीय स्टेशनों और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में लंबी दूरी के टर्मिनलों का आकलन करेगी।

इन पांच स्टेशनों पर होगी शुरूआत
पहले चरण में, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), बांद्रा, कुर्ला और प्रभादेवी सहित मुंबई के पांच से सात व्यस्ततम स्टेशन शामिल हैं। पुणे और नासिक के महत्वपूर्ण स्टेशनों को भी इस कवायद में जोड़ा गया है, जो मध्य रेलवे (CR) और पश्चिम रेलवे (WR) दोनों के क्षेत्राधिकार में हैं।
भीड़ को कम करने में क्या मिलेगी मदद?
रेलवे प्रशासन को सौंपी गई मौजूदा रिपोर्टें पहले ही कुछ स्टेशनों पर अधिक विस्तृत सर्वेक्षणों की आवश्यकता दर्शा चुकी हैं। एक मध्य रेलवे अधिकारी ने बताया, "यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि के साथ, सुरक्षा व सुचारु परिचालन के लिए व्यवस्थित भीड़ प्रबंधन अब अहम हो गया है।"
अधिकारी ने आगे कहा, "ये सर्वेक्षण हमें स्टेशन के लेआउट और आवाजाही के पैटर्न को अधिक वैज्ञानिक तरीके से फिर से डिजाइन करने में मदद करेंगे। हमारा लक्ष्य प्रत्येक स्टेशन की अनूठी चुनौतियों को समझना और अनुरूप योजनाएँ बनाना है, बजाय हर जगह एक समान मॉडल लागू करने के।"
सर्वेक्षणों में चरम व गैर-चरम घंटों के दौरान यात्रियों की आवाजाही और बुनियादी ढांचे का विस्तृत मूल्यांकन होगा। इसमें यात्रियों की संख्या (फुटफॉल), ट्रेन समय, प्लेटफॉर्म क्षमता, सीढ़ियाँ, फुट ओवरब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर, टिकट काउंटर तथा प्रवेश-निकास मार्गों का मानचित्रण किया जाएगा।
योजनाएँ बनाते समय, स्टेशनों के स्थान और उनकी वाणिज्यिक केंद्रों, व्यापारिक जिलों व व्यस्त सड़क जंक्शनों से निकटता को भी ध्यान में रखा जाएगा। इस पूरे अभ्यास को पूरा होने में कई महीने लगने का अनुमान है।
प्रत्येक स्टेशन सर्वेक्षण पर लगभग ₹40 लाख की लागत आएगी। यह व्यय रेलवे की सुरक्षा और यात्री सुविधा संबंधी पहलों के हिस्से के रूप में वहनीय होगा। रेलवे इन अध्ययनों के आधार पर भीड़ प्रबंधन व यात्री सुविधाओं में सुधार हेतु सिफारिशें प्रस्तुत करेगा।












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