ममता बनर्जी ने पहली बार बताया TMC का राष्ट्रीय एजेंडा, कांग्रेस को लेकर कही ये बात

मुंबई, 1 दिसंबर: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली बार 'तीसरे मोर्चे' को लेकर अपना राष्ट्रीय एजेंडा जाहिर कर दिया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए सभी क्षेत्रीय दलों को एकजुट होने का आह्वान किया है। गौरतलब है कि कांग्रेस, टीएमसी पर पार्टी को कमजोर करने का आरोप लगा रही है। ममता बनर्जी अपनी पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार में जुटी हुई हैं और इसी सिलसिले में वह मुंबई पहुंची हैं, जहां उन्होंने आज सिविल सोसाइटी के सदस्यों से बातचीत के दौरान अपनी भावी रणनीति को लेकर काफी कुछ संकेत देने की कोशिश की है।

'कांग्रेस बंगाल में लड़ सकती है तो टीएमसी गोवा में क्यों नहीं'

'कांग्रेस बंगाल में लड़ सकती है तो टीएमसी गोवा में क्यों नहीं'

तृणमूल की मुखिया ममता बनर्जी अपनी पार्टी के विस्तार को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों के बारे में कहा है कि जब कांग्रेस पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ सकती है तो उनकी पार्टी भी गोवा में चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र है। कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी के लिए ममती की यह बहुत बड़ी सियासी टिप्पणी है। यही नहीं ममता ने कहा है, 'अगर सभी क्षेत्रीय पार्टियां एकसाथ आ जाएं, तभी भारतीय जनता पार्टी को हराना आसान होगा।' उन्होंने कहा है, 'मैं बीजेपी को इस देश से राजनीतिक रूप से बाहर होते देखना चाहती हूं। अगर कांग्रेस बंगाल में चुनाव लड़ती है, तो मैं गोवा में ऐसा क्यों नहीं कर सकती?'

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    'नहीं तो बीजेपी बाहर फेंक देगी'

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    त्रिपुरा के स्थानीय निकाय चुनाव में टीएमसी की पूरी ताकत झोंकने को लेकर जारी चर्चाओं के बीच बंगाल की सीएम ने कहा कि मैदान में डटे रहकर बीजेपी के खिलाफ लड़ना महत्वपूर्ण था, नहीं तो वह आपको 'बाहर फेंक देंगे।' उनके मुताबिक 'अगर सभी क्षेत्रीय पार्टी साथ आ जाएं तो बीजेपी को हराना आसान रहेगा। मुझे बंगाल से बाहर जाना पड़ा, चाहे राज्य में चीजें ठीक हों, ताकि दूसरे भी बाहर निकलें और प्रतिस्पर्धा हो।' ममता बनर्जी अभी मुंबई दौरे पर हैं, जहां वह लगातार राजनीतिक मुलाकात कर रही हैं और बीजेपी-विरोधी पार्टियों के नेताओं से मिल रही हैं। मंगलवार को वह शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे और एनसीपी सांसद संजय राउत से मिल चुकी हैं और उनका शरद पवार से मिलने का कार्यक्रम है।

    चुनावों की वजह से कृषि कानून वापस हुए-ममता

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    इस मौके पर टीएमसी अध्यक्ष ने बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि कानूनों की वापसी और तेल के दाम घटाने जैसे फैसले आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर किए गए हैं। वो बोलीं- 'चुनाव की वजह से, पीएम मोदी डरे हुए हैं और इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आई है। लेकिन, बाकी समय में इनकी कीमतें बढ़ती रहती हैं। कृषि कानूनों को चुनावों को ध्यान में रखकर वापस लिया गया है।' उन्होंने दावा किया कि नेताओं की आदत होती है कि वो बोलते ज्यादा हैं, लेकिन वो कम बोलती हैं और उसपर चलना ज्यादा पसंद करती हैं।

    ममता सत्ता में आईं तो यूएपीए हटेगा ?

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    इस दौरान उन्होंने बीजेपी सरकार पर विरोधी दलों के नेताओं और विरोधियों से बदला लेने और विरोध को दबाने के लिए यूएपीए के बेजा इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'यूएपीए सिविल सोसाइटी के लिए नहीं है। इसका अब दुरुपयोग हो रहा है। मेरी किसी भी एजेंसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है, लेकिन उनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर बीजेपी जाती है और हम सत्ता में आते हैं तो मैं आपको भरोसा दिला सकती हूं कि जनता के खिलाफ कोई कानून नहीं होगा। सकारात्मक आलोचना जरूरी है।'

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