कृषि कानूनों के खिलाफ मानसून सत्र में प्रस्ताव पारित करेगी महाराष्ट्र सरकार : नवाब मलिक
मुंबई, जुलाई 03: केंद्र सरकार ने किसान कानूनों पर एनसीपी चीफ शरद पवार के बयान को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है। इसी बीच एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक की ओर से बड़ा बयान है। नवाब मलिक ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार अगले सप्ताह राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करेगी। उन्होंने कृषि कानूनों को लेकर पार्टी प्रमुख शरद पवार की कुछ टिप्पणियों का भी खंडन किया।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि, महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के सभी 3 दल (एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस) केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ थे और अभी भी कानूनों के खिलाफ हैं। इन कानूनों का विरोध करने के लिए राज्य सरकार राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र में प्रस्ताव पारित करेगी। उन्होंने कहा कि तीनों कानूनों का अध्ययन करने के संबंध में गठित समिति राज्य सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले कानून का मसौदा तैयार करने के लिए किसान नेताओं से बात करेगी।
उन्होंने कहा कि, जब तक किसान कानून के मसौदे को स्वीकार नहीं करते, तब तक राज्य सरकार आगे नहीं बढ़ेगी। राकांपा का विचार है कि तीन केंद्रीय कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। मलिक ने कहा, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने तीन कृषि कानूनों पर शरद पवार के विचारों के बारे में एक टिप्पणी की, जो राकांपा प्रमुख ने कभी नहीं कहा। पवार ने तीन केंद्रीय कानूनों पर कुछ नहीं बोला। पवार केवल इस बात की जानकारी दे रहे थे कि राज्य सरकार केंद्र के कानूनों खिलाफ क्या कदम उठा रही है।
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने कहा कि, एआईकेएससीसी ने महा विकास अघाड़ी से एक स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की है। कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए और कृषि उपज की गारंटी प्रदान करने और विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करने के लिए एक केंद्रीय कानून बनाया जाना चाहिए। इससे पहले पवार ने कहा था कि, केंद्र को उत्तर भारत के उन किसानों के साथ बातचीत करनी चाहिए जो पिछले सात महीनों से नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, केंद्र को उनसे बातचीत तेज करनी चाहिए। मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद रखना गलत है।












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