Maharashtra Elections: संगमनेर में इसबार चुनावी तस्वीर बदल सकते हैं अमोल खटाल, थोराट की हवा हो सकती है खराब!
Maharashtra Chunav 2024: संगमनेर विधानसभा चुनाव में राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे के इस बयान से माहौल गरमा गया है कि अमोल खटाल को चुनना उनका कर्तव्य है। इस बयान ने इस निर्वाचन क्षेत्र को सुर्खियों में ला दिया है। कई सालों तक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट को कोई खास चुनौती नहीं दे पाया था। लेकिन, शिंदे गुट से अमोल खटाल को टिकट मिलने के बाद समीकरण बदल गए हैं।
अमोल खटाल: एक नया चैलेंजर
अमोल खटाल, जो पहले भाजपा के निर्वाचन क्षेत्र प्रमुख थे, अब एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखे जा रहे हैं। संगमनेर में लंबे समय से थोराट का दबदबा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में खटाल और भाजपा ने एक अलग पहचान बनाई है। मजबूत दावेदारों की कमी ने थोराट की जीत को सुनिश्चित कर दिया था। अब खटाल के मैदान में होने से कई लोगों का मानना है कि यह चुनाव और अधिक प्रतिस्पर्धी होगा।

खटाल की अपील स्थानीय मुद्दों को लेकर उनके वादे में निहित है। उन्होंने संगमनेर के युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए एक औद्योगिक कॉलोनी स्थापित करने का संकल्प लिया है। यह वादा तालुका के कई युवा मतदाताओं को पसंद आ रहा है, जो रोजगार के अवसरों के लिए उत्सुक हैं।
थोराट से जुड़े विवाद
बालासाहेब थोराट, जो कई वर्षों तक राजस्व मंत्री रह चुके हैं, संगमनेर के युवाओं के लिए औद्योगिक एस्टेट स्थापित न करने के लिए आलोचना का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, उनके खिलाफ करहे और चिकानी गांवों में भूमि सौदों और वन भूमि हड़पने में शामिल होने के आरोप भी हैं। चुनाव अभियान में उनके खिलाफ इन विवादों को उजागर किया जा रहा है।
भूमि खरीद एजेंटों की मौजूदगी और फर्जी खरीद के मामले थोराट की चुनौतियों को और बढ़ा देते हैं। ये मुद्दे खटाल के पक्ष में काम कर सकते हैं, क्योंकि वह खुद को पारदर्शिता और विकास पर केंद्रित उम्मीदवार के रूप में पेश करते हैं। चुनाव परिणाम इस बात पर निर्भर कर सकते हैं कि ये विवाद मतदाताओं की भावनाओं को किस तरह प्रभावित करते हैं।
संगमनेर के लिए महायुति का काम
महायुति गठबंधन ने पिछले दो सालों में संगमनेर को 600 करोड़ रुपए का बड़ा फंड आवंटित किया है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वितरित इस फंड ने किसानों के खातों में पैसे जमा करके उन्हें सीधे लाभ पहुंचाया है। इसके अलावा, लाडकी बहिन योजना में तालुका में महत्वपूर्ण भागीदारी देखी गई है, जिसके लगभग एक लाख लाभार्थी हैं। इस बीच, इस आरोप को लेकर चर्चा चल रही है कि थोराट ने क्षेत्र में एक छोटे खनिज माफिया को बढ़ावा दिया है।
इससे पहले इस निर्वाचन क्षेत्र में सुजय विखे को थोराट के खिलाफ एकमात्र दावेदार माना जा रहा था। उन्होंने पांच से छह बैठकें करके समुदाय के साथ सक्रिय रूप से जुड़ाव बनाए रखा था।
अमोल खटाल के लिए एकजुट हैं महायुति के कार्यकर्ता
अमोल खटाल एक पूर्व भाजपा कार्यकर्ता हैं। वहीं विखे की ओर से भी खटाल को समर्थ मिल रहा है। इसके अलावा, महायुति कार्यकर्ता इस तालुका में एकजुट होकर चुनाव अभियान चला रहे हैं, जिससे उनको मिलने वाला समर्थन आसान हो रहा है।
अजित पवार गुट, शिंदे गुट और भाजपा ने सामूहिक रूप से इस क्षेत्र में रणनीतिक अभियान शुरू किया है। पिछले कुछ वर्षों में भाजपा के बढ़ते प्रभाव ने उनकी स्थिति को मजबूत किया है।
सुजय विखे और स्थानीय युवाओं की ओर से बनाया गया माहौल अमोल खटाल के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। महायुति के भीतर विभिन्न राजनीतिक गुटों से मिल रहा एकजुट समर्थन संगमनेर में थोराट के प्रभाव के खिलाफ इस चुनावी लड़ाई में उनकी संभावनाओं को बढ़ा रहा है।












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