महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले भाजपा कर रही बड़ा खेला, अजित पवार को लगेगा झटका!
Maharashtra civic polls: महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखों के ऐलान से पहले सभी रानजीतिक पार्टियां अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करने के लिए दांव-पेंच लगाने में जुट चुकी हैं। खास बात ये है कि विपक्षी महाविकास अघाड़ी गठबंबधन के अलावा सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में इस निकाय चुनाव को लेकर दो फाड़ होती नजर आ रही है। महायुति में शामिल भाजपा, एनसीपी और शिवसेना अपनी अलग-अलग खिचड़ी पका रहे हैं।
वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक बड़ा सियासी दांव चल दिया है। सोलापुर जिले से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) के तीन पूर्व विधायक और कांग्रेस के एक पूर्व विधायक जल्द ही बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। ये अजित पवार और उनकी एनसीपी के लिए तगड़ा झटका होगा।

सीएम फडणवीस से की मुलाकात
इन चारों पूर्व विधायकों ने हाल ही में 'वर्षा' बंगले पर सोलापुर के पालक मंत्री जयकुमार गोरे के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इस बैठक में उनके बीजेपी में शामिल होने पर मुहर लग गई है, जिससे राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
कौन हैं ये पूर्व विधायक?
बीजेपी में शामिल होने वाले विधायकों में मोहोल के पूर्व विधायक राजन पाटील का नाम सबसे प्रमुख है, जो इस सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। मोहोल सीट आरक्षित होने के बाद भी उन्होंने लगातार तीन बार एनसीपी के विधायक को जिताया है, जिससे क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ जाहिर होती है।
क्यों अजित पवार का साथ छोड़ रहे ये पूर्व विधायक?
राजन पाटील अजीत पवार से नाराज चल रहे थे, क्योंकि पवार मोहोल विधानसभा सीट पर उनके मजबूत प्रभाव के बावजूद उमेश पाटील जैसे नए कार्यकर्ताओं को बढ़ावा दे रहे थे। यह नाराजगी उनके पार्टी छोड़ने का एक प्रमुख कारण बनी।
माढ़ा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रहे बबन दादा शिंदे ने एनसीपी में विभाजन के बाद अजीत पवार का समर्थन किया था। हालांकि, लोकसभा चुनाव में महाविकास आघाड़ी के बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्होंने शरद पवार को फिर से मनाने की कोशिश की, लेकिन वरिष्ठ पवार ने उनके लिए पार्टी के दरवाजे बंद कर दिए।
इसके बाद शिंदे ने माढ़ा सीट से अपने बेटे रणजीत सिंह शिंदे को चुनाव में उतारा, लेकिन जनता ने उन्हें अस्वीकार कर दिया। यह घटना भी शिंदे परिवार के राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगाती है।
मोहोल के पूर्व विधायक यशवंत माने, जिन्होंने 2019 में एनसीपी के टिकट पर मोहोल सीट जीती थी, वे राजन पाटील के करीबी माने जाते हैं। वहीं, चौथे पूर्व विधायक दिलीप माने सोलापुर में कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं, जिनका बैंकिंग, शुगर मिल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काफी प्रभाव है।
बीजेपी 2029 के विधानसभा चुनाव में दिलीप माने को टिकट देने की तैयारी में है। भले ही अभी महायुति एकजुट दिख रही हो, लेकिन बीजेपी की योजना है कि वह 2029 के विधानसभा चुनावों में पूरी तरह से अपने दम पर लड़ेगी।
इसी रणनीति के तहत पार्टी लगातार अपना आधार मजबूत कर रही है और नए सदस्यों को जोड़कर अपनी ताकत बढ़ा रही है। यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले समय में बड़े बदलाव ला सकता है।












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