Maharashra Chunav: कौन हैं कमाल फारूखी? जिन्‍हें 20 साल बाद कांग्रेस में किया गया शामिल, क्‍या है प्‍लॉन?

Maharashtra Assembly Elections 2024: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने एक ऐसे नेता को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है। जिन्‍होंने 20 साल पहले 2004 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। ये नेता कमाल फारूकी हैं जिन्‍होंने बीस साल के अंतराल के बाद कांग्रेस पार्टी में फिर से शामिल हो गए हैं।

कमाल फारूखी ने राजनीतिक सफर की शुरूआत बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और बाद में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ जुड़ाव की कोशिश की। फारूकी का 2013 तक समाजवादी पार्टी के साथ भी जुड़ाव रहा। वहीं अब महाराष्‍ट्र चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में 20 साल बाद अपने बेटे उमर के साथ कमाल फारुखी ने वापसी की है। आइए जानते हैं कमामल फारूखी को कांग्रेस में शामिल किए जाने के पीछे पार्टी का प्‍लॉन क्‍या है?

Kamal Farooqui joins Congress

फारूकी ने कांग्रेस में वापसी के फैसले के साथ एक मार्मिक बयान भी दिया। उन्होंने कहा "मैंने भाजपा और उसके जैसी पार्टियों की सांप्रदायिक घृणास्पद दक्षिणपंथी विचारधारा को हराने के लिए कांग्रेस में लौटने का फैसला किया है। वर्तमान माहौल में, कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो वास्तव में हमारे देश की सच्ची भावना का नेतृत्व और पुनर्स्थापना कर सकती है।

कांग्रेस का क्‍या है प्‍लॉन?

बता दें कमाल फारूखी मराठवाड़ा क्षेत्र के अनुभवी राजनेता हैं। कमाल फारूकी की कांग्रेस पार्टी में वापसी को महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के लिए रणनीतिक बढ़ावा माना जा रहा है। फारूकी जैसे प्रमुख व्यक्ति और उनके बेटे उमर कमाल फारूकी, जो पहले एनसीपी में राज्य प्रवक्ता और छात्र विंग के उपाध्यक्ष जैसे पदों पर रह चुके हैं, का स्वागत करके कांग्रेस महाराष्ट्र में अपने प्रभाव को मजबूत करना चाहती है। यह कदम आगामी चुनावों के मद्देनजर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी विभिन्न मतदाता वर्गों के बीच अपनी अपील को फिर से जीवंत करना चाहती है।

कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र में लगभग 11.5% मुस्लिम वोटों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कमाल फारूकी के प्रभाव पर निर्भर है। हाल के वर्षों में इस समुदाय के समर्थन में बदलाव देखा है, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) जैसी पार्टियों ने खास तौर पर औरंगाबाद जैसे जिलों में अपना प्रभाव दिखाया है।

ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस का गढ़ रहे इन इलाकों में पार्टी के लिए मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन में गिरावट देखी गई है, जिससे फारूकी की घर वापसी इस प्रवृत्ति को उलटने में संभावित रूप से महत्वपूर्ण कारक बन गई है।

महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में फारूकी की कांग्रेस में वापसी अहम मानी जा रही है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक समिति में उनकी भूमिका और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य के रूप में उनकी विविध राजनीतिक पृष्ठभूमि ने उन्हें काफी कद और प्रभाव दिया है।

फारूकी और उनके बेटे को अपने खेमे में फिर से शामिल करने के कांग्रेस के इस कदम की रणनीति न केवल विशिष्ट मतदाता वर्गों के बीच खोई जमीन को वापस पाने के लिए है, बल्कि राज्य में भाजपा की विचारधारा के लिए खुद को मुख्य चुनौती देने वाले के रूप में स्थापित करने के लिए भी है।

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