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महाराष्ट्र विधानसभा में अब है फ्लोर टेस्ट की बारी ? SC के फैसले के बाद सभी पक्ष हुए ऐक्टिव

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मुंबई, 28 जून: महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की संभावना बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई को सुनवाई की अगली तारीख तय करके शिवसेना के बागी एमएलए को इस बीच में इस विकल्प पर मंथन करने का मौका दे दिया है। कानून के जानकार भी मान रहे हैं कि अब इस राजनीतिक संकट का हल विधानसभा के अंदर ही होने के आसार बढ़ गए हैं, क्योंकि अदालत ने उद्धव सरकार की ओर से फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने की मांग भी ठुकरा दी है। इन परिस्थितियों में अब सभी पक्ष 11 जुलाई तक का इंतजार करने से पहले नए सिरे से ऐक्टिव हो गए हैं।

महाराष्ट्र विधानसभा में अब है फ्लोर टेस्ट की बारी ?

महाराष्ट्र विधानसभा में अब है फ्लोर टेस्ट की बारी ?

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक संकट पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट को लगभग अवश्यंभावी बना दिया है। उद्धव सरकार की ओर से अदालत में उनके वकीलों ने काफी कोशिश की कि किसी तरह से फ्लोर टेस्ट पर भी अगली सुनवाई तक रोक लग जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। सूत्रों की मानें तो विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल की ओर से शिवसेना के 16 बागी एमएलए को थमाई गई अयोग्यता की नोटिस पर जवाब देने के लिए 12 जुलाई की शाम तक का समय सुप्रीम कोर्ट से मिलने के बाद एकनाथ शिंदे गुट सदन में फ्लोर टेस्ट करवाने के संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर चर्चा शुरू कर चुका है।

राज्यपाल फ्लोर टेस्ट के लिए कह सकते हैं

राज्यपाल फ्लोर टेस्ट के लिए कह सकते हैं

अभी तक शिवसेना के उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे दोनों गुटों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है। ऐसे में सूत्रों का मानना है कि अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजभवन लौट चुके गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी मौजूदा परिस्थियों में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से सदन में बहुमत साबित करने को भी कह सकते हैं। यह इसी हफ्ते भी हो सकता है और पूरा अगला हफ्ता भी बाकी है। यह भी संभावना है कि शिंदे कैंप भी राज्यपाल से यह मांग कर सकता है या फिर विपक्ष का कोई भी छोटा दल भी इसके लिए राजभवन पहुंच सकता है। वैसे जानकारी के मुताबिक फिलहाल बीजेपी खुद इसकी पहल करने से बच रही है, लेकिन वह किसी सहयोगी को भी इसके लिए आगे कर सकती है।

समर्थक विधायकों को लेकर अभी दोनों ओर से हो रहे हैं दावे

समर्थक विधायकों को लेकर अभी दोनों ओर से हो रहे हैं दावे

सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि गुवाहाटी के एक पांच सितारा होटल में डेरा डाले शिवसेना के शिंदे समर्थक और कुछ निर्दलीय विधायकों ने वहां का अपना प्रवास फिलहाल 5 जुलाई तक बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि शिंदे गुट का दावा है कि उनके समर्थन में करीब 50 एमएलए हैं, जिनमें से लगभग 40 तो शिवसेना के हैं। वैसे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और राज्य में मंत्री आदित्य ठाकरे का दावा है कि 15 से 20 बागी उनके संपर्क में हैं और पार्टी से कह रहे हैं कि उन्हें मुंबई लाया जाए।

बीजेपी भी अंदर ही अंदर हो चुकी है सक्रिय

बीजेपी भी अंदर ही अंदर हो चुकी है सक्रिय

मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी अभी तक महाराष्ट्र संकट पर खुलकर अपने पत्ते नहीं खोल रही है। लेकिन, खबरें हैं कि पार्टी के नेताओं ने पूर्व सीएम दवेंद्र फडणवीस के घर पर इस मुद्दे पर घनघोर मंथन किया है। पार्टी विधायकों के गुणा-भाग में भी लगी हुई है। लेकिन, कोई भी कदम उठाने से पहले बहुत ही फू्ंक-फूंक कर कदम रख रही है। मसलन, भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा, 'हम एकनाथ शिंदे की ओर से सरकार गठन के प्रस्ताव को लेकर तैयार हैं। '

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क्या कहते हैं कानून के जानकार ?

क्या कहते हैं कानून के जानकार ?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के फैसले ने उद्धव सरकार का संकट बढ़ा दिया है। एनसीपी के डिप्टी स्पीकर के जरिए 16 बागी एमएलए को अयोग्य करवाकर एकनाथ शिंदे के मंसूबों पर पानी फेरने की चाल में सत्तापक्ष फिलहाल नाकाम हो चुका है। ऊपर से सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट पर रोक भी लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि अगर कुछ असंवैधानिक होता है तो अदालत में आने का विकल्प खुला हुआ है। ऐसे में यदि राज्यपाल सीएम को फ्लोर टेस्ट कराने को कहते हैं तो वह इससे बच नहीं सकते। मसलन, वरिष्ठ वकील विनीत नायक ने कहा, 'तब तक किसी को (बागी विधायकों को) अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता और सैद्धांतिक तौर पर तबतक उन्हें फ्लोर टेस्ट करवाने का अधिकार है।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर फ्लोर टेस्ट होता है तो यह मुमकिन है कि शिवसेना डिप्टी स्पीकर के पक्ष में वोटिंग के लिए व्हिप जारी करे। लेकिन, यदि बागियों को व्हिप का उल्लंघन करना है और अयोग्यता से बचना है तो उन्हें 37 अंकों को पूरा करके बीजेपी में सम्मिलत होना होगा या एक नई राजनीतिक पार्टी बनानी पड़ेगी, जिसके लिए चुनाव आयोग से अनुमति लेनी पड़ेगी।'

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English summary
The possibility of floor test in Maharashtra assembly is increasing. By fixing the next date of hearing on July 11, the Supreme Court has given an opportunity to the rebel MLA of Shiv Sena to brainstorm on this option in the meantime
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