क्या ट्रेनी IAS पूजा खेडकर ने डिसेबिलिटी का झूठ बोला? चयन पर UPSC ने दी थी चुनौती
IAS Pooja Khedkar Mentally Disabled: महाराष्ट्र कैडर के 2023 बैच की ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर लगातार विवादों में हैं। पुणे में ट्रेनिंग के दौरान अपनी मांगों को लेकर नखरेबाज आईएएस के एक के बाद एक मामले उजागर हो रहे हैं। आईएएस के नखरों के चलते सरकार ने खेडकर का ट्रांसफर वाशिम कर दिया गया था। लेकिन, उनके यूपीएससी चयन के लिए विशेष छूट हासिल करने वाले विकलांगता सर्टिफिकेट पर भी अब सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, खेडकर ने संघ लोक सेवा आयोग को प्रस्तुत हलफनामे में दृष्टिबाधित और मानसिक रूप से बीमार होने का दावा किया था। विकलांगताओं का उपयोग यूपीएससी चयन के दौरान विशेष छूट प्राप्त करने के लिए किया गया था। परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने के बावजूद, इन छूटों के कारण ही वह परीक्षा पास कर पाईं और उन्होंने अखिल भारतीय रैंक (एआईआर) 821 हासिल की। चयन के बाद यूपीएससी ने उनकी विकलांगता की पुष्टि के लिए उन्हें मेडिकल टेस्ट से गुजरना पड़ा। हालांकि, खेडकर ने छह अलग-अलग मौकों पर इन परीक्षाओं में शामिल होने से इनकार कर दिया।

लगातार चिकित्सा जांच का देती रहीं चकमा!
दिल्ली के एम्स में उनकी पहली निर्धारित चिकित्सा जांच 22 अप्रैल, 2022 को थी, जिसे उन्होंने कोविड पॉजिटिव होने का दावा करते हुए छोड़ दिया। दिल्ली के एम्स और सफदरजंग अस्पताल में 26 और 27 मई को होने वाली उनकी अगली चिकित्सा जांच को भी छोड़ दिया गया। वह लगातार टेस्ट्स से बचती रहीं, 1 जुलाई को एक और चिकित्सा जांच भी चूक गईं। हालांकि वह शुरू में 26 अगस्त, 2022 को एक चिकित्सा जांच के लिए सहमत हो गई थीं, लेकिन वह 2 सितंबर को महत्वपूर्ण एमआरआई के लिए नहीं आईं, जिसका उद्देश्य उनकी दृष्टि हानि का आकलन करना था।
UPSC ने दी चयन को चुनौती
इन टेस्ट में शामिल होने के बजाय, खेडकर ने एक बाहरी केंद्र से एक एमआरआई रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे यूपीएससी ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद यूपीएससी ने उनके चयन को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में चुनौती दी, जिसने 23 फरवरी, 2023 को उनके खिलाफ फैसला सुनाया। इसके बावजूद, बाद में उनका एमआरआई प्रमाण पत्र स्वीकार कर लिया गया, जिससे उनकी आईएएस नियुक्ति की पुष्टि हो गई।
ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर दर्जे में भी गड़बड़ झाला
विकलांगता के दावों के अलावा, खेडकर के ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर दर्जे के दावों में भी विसंगतियां पाई गईं। आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार ने बताया कि पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर के चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्ति 40 करोड़ रुपये बताई गई है। उनके पिता की संपत्ति को देखते हुए खेडकर का ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर का दर्जा पाना सवालों के घेरे में है। दिलीप खेडकर ने 2024 का लोकसभा चुनाव वंचित बहुजन आघाड़ी के टिकट पर लड़ा था।












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