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तो इस वजह से एकनाथ शिंदे ने उद्धव के खिलाफ विद्रोह किया! महाराष्ट्र के सीएम ने खुद बताया

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मुंबई, 5 जुलाई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे से अलग होने का फैसला कोई एक दिन में नहीं किया है। उनके मन में इस भावना के बीज शायद आठ वर्ष पहले ही डल चुके थे। लेकिन, पिछले ढाई वर्षों में एमवीए सरकार बनने से लेकर विधान परिषद चुनाव तक जो हालात पैदा हुए, उसने उन्हें आखिरी फैसला लेने को मजबूर कर दिया। सीएम शिंदे ने यह भी बताया है कि पूरे घटनाक्रम में संजय राउत के बयानों ने क्या रोल अदा किया है; और शरद पवार की ये भविष्यवाणी की नई सरकार ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगी, इसके वह क्या मायने समझ रहे हैं।

एनसीपी की वजह से विकल्प खोजने को मजबूर हुए

एनसीपी की वजह से विकल्प खोजने को मजबूर हुए

महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का एक विस्तृत इंटरव्यू द न्यू इंडियन एक्सप्रेस पोर्टल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें उन्होंने शिवसेना के अंदर की वो बातें बताई हैं, जिसने उन्हें आखिरकार उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत करने को मजबूर कर दिया। वैसे तो मुख्य रूप से उन्होंने वही दोनों कारण बताएं हैं, जिसकी वजह से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। इसमें से एक तो यह है कि एनसीपी शिवसेना को कमजोर कर रही थी, जिसपर कोई लगाम नहीं था। दूसरा, तत्कालीन मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उनकी सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने कहा, 'एक पार्टी के रूप में जमीन पर हमें कोई फायदा नहीं मिल रहा था। दूसरी तरफ एनसीपी के मंत्री अपनी पार्टी का विस्तार 2024 के विधानसभा चुनाव के लिए कर रहे थे। जबकि, हमारी पार्टी में कोई योजना नहीं थी।' उन्होंने खासकर एनसीपी के अजित पवार पर आरोप लगाया, कि वह सिर्फ अपनी पार्टी के हित में काम कर रहे थे। 'इसने हमें राजनीति में जीवित रहने के उपाय खोजने के लिए मजबूर किया।'

केंद्रीय एजेंसियों के डर के आरोपों को नकारा

केंद्रीय एजेंसियों के डर के आरोपों को नकारा

उन्होंने कहा कि वे पार्टी नेतृत्व से 5 बार मिले, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उनका कहना है कि वह पार्टी को बचाने के लिए चिंतित थे। तब जाकर इन 40 लोगों ने स्वाभाविक सहयोगी बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया। सेंट्रल एजेंसियों के डर से भाजपा के साथ जाने के आरोपों पर वे बोले- 'इन आरोपों में कुछ भी सच्चाई नहीं है। मैं पुलिस केस का सामना कर चुका हूं....बेलगाम (कर्नाटक) को महाराष्ट्र में शामिल करने को लेकर जब हमने प्रदर्शन किया था तो 40 दिनों तक जेल में था। सिर्फ जनता और उनका प्यार ही मेरी संपत्ति है। कुछ ही विधायकों पर सेंट्रल एजेंसियों की नजर है। बाकी को ईडी या दूसरे किसी भी केंद्रीय जांच से कोई लेना-देना नहीं है।'

तो इस वजह से एकनाथ शिंदे ने उद्धव के खिलाफ विद्रोह किया!

तो इस वजह से एकनाथ शिंदे ने उद्धव के खिलाफ विद्रोह किया!

लेकिन, आखिर वह कौन सी वजह रही कि आप बगावत को मजबूर हो गए ? इस सवाल पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, '2014 से 2019 तक बीजेपी मुझे डिप्टी सीएम का पद देने को तैयार थी, लेकिन नेतृत्व ने इसे मंजूर नहीं किया। जब एमवीए सरकार बनने वाली थी तो सीएम की कुर्सी का मैं भी एक दावेदार था, क्योंकि मैं एमवीए की सबसे बड़ी पार्टी से था। हालांकि, हमारे पार्टी के अध्यक्ष ने हमसे कहा कि कांग्रेस और एनसीपी उन्हें (उद्धव को) सीएम बनाना चाहती है। मुझे शहरी विकास मंत्रालय दिया गया, जहां कई लोगों ने दखल दिया। फिर विधान परिषद के चुनाव में मुझसे सलाह तक नहीं ली गई।'

बिना नाम लिए संजय राउत पर निशाना

बिना नाम लिए संजय राउत पर निशाना

शिवसेना के संकट में संजय राउत को वह किस हद तक जिम्मेदार मानते हैं ? इसके जवाब में वो बोले, 'सेना नेता के रूप में हमने कभी भी सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ नहीं बोला। लेकिन, इस बार कुछ पार्टी नेताओं ने हमारा नाम लेकर कहा और यहां तक कि जो महिला एमएलए हमारे साथ आईं उन तक को अपमानित किया। बालासाहेब ठाकरे ने महिलाओं के खिलाफ कभी भी एक शब्द बर्ताश्त नहीं किया। एक तरफ पार्टी नेतृत्व ने हमसे कहा कि आइए और बात कीजिए, और दूसरी तरफ हमारी पार्टी के कुछ नेता हमारी खिल्ली उड़ा रहे थे, लोगों से विधायकों के घरों पर हमले के लिए कह रहे थे, हमारे पोस्टर और बैनर फाड़े जा रहे थे।'

पवार जो बोलते हैं, उसका उलटा होता है- सीएम शिंदे

पवार जो बोलते हैं, उसका उलटा होता है- सीएम शिंदे

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने नई सरकार को लेकर कहा है कि यह ज्यादा दिन तक नहीं चलेगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'पवार भारत के एक वरिष्ठ नेता हैं। मैंने उनकी पार्टी के साथ काम किया है। एक बात हमें समझनी चाहिए कि पवार साहेब जो कुछ भी बोलते हैं, उसका ठीक उलटा होता है। इसलिए हमारी सरकार जल्दी नहीं गिरेगी। हमें भरोसा है कि शिवसेना और बीजेपी को अगले चुनावों में 200 से ज्यादा एमएलए मिलेंगे।'

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लोकतंत्र में नंबर का ही महत्त्व है- एकनाथ शिंदे

लोकतंत्र में नंबर का ही महत्त्व है- एकनाथ शिंदे

एकनाथ शिंदे ने स्पीकर के चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले शिवसेना के 14 विधायकों की अयोग्यता के बारे बताया कि, 'हमने इन विधायकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। स्पीकर फैसला लेंगे। उन्हें समझना चाहिए कि हमने बहुमत साबित कर दिया है। लोकतंत्र में नंबर का ही महत्त्व है, इसलिए उन्हें कोर्ट में नहीं जाना चाहिए। उन्हें हमलोगों को जनता के लिए काम करने देना चाहिए।'

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English summary
Maharashtra Chief Minister Eknath Shinde has told in an interview why he decided to rebel against Uddhav Thackeray
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