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Dussehra rally Shivaji Park: शिवसेना के लिए शिवाजी पार्क की दशहरा रैली क्यों महत्वपूर्ण है ?

मुंबई, 4 सितंबर: Dussehra rally Shivaji Park शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट ने मुंबई के शिवाजी पार्क में ही दशहरा रैली आयोजित करने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया था। जब अपनी ही शासित बीएमसी से भी उसे इजाजत नहीं मिली तो उसने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को बहुत बड़ा झटका लगा। दरअसल, उद्धव गुट ने यूं ही नहीं, शिवाजी पार्क के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। शिवाजी पार्क से इस पार्टी की सफलताएं जुड़ी हुई हैं और सबसे बढकर ये कि शिवाजी पार्क से शिवसेना की पहचान जुड़ी हुई है।

पहली बार दो जगहों पर हो रही है शिवसेना की दशहरा रैली

पहली बार दो जगहों पर हो रही है शिवसेना की दशहरा रैली

शिवसेना के 56 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि बुधवार को मुंबई में दो-दो स्थानों पर दशहरा रैली आयोजित की गई है। इस साल जून में शिवसेना पूरी तरह से दो फाड़ हो गई थी, इसलिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे दोनों के गुटों के लिए इस साल की दशहरा रैली प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है। बॉम्बे हाई कोर्ट की दखल के चलते उद्धव ठाकरे गुट को परंपरागत शिवाजी पार्क में ही दशहरा रैली करने की अनुमति मिल चुकी है, जबकि सीएम शिंदे के गुट वाली शिवसेना की दशहरा रैली बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स स्थित एमएमआरडीए ग्राउंड में आयोजित की गई है।

शिवसेना की दशहरा रैली क्या है ?

शिवसेना की दशहरा रैली क्या है ?

हर साल दशहरे के दिन सेंट्रल मुंबई में दादर के नजदीक शिवाजी पार्क मैदान में मुंबई और महाराष्ट्र भर के शिवसेना नेता- कार्यकर्ता जुटते रहे हैं। यह विजय का पर्व है और शिवसेना की ओर से इसी दिन दशहरा रैली मनाए जाने के पीछे भी यही भावना रही है। पार्टी के तौर पर शिवसेना के लिए यह सबसे बड़ा कार्यक्रम है और एक तरह से इस दिन पार्टी नए संकल्पों के साथ अपने राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ाती रही है।

शिवसेना के लिए दशहरा रैली का महत्त्व

शिवसेना के लिए दशहरा रैली का महत्त्व

शिवसेना का गठन 19 जून, 1966 को हुआ था। उसी साल करीब चार महीने बाद ही मुंबई के शिवाजी पार्क में पार्टी ने 30 अक्टूबर, 1966 को पहली दशहरा रैली आयोजित की थी। इस रैली को शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे ने संबोधित किया था। लेकिन, उस रैली में उनके पिता प्रबोधंकर ठाकरे ने भी अपनी बातें रखी थीं। शिवसेना के वरिष्ठ नेता सुभाष देसाई के मुताबिक उस रैली में प्रबोधंकर ठाकरे ने कहा था, 'महाराष्ट्र की सेवा के लिए मैं अपने बेटे को दे रहा हूं।' देसाई शिवसेना की पहली दशहरा रैली में भी मौजूद थे। वह रैली बहुत ही सफल रही थी और इसके चलते पार्टी का मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में एक आधार कायम हुआ। फिर क्या था, दशहरा रैली शिवसेना की परंपरा बन गई।

दशहरा रैली और शिवसेना

दशहरा रैली और शिवसेना

शिवसेना के इतिहास में दशहरा रैली से कई यादगार पल जुड़े हुए हैं। 2010 में 17 अक्टूबर को दशहरा रैली में ही पार्टी ने युवा सेना गठित की थी। तब बाल ठाकरे के पोते और 20 साल के आदित्य ठाकरे को इसका नेतृत्व सौंपा गया था। आदित्य ठाकरे अपने परिवार के पहले सदस्य हैं, जिन्होंने चुनाव लड़ा और मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। उद्धव ठाकरे ने अपनी कैबिनेट में बेटे को भी मंत्री पद दिया और वे एमवीए सरकार के सबसे प्रभावी चेहरों में शामिल रहे।

शिवसेना के लिए शिवाजी पार्क की दशहरा रैली क्यों मत्वपूर्ण है ?

शिवसेना के लिए शिवाजी पार्क की दशहरा रैली क्यों मत्वपूर्ण है ?

1966 में शिवसेना के गठन के साल में ही पहली दशहरा रैली शिवाजी पार्क में हुई थी और तब से लेकर सिर्फ 2020 में 2021 में कोविड महामारी के चलते यह परंपरा टूटी थी। 2020 में उद्धव ने इसे वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया था और पिछले साल भी कोविड की वजह से संख्या सीमित रखने के लिए इसे षणमुखानंद हॉल में संपन्न किया गया। शिवसेना के कार्यकर्ता शिवाजी पार्क को शिवतीर्थ मानते आए हैं। 2012 में पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे का अंतिम संस्कार भी यहीं पर हुआ था। 2019 में जब ठाकरे परिवार की परंपरा तोड़कर उद्धव ठाकरे के सामने मुख्यमंत्री पद के लिए शपथग्रहण का मौका आया तो उन्होंने इसके लिए भी शिवाजी पार्क को ही चुना। 1966 की पहली दशहरा रैली के लिए शिवाजी पार्क को खुद बाल ठाकरे ने चुना था। जबकि, उनके कई वरिष्ठों ने इसपर असहमति भी जताई थी।

शिवसेना के ठाकरे गुट ने जीती शिवाजी पार्क की लड़ाई

शिवसेना के ठाकरे गुट ने जीती शिवाजी पार्क की लड़ाई

इस साल अगस्त में ही शिवसेना के दोनों गुटों ने बीएमसी में शिवाजी पार्क में ही दशहरा रैली का आयोजन करने के लिए आवेदन डाला था। 22 अगस्त को बीएमसी में उद्धव गुट की ओर से पार्टी सांसद अनिल देसाई ने यह आवेदन दिया था। जबकि, 30 अगस्त को शिंदे गुट के एमएलए सदा सरवणकर ने भी ऐसा ही आवेदन दिया था। 21 सितंबर को बीएमसी ने मुंबई पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था का हवाला देकर दोनों गुटों को अनुमति देने से इनकार कर दिया। तब उद्धव गुट ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने अपनी पार्टी की ऐतिहासिक परंपरा का हवाला दिया। तब जाकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीएमसी से कहा कि शिवाजी पार्क में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना को दशहरा रैली आयोजित करने की अनुमति दे।

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