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'रामायण, महाभारत और बुद्ध से महाराष्ट्र का है गहरा संबंध', सीएम देवेंद्र फडणवीस ने किया ये दावा, दिए ये सबूत

Maharashtra News: महाराष्‍ट्र में चल रहे मराठी-हिंदी भाषा विवाद के बीच घिरे राज्‍य के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अब बड़ा दावा कर दिया है। देवेंद्र फडणवीस ने अपने पॉडकास्ट 'महाराष्ट्रधर्म' के हालिया एपिसोड में राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के बारे में बात करते हुए दावा करते हुए कहा रामायण, महाभारत और बुद्ध से महाराष्ट्र का है गहरा संबंध है।

सीएम फडणीस ने कहा, "महाराष्ट्र की भूमि सिर्फ राजनीतिक या भौगोलिक दृष्टि से नहीं, बल्कि धार्मिक, पौराणिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत समृद्ध है।" इसके साथ ही सीएम फडणवीस ने रामायण, महाभारत और गौतम बुद्ध के प्रसंगों के माध्यम से महाराष्ट्र की ऐतिहासिक भूमिका के बारे में विस्‍तार से बताया।

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रामायण से जुड़ा महाराष्ट्र का इतिहास

सीएम देंव्रेद्र फडणवीस ने कहा, "महाराष्ट्र की कहानी देवताओं के पदचिह्नों से शुरू होती है। वनवास के दौरान भगवान राम दंडकारण्य आए थे, जो आज का विदर्भ और नाशिक क्षेत्र है। पंचवटी वह पावन स्थान है, जहां लक्ष्मण ने लक्ष्मणरेखा खींची और रावण ने साधु के वेश में सीता का हरण किया। यह भूमि धर्म और अधर्म के संघर्ष की साक्षी रही है।" सीएम ने बताया कि जब हाल ही में वो कुंभ मेले की तैयारियों का जायज़ा लेने नाशिक गए थे, तब यह इतिहास उनकी आंखों के सामने जीवंत हो गया था।

महाभारत के पन्नों में भी है महाराष्ट्र

फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र की धरती महाभारत काल से भी जुड़ी है। उन्‍होंने कहा, "विदर्भ की धरती दमयंती की है। एक लोककथा के अनुसार, अर्जुन ने कोकण की गुफाओं में तपस्या की थी। यहीं की राजकुमारी रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण को पत्र भेजा और कृष्ण ने आकर उनका उद्धार किया। चिखलदरा में पांडवों ने अज्ञातवास बिताया और किचक जैसे अत्याचारी को पराजित किया।"

गौतम बुद्ध और महाराष्ट्र की शांतिपूर्ण विरासत

पॉडकास्ट में सीएम फडणवीस ने बताया कि भगवान बुद्ध शांति के संदेश के साथ महाराष्ट्र आए और अजंठा की पहाड़ियों में बुद्ध लेणियां निर्मित कीं। उन्‍होंने कहा, "महाराष्ट्र ने न केवल बुद्ध के उपदेश सुने, बल्कि उन्हें आचरण में भी उतारा। यह भूमि सत्य और ज्ञान के साधकों की प्रिय स्थली रही है।"

उन्होंने यह भी बताया कि शंकराचार्य ने मात्र आठ वर्ष की आयु में घर छोड़कर पूरे भारत की यात्रा की और करवीर (कोल्हापुर) में अपने ज्ञानपीठ की स्थापना की। फडणवीस के अनुसार, महाराष्ट्र उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाली एक आध्यात्मिक कड़ी है।

वारी परंपरा - भक्ति और समता का संगम

फडणवीस ने वारी परंपरा को महाराष्ट्र की आत्मा बताया। उन्‍होंने कहा "वारी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समता और भक्ति का जिवंत प्रवाह है। यहां जात-पात का कोई भेद नहीं है। हजारों वारकरी एक साथ पंढरपुर की ओर विठ्ठल के दर्शन हेतु निकलते हैं।"

फडणवीस ने एक वारकरी की कथा शेयर करते हुए कहा कि, "मेरे दादाजी बताते थे कि भगवान राम जब एक वृक्ष के नीचे रुके थे, तो फूलों की ज़रूरत पर पेड़ ने स्वयं फूल अर्पित किए। यह सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक स्मृति है।"

महाराष्‍ट्र की संत परंपरा

पॉडकास्ट में सीएम फडणवीस ने संत परंपरा के बारे बताया कि संत ज्ञानेश्वर ने किशोरावस्था में ही ज्ञानेश्वरी लिखी और पसायदान जैसा सार्वभौमिक प्रार्थना गीत रचा। मुक्ताबाई की ओवियों में समाज से प्रश्न पूछने की ताक़त थी। संत एकनाथ के अभंग करुणा और नैतिकता के प्रतीक हैं। संत चोखामेळा को मंदिर में प्रवेश नहीं मिला, लेकिन आज उनकी समाधि मंदिर के द्वार पर है।

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