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Bombay HC PIL के विषय से नाराज ! याचिका दाखिल करने वाले को एक लाख रुपये जमा करने का आदेश

अदालतों में लंबित लाखों मामले न्यायाधीशों के समक्ष बड़ी चुनौती हैं। इसी बीच जनहित का हवाला देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। नाराज कोर्ट ने पीटिशन फाइल करने वाले को एक लाख रुपये जमा कराने का निर्देश दिया।

Bombay HC PIL

Bombay HC PIL के विषय से इतना नाराज हुआ कि याचिका दाखिल करने वाले को एक लाख रुपये जमा करने का आदेश सुना दिया गया। दरअसल, देवनागरी लिपी यानी हिंदी भाषा में साइनबोर्ड के मामले पर वकील ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया, जो गलत साबित हुआ। कोई राहत मिलने के बजाय अदालत में देवनागरी साइनबोर्ड के मामले को जनहित का बताने वाले पर एक लाख रुपये जमान करने का भार आ गया।

दो जजों की पीठ में मामला

बंबई उच्च न्यायालय में दाखिल अजीबो-गरीब पीआईएल के मामले में इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसवी गंगापुरवाला की खंडपीठ ने कहा, याचिकाकर्ता ट्रस्ट को अपनी प्रामाणिकता साबित करने के लिए एक लाख रुपये जमा कराने होंगे। कार्यवाहक चीफ जस्टिस के साथ न्यायमूर्ति संदीप मार्ने भी पीठ में मौजूद रहे।

सुनवाई से पहले एक लाख रुपये जमा कराएं

बंबई उच्च न्यायालय ने एक ट्रस्ट को उसकी जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए पूर्व शर्त के रूप में एक लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है, जिसमें मांग की गई है कि शहर के हवाई अड्डे पर अंग्रेजी भाषा के साइनबोर्ड देवनागरी लिपी के साथ लगाए जाएं।

14 साल पुराने निर्देश को लागू कराने की मांग

'गुजराती विचार मंच' (जीवीएम) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय के 14 साल पुराने निर्देश को लागू करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा, 2008 में जारी दो परिपत्रों को लागू किया जाए। इसमें संकेत बोर्डों पर अंग्रेजी के साथ हिंदी और क्षेत्रीय भाषा का उपयोग करने का निर्देश दिया गया था।

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    सर्कुलर लागू करने में विफल रहे अधिकारी

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसवी गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति संदीप मार्ने की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि याचिकाकर्ता ट्रस्ट को अपनी प्रामाणिकता साबित करने के लिए एक लाख रुपये जमा कराने होंगे। पीठ ने आगे कहा कि अगर पैसे जमा किए जाते हैं तभी जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद अधिकारी सर्कुलर को लागू करने में विफल रहे हैं।

    भाषा से राष्ट्रीय एकीकरण

    याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता केवल महाराष्ट्र राज्य की आधिकारिक और क्षेत्रीय भाषा के लिए मान्यता चाहता है क्योंकि भाषा किसी भी राष्ट्र के नागरिकों के लिए एक अत्यधिक भावनात्मक मुद्दा है। इसमें एक बड़ी एकीकृत शक्ति है और यह राष्ट्रीय एकीकरण का शक्तिशाली साधन है।

    स्वदेशी लोगों पर अंग्रेजी थोपी जा रही

    याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मुंबई में हवाई अड्डे पर साइनेज बोर्ड आदि पर अंग्रेजी भाषा का प्रदर्शन स्वदेशी लोगों पर भाषा को थोपने के अलावा और कुछ नहीं है। यह भी दावा किया गया कि यदि अंग्रेजी के समतुल्य क्षेत्रीय भाषा वाले बैनर लगाए जाते हैं, तो यह लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक साबित होगा।

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