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BMC elections: कांग्रेस ने इस पार्टी से किया गठबंधन, 165/62 फॉर्मूले वाला ये तीसरा मोर्चा क्‍या करेगा कमाल?

BMC elections: मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकने वाले एक अहम कदम के तहत, कांग्रेस और प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने ऐन वक्त पर गठबंधन कर लिया है। यह साझेदारी लंबी बातचीत, गहरी राजनीतिक गणनाओं बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के दबाव के चलते बनी है।

एमसी चुनावों के लिए कांग्रेस ने अपने स्थापना दिवस वंचित बहुजन आघाड़ी (वंचित) के साथ गठबंधन की घोषणा की है। यह साझेदारी सिर्फ बीएमसी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्य की सभी 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों में भी लागू होगी।

BMC elections

यह चुनावी समझौता मतदाताओं के मतदान केंद्रों में कदम रखने से ठीक कुछ दिन पहले हुआ है। इस गठबंधन का समय आकस्मिक नहीं, बल्कि बेहद रणनीतिक है। पिछले एक दशक में मुंबई के राजनीतिक समीकरणों में तेजी से बदलाव आया है, ऐसे में दोनों दल शहर में अपनी प्रासंगिकता और पकड़ को फिर से मजबूत करना चाहते हैं।

कांग्रेस और VBA के बीच हुआ सीटों का बंटवारा

बृहद मुंबई महानगरपालिका चुनाव के लिए हुए इस चुनाव-पूर्व गठबंधन के तहत, कांग्रेस 165 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि वंचित बहुजन आघाड़ी ने 62 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। बीएमसी की कुल 227 सीटों पर वोटिंग 15 जनवरी को होगी, जिसके परिणाम अगले दिन 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।

VBA के लिए है ये बड़ा अवसर

अंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी के लिए, सीटों का यह बंटवारा केवल गणितीय आंकड़ा नहीं है। यह उस महानगर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का एक बड़ा अवसर है, जिसने अब तक उन्हें सीमित राजनीतिक स्थान दिया है। ये चुनाव इन दोनों सहयोगियों के लिए तय करेगा कि यह साझेदारी एक स्थायी खाका बनती है या सिर्फ एक बार का प्रयोग बनकर रह जाती है।

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बीएमसी चुनाव के लिए बने ये तीन गठबंधन

यह गठबंधन तब हुआ है जब कांग्रेस पहले से ही महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार गुट की एनसीपी के साथ महा विकास आघाडी (MVA) का हिस्सा है। हालांकि, महाराष्ट्र की राजनीति कभी सीधी नहीं रही। इसी चुनाव के लिए शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच अप्रत्याशित तालमेल ने भीतर ही भीतर टकराव और आरोपों को जन्म दिया है।

165/62 फॉर्मूले वाला ये तीसरा मोर्चा क्‍या करेगा कमाल?

कांग्रेस के नेताओं ने मनसे के साथ काम करने पर वैचारिक मतभेदों का हवाला देते हुए खुलकर आपत्ति जताई थी और ऐसे गठबंधनों को "पार्टी के मूल सिद्धांतों के खिलाफ" बताया था। इसके बावजूद, मुंबई में अकेले चुनाव लड़ने के अपने शुरुआती दावे के उलट, कांग्रेस ने अब वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ एक नया गठबंधन किया है।

कांग्रेस और VBA की क्‍या है रणनीति?

यह नया गठबंधन कांग्रेस और VBA दोनों के लिए तात्कालिकता और अवसर, दोनों का ही संकेत देता है। इसका मुख्य उद्देश्य दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के वोटों को एकजुट करना है। इन वोट बैंक को अकेले जुटाना दोनों ही पार्टियों के लिए मुश्किल साबित हो सकता था।

महाराष्‍ट्र निकाय चुनाव में महायुति को मिली शानदार जीत

मुंबई के समुद्र तटों और ऊंची इमारतों से परे, ग्रामीण महाराष्ट्र के नगर परिषदों और नगर पंचायतों में एक अलग ही राजनीतिक तस्वीर सामने आई है। यहां हाल के चुनावों में 'महायुति' गठबंधन - जिसमें भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल हैं - ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने क्रमशः 117, 53 और 37 नगर अध्यक्षों की सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस सिर्फ 28 सीटें ही जीत पाई।

ये आंकड़े एक बड़ी चेतावनी हैं

'महायुति' की राजनीतिक मशीनरी मजबूत, सुसंगठित और लगातार फैल रही है। यदि कांग्रेस और VBA राजनीतिक परिदृश्य में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहते हैं, तो उनकी असली परीक्षा मुंबई में शुरू होगी।

कांग्रेस और VBA का भविष्‍य तय करेगा ये बीएमसी चुनाव

एशिया के सबसे धनी नागरिक निकाय, बीएमसी पर हर पार्टी अपना कब्जा बनाए रखना चाहती है। जैसे-जैसे गठबंधन बढ़ते, बदलते और टकराते जा रहे हैं, सवाल सीधा है, क्या कांग्रेस-VBA का समझौता एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभरेगा, या मुंबई के राजनीतिक इतिहास में एक और छोटा सा अध्याय बनकर रह जाएगा? इसका जवाब केवल 15 जनवरी के मतपत्र और 16 जनवरी का फैसला ही बताएगा।

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