Ajit Pawar: Black Box कैसे नष्ट हुआ? अजित पवार प्लेन क्रैश साजिश थी? बेटे जय ने उठाए सवाल, गहराता जा रहा है शक
Ajit Pawar Death Black Box: महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार की प्लेन हादसे में हुई मौत को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। 28 जनवरी 2026 को बारामती की सुबह अजित पवार का लियरजेट 45XR लैंडिंग के दौरान रनवे पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ और उनके साथ कुल पांच लोगों की मौत हो गई। शुरुआती तौर पर इसे हादसा बताया गया, लेकिन अब सवाल सिर्फ हादसे पर नहीं, बल्कि ब्लैक बॉक्स के "नष्ट" होने पर टिक गए हैं। क्या यह तकनीकी विफलता थी या कुछ और गहराई में छिपा है?
अब अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार ने उन 'संभव गंभीर कमियों' की पूरी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि एयरक्राफ्ट का ब्लैक बॉक्स आसानी से खराब या नष्ट नहीं होता है, तो इस केस में कैसे हुआ।

अजित पवार के छोटे बेटे ने Black Box को लेकर उठाए सवला?
अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार ने खुलकर कहा है कि विमान का ब्लैक बॉक्स इतनी आसानी से नष्ट नहीं हो सकता। उन्होंने ऑपरेटिंग कंपनी VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड पर बैन लगाने और संभावित गंभीर कमियों की निष्पक्ष जांच की मांग की। जय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि महाराष्ट्र की जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है।
बुधवार (18 फरवरी) को पोस्ट की गई अपनी स्टोरी में जय पवार ने हालिया एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट की व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने VSR के फ्लाइट ऑपरेशन को तत्काल प्रभाव से रोकने की अपील की और एयरलाइन के विमानों के मेंटेनेंस में संभावित गंभीर खामियों की स्वतंत्र जांच कराए जाने पर जोर दिया। यह बयान उस मुलाकात के बाद आया जब महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार और NCP नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर CBI जांच की मांग की।

ब्लैक बॉक्स जला कैसे? (Black Box Damage Mystery)
जांच एजेंसी Aircraft Accident Investigation Bureau यानी AAIB ने बताया कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से डेटा निकालने के लिए विशेष तकनीकी सहायता मांगी गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के मुताबिक हादसे के बाद लगी आग से ब्लैक बॉक्स को नुकसान पहुंचा।
हालांकि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) का डेटा सफलतापूर्वक डाउनलोड कर लिया गया है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) जिसे अमेरिकी कंपनी Honeywell ने बनाया है, उसकी तकनीकी जांच जारी है।
यहीं से विवाद गहराता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक बॉक्स एक घंटे तक 1100 डिग्री सेल्सियस तापमान झेल सकता है। हादसे में आग सीमित बताई जा रही है और प्लेन जमीन से कुछ फीट ऊंचाई पर था। ऐसे में पूरी तरह जल जाना कई सवाल खड़े करता है।

रोहित पवार और राजनीतिक एंगल (Political Angle)
NCP (SP) विधायक रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि हादसे के पीछे जानबूझकर की गई गतिविधि की आशंका है। उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू पर VSR कंपनी को बचाने का आरोप लगाया और कहा कि कंपनी के मालिकों के राजनीतिक संबंधों की भी जांच होनी चाहिए।
रोहित ने यह भी कहा कि हादसे से पहले के 24 घंटे बेहद अहम हैं। अजित पवार की यात्रा योजना आखिरी वक्त में बदली गई थी। पहले उन्हें सड़क मार्ग से पुणे जाना था, लेकिन अचानक विमान से जाने का फैसला हुआ। क्या यही बदलाव कहानी का टर्निंग पॉइंट है?
रोहित पवार ने कहा कि 27 तारीख को दिवंगत अजित पवार से कौन मिलने आया था और शाम 6:50 से 7:05 बजे के बीच किसका फोन आया, ये दोनों बातें जांच के लिए बेहद अहम हैं। उन्होंने कहा कि अभी वे सिर्फ सीमित जानकारी ही सार्वजनिक कर रहे हैं। रोहित ने यह भी बताया कि जब विमान मुंबई से बारामती के लिए उड़ा, तब उसका फ्यूल टैंक पूरी तरह भरा था। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी छोटी दूरी की उड़ान के लिए टैंक फुल करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी ब्लैक बॉक्स के जलने को "रहस्यमय और गंभीर" बताया।
Ajit Pawar Plane Crash Reason: क्या था उस सुबह का घटनाक्रम?
28 जनवरी सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ान भरी गई और करीब 8:45 बजे बारामती में लैंडिंग के दौरान विमान नियंत्रण से बाहर हो गया। DGCA के मुताबिक रनवे पर दुर्घटनाग्रस्त लैंडिंग के बाद सभी यात्रियों की मौत हुई। ब्लैक बॉक्स अगले दिन बरामद हुआ।
ब्लैक बॉक्स क्या होता है? (What is Black Box)
ब्लैक बॉक्स दो हिस्सों में होता है। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर FDR जो 25 घंटे तक की तकनीकी जानकारी सुरक्षित रखता है, और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर CVR जो अंतिम दो घंटे की बातचीत रिकॉर्ड करता है। इसमें क्रैश सर्वाइवेबल मेमोरी यूनिट, थर्मल इंसुलेशन और अंडरवॉटर लोकेटर बीकन जैसी तकनीक होती है।
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर यानी FDR का आकार लगभग 16 सेमी ऊंचा, 50 सेमी लंबा और 4.8 किलोग्राम वजन का होता है। CVR थोड़ा छोटा लेकिन उतना ही सुरक्षित डिजाइन किया जाता है। यही वजह है कि विशेषज्ञों के मुताबिक इसका पूरी तरह जल जाना सामान्य परिस्थिति में मुश्किल माना जाता है।
जांच कहां तक पहुंची?
AAIB ने कहा है कि जांच ICAO Annex 13 के अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत हो रही है। एजेंसी ने अपील की है कि निष्कर्ष आने तक अटकलों से बचा जाए। वहीं मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से संवाद का भरोसा दिया है।
सवाल अभी भी हवा में हैं। क्या यह महज एक तकनीकी त्रुटि थी या फिर राजनीति और सत्ता की परतों में छिपा कोई बड़ा खेल? जांच पूरी होने तक जवाब अधूरे हैं, लेकिन शक की लपटें धीमी नहीं पड़ रहीं।
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