Russell Viper snake: मंदिर में छिपकर सीटी बजा रहा था काल, डस लेता तो निकल जाती जान
Russell Viper snake दुनिया के सबसे जहरीले सांप में शामिल है। सागर व आसपास के इलाके में यह बहुतायत नजर आने लगे है। बीते रोज शाम को सूर्य ग्रहण के दौरान जब मंदिर था, करीब 4 से 5 फीट लंबा रसैल वाइपर प्रजाति का सांप कुंडली मारे बैठा था। शाम को मंदिर पहुंचे पुजारी और श्रृद्धालुओं को सीटी जैसी आवाज रहा रही थी। ध्यान से एक कोने में देखा तो होश फाख्ता हो गए। वहां एक मोटा और खतरनाक सांप बैठा था। इसकी सूचना स्नैक केचर को दी गई थी।

पिता-पुत्र की जोड़ी ने पकड़ा खतरनाक सांप
स्नैक केचर अकील खान और उनके बेटे असद खान को मकरोनिया ओवर ब्रिज के नीचे स्थित हनुमान मंदिर में सांप होने की सूचना दी गई थी। वे पहुंचे तो मंदिर के आसपास लोगों की भीड़ लगी थी, लेकिन मंदिर में घुसने की कोई भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। अकील बाबा के बेटे असद ने मंदिर में जाकर देखा तो एक कोने में रसैल वाइपर प्रजाति का सांप कुंडली मारे शिकार की तलाश में फुंकार रहा था। यह सांप सीटी की तरह आवाज निकाल रहा था। असद ने आगे होकर अपने पिता के साथ मिलकर उसे काबू में कर लिया।

भगवान और भक्त के बीच में आ गया था काल
बीती शाम को सूर्य ग्रहण के पहले मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में साफ-सफाई और पट खुलने के पहले भगवान की सेवा होनी थी, लेकिन बजरंगबली और भक्तों के बीच में खतरनाक सांप के रुप में आकर काल बैठ गया। जब तक उसे पकड़ नहीं लिया गया, तब तक न पुजारी न भक्त मंदिर में घुस सके। सांप के कारण मंदिर करीब एक घंटे की देरी से खुल सका।

रसैल वाइपर काटने के बाद रीटेक नहीं है
अकील बाबा ने बताया कि रसैल वाइपर प्रजाति का सांप काफी बड़ा व खतरनाक है। यह बिजली के माफिक फुर्तीला होता है। इसका जहर इतना खतरनाक होता है कि इंसान के शरीर में चंद सेकंड में खून को जमा देता है। जिसको भी काट ले उसकी जान निकलना तय है। इसके जहर से खून तत्काल जम जाता है, थक्का जमने से दिल को खून नहीं पहुंचता और तत्काल मौत हो जाती है। मंदिर से पकड़ा सांप करीब 4 किलो का है और लगभग पांच फीट लंबा हैं।

मौसम में ठंडक के कारण अब धूप सेंकने बाहर निकल रहे सांप
मौसम में ठंडक घुलने के बाद अब सांप दिन के उजाले में धूप सेंकने के लिए बाहर निकल आते हैं। मानवीय हस्तक्षेप से बचने के लिए ये खेत, सूखे स्थान, पेड़ो की टहनियों सहित आसपास बैठ जाते है, कभी-कभी यह आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं। इस कारण इंसानों से इनका आमना-सामना हो जाता है। शहरी बसाहट के चलते खेत भी अब कॉलोनी बन गए हैं, इसलिए खुली जगह से बिलों से निकलकर ये घरों के आसपास तक पहुंच जाते हैं।

अंडे के बजाय सीधे बच्चों को जन्म देता है
रसैल वाइपर सांप पिंडज वाले सर्पों में गिना जाता है। अर्थात यह अन्य सांप जो अंडे देते हैं, उनके विपरीत इस प्रजाति की मादा सर्प सीधे बच्चों को जन्म देती हैं। अन्य प्रजाति की तुलना में यह बच्चे भी ज्यादा देती है। रसैल वाइपर द्वारा एक साथ 50 से 60 सपोलों का जन्म दिया जा सकता है।












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