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रतलाम में जनसुनवाई का शर्मनाक चेहरा: SDM ने बुजुर्ग महिला को दिया धक्का, अफसरशाही पर भड़का गुस्सा

MP News: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में जनसुनवाई का एक ऐसा नजारा सामने आया है, जिसने प्रशासनिक अफसरशाही का क्रूर चेहरा उजागर कर दिया। 3 जून 2025 को रतलाम कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में एक बुजुर्ग महिला अपनी शिकायत लेकर पहुंची थी, लेकिन उसे न केवल सुनवाई से वंचित रखा गया, बल्कि SDM और तहसीलदार ने कथित तौर पर धक्का देकर बाहर निकाल दिया।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर जनसुनवाई में ही आम आदमी की सुनवाई नहीं होगी, तो फिर वह अपनी फरियाद लेकर कहां जाए? यह घटना न केवल प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या अफसरशाही जनता को "सड़क का कीड़ा" समझने लगी है?

Ratlam public hearing video goes viral SDM pushes an elderly woman IAS get angry in mp

घटना का मंजर: बुजुर्ग महिला की बेइज्जती

3 जून 2025 को रतलाम कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में 65 वर्षीय शारदा बाई (नाम बदला गया) अपनी जमीन से संबंधित शिकायत लेकर पहुंची थीं। शारदा बाई का कहना था कि उनकी जमीन पर कुछ दबंगों ने अवैध कब्जा कर लिया है, और स्थानीय प्रशासन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। जनसुनवाई में वह अपनी बात रखने के लिए कलेक्टर से मिलने पर अड़ी थीं। लेकिन, उनकी बात सुनने की बजाय SDM सुनीता मीणा और तहसीलदार ने कथित तौर पर उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि महिला आरक्षकों ने शारदा बाई का हाथ पकड़कर उन्हें खींचा, जबकि वह अपनी फरियाद दोहरा रही थीं। शारदा बाई ने गुस्से में अधिकारियों को खरी-खोटी भी सुनाई और कहा, "तुम्हें शर्म नहीं आती, एक बुजुर्ग को इस तरह धक्के मारते हो?"

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में शारदा बाई की बेबसी और अधिकारियों की संवेदनहीनता ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "महिला बस अपनी बात कहना चाहती थी, लेकिन SDM ने उसे बिल्कुल तवज्जो नहीं दी। यह जनसुनवाई का मजाक है।"

सोशल मीडिया पर आक्रोश: "यह कैसी जनसुनवाई?"

घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा, "रतलाम SDM ने एक बुजुर्ग महिला को शिकायत करने पर धक्का दे मारा। यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि अफसरशाही की संक्रमित मानसिकता का नंगा प्रदर्शन है।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "ऐसे अफसरों को कब तक गोद में बैठाओगे?

कई यूजर्स ने इस घटना को मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था की नाकामी से जोड़ा। एक पोस्ट में लिखा गया, "कलेक्टर ऑफिस में जनसुनवाई में बुजुर्ग महिला के साथ ऐसा बर्ताव? जनता न्याय की उम्मीद कहां से करे?" कुछ लोगों ने मांग की कि SDM और तहसीलदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और शारदा बाई की शिकायत पर तुरंत सुनवाई की जाए।

प्रशासन का रवैया: माफी के बजाय सफाई

घटना के बाद रतलाम कलेक्टर कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक माफी नहीं आई। एक बयान में SDM सुनीता मीणा ने दावा किया कि शारदा बाई "हंगामा कर रही थीं" और "सुनवाई का समय खत्म होने के बाद भी अड़ गई थीं।" उन्होंने कहा, "हमने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वह चिल्ला रही थीं। कोई धक्का-मुक्की नहीं हुई, बस उन्हें बाहर ले जाया गया।" यह सफाई जनता के गुस्से को और भड़काने वाली साबित हुई।

रतलाम के SP ने कहा कि पुलिस ने केवल स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की थी, और कोई अभद्रता नहीं हुई। हालांकि, वीडियो में साफ दिख रहा है कि महिला आरक्षकों ने शारदा बाई को खींचकर बाहर निकाला, जिससे उनकी बेइज्जती हुई।

शारदा बाई की कहानी, एक आम आदमी की बेबसी

शारदा बाई रतलाम के पास एक छोटे से गांव की रहने वाली हैं। उनके परिवार ने बताया कि उनकी जमीन पर कुछ स्थानीय दबंगों ने कब्जा कर लिया है, और कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। शारदा बाई की बेटी राधा ने कहा, "मां कई बार तहसील कार्यालय गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जनसुनवाई में भी उन्हें अपमानित किया गया। क्या अब गरीब अपनी बात भी नहीं कह सकता?"

शारदा बाई ने पत्रकारों से कहा, "मैंने सोचा था कि कलेक्टर साहब मेरी बात सुनेंगे। लेकिन वहां तो मुझे धक्के मारकर निकाल दिया गया। क्या यही इंसाफ है?" उनकी बेबसी और गुस्सा उस आम आदमी की पीड़ा को दर्शाता है, जो प्रशासन से उम्मीद लेकर जाता है, लेकिन उसे निराशा और अपमान ही मिलता है।

पहले भी विवादों में रही हैं SDM सुनीता मीणा

यह पहली बार नहीं है जब SDM सुनीता मीणा विवादों में घिरी हैं। सितंबर 2024 में राजस्थान के गंगापुर सिटी जिले के टोडाभीम में अतिक्रमण हटाने के दौरान भी उनके खिलाफ बुजुर्गों के साथ अभद्रता का आरोप लगा था। उस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें सुनीता मीणा को एक बुजुर्ग के साथ धक्का-मुक्की करते देखा गया था। उस समय भी लोगों ने उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: सरकार पर दबाव

इस घटना ने मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्षी कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए कहा कि "मोहन यादव सरकार में अफसरशाही बेलगाम हो गई है।" कांग्रेस नेता और रतलाम से पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने कहा, "यह शर्मनाक है कि एक बुजुर्ग महिला को जनसुनवाई में अपमानित किया गया। क्या यही है भाजपा का सुशासन?"

कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने मांग की है कि SDM सुनीता मीणा को निलंबित किया जाए और शारदा बाई की शिकायत की तत्काल जांच हो। रघुवंशी समाज और जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने भी इस घटना की निंदा की और प्रदर्शन की चेतावनी दी। एक X पोस्ट में लिखा गया, "अगर यह शहरी इलाका होता, तो मीडिया और सरकार तुरंत सक्रिय हो जाती। लेकिन गरीब और ग्रामीणों की कोई नहीं सुनता।"

मुख्यमंत्री का रुख: कार्रवाई का आश्वासन

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, "जनसुनवाई जनता की समस्याओं के समाधान के लिए होती है, न कि उनकी बेइज्जती के लिए। इस मामले की जांच होगी, और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।" हालांकि, उन्होंने SDM के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की कोई घोषणा नहीं की, जिससे कई लोग नाराज हैं।

Ratlam public hearing video: जनसुनवाई का उद्देश्य और वास्तविकता

मध्य प्रदेश में जनसुनवाई का आयोजन हर मंगलवार को कलेक्टर कार्यालयों में किया जाता है, ताकि आम लोग अपनी समस्याएं सीधे अधिकारियों तक पहुंचा सकें। लेकिन रतलाम की यह घटना सवाल उठाती है कि क्या यह व्यवस्था वाकई जनता के लिए है, या सिर्फ खानापूर्ति? स्थानीय पत्रकार रमेश ठाकुर ने कहा, "रतलाम में जनसुनवाई का यह हाल है कि एक बुजुर्ग महिला को धक्के मारकर निकाला गया। अगर यही स्थिति रही, तो लोग प्रशासन पर भरोसा कैसे करेंगे?"

भविष्य के लिए सवाल और सबक

  • रतलाम की इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
  • क्या जनसुनवाई जैसी व्यवस्था वाकई आम आदमी की समस्याओं के समाधान के लिए है?
  • अफसरों की जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाएगी, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों?
  • क्या SDM और तहसीलदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी दब जाएगा?
  • ग्रामीण और गरीब लोगों की शिकायतों को सुनने के लिए प्रशासन की प्रक्रिया को कैसे मजबूत किया जाएगा?

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