MP News: बांधवगढ़ में बाघों और हाथियों की मौतों की लापरवाही पर उठे सवाल: 3 साल में 93 टाइगर की मौत
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, जो देश में सबसे अधिक टाइगर डेंसिटी वाला क्षेत्र है, इन दिनों बाघों और हाथियों की लगातार मौत के कारण चर्चा में है। पिछले तीन सालों में यहां 93 बाघों की मौत हो चुकी है, जो देश के किसी भी अन्य टाइगर रिजर्व से कहीं अधिक है।
इस साल अब तक 12 बाघों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश की मौत रिजर्व के अंदर ही हुई है।

बांधवगढ़ में बाघों की मृत्यु का आंकड़ा तो चौंकाने वाला है ही, लेकिन हाल ही में 10 हाथियों की रहस्यमयी मौत ने वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 28 अक्टूबर की रात को बांधवगढ़ के खितौली और पतोर रेंज में इन हाथियों ने दर्द से तड़पते हुए जोर-जोर से चिंघाड़ की। ग्रामीणों ने इस बारे में वन विभाग को सूचित किया, लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते कार्रवाई में काफी समय लगा। जब वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा, तब तक कई हाथियों की मौत हो चुकी थी, और इसके बाद भी हाथियों के शवों का सही तरीके से निपटान नहीं किया गया।
लापरवाही का शिकार हाथी और बाघ
बांधवगढ़ में हाथियों की मौत का सिलसिला अब तक जारी है, और इसकी जांच चल रही है। 10 हाथियों की मौत का राज अब तक नहीं खुल सका है, और वन विभाग पर आरोप है कि वे समय पर स्थिति का आकलन नहीं कर पाए। वन अमला देर से मौके पर पहुंचा और वाइल्डलाइफ वेटरनरी स्टाफ भी साथ नहीं था। इसके अलावा, एक हाथी की मौत के बाद विभाग द्वारा प्रोटोकॉल के बिना उसके अवशेषों को जलाकर नष्ट कर दिया गया, जिससे मामले में और भी विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) फतेसिंह निनामा को सस्पेंड कर दिया गया है।
बांधवगढ़ में बाघों की मौत की बढ़ती दर
एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से लेकर सितंबर 2024 तक बांधवगढ़ में 93 बाघों की मौत हुई है, जो किसी भी अन्य टाइगर रिजर्व के मुकाबले सबसे ज्यादा है। इस साल 12 बाघों की मौत हो चुकी है। बांधवगढ़ में बाघों की सर्वाधिक संख्या है, और 2023 के आंकड़ों के अनुसार यहां 165 बाघ पाए गए थे, जबकि मध्य प्रदेश के छह अन्य टाइगर रिजर्व में कुल 259 बाघ थे। वन विभाग की कार्यकुशलता की वजह से पिछले चार सालों में 41 बाघों का कुनबे में इजाफा हुआ था, लेकिन बाघों के प्रबंधन में विभाग की कई कमजोरियां भी उजागर हो रही हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर कदम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले में गंभीरता दिखाई है और हाथियों के मूवमेंट की निगरानी के लिए छह विशेष दलों का गठन किया है। इसके साथ ही, मानव-हाथी द्वंद और वन्यजीव प्रबंधन के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य वन संरक्षक ने 35 स्टाफ को इस कार्य के लिए नियुक्त किया है, ताकि ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके।












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