नर्मदापुरम जिला अस्पताल में रातभर बिजली गुल: प्रसूताओं और नवजातों का हाल बेहाल, जनरेटर बंद, गेट पर ताला
MP News: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिला अस्पताल में शनिवार-रविवार (2-3 अगस्त 2025) की दरमियानी रात करीब साढ़े चार घंटे तक बिजली गुल रहने से मरीजों, खासकर प्रसूताओं और नवजातों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रात 8:50 से 10:20 बजे तक और फिर 2:30 से सुबह 5:00 बजे तक बिजली न होने से प्रसूता वार्ड, भर्ती वार्ड, वेटिंग रूम, और बच्चा वार्ड अंधेरे में डूबे रहे।
गर्मी और उमस के कारण नवजात बच्चे और महिलाएं बिलखते रहे, जबकि परिजन मोबाइल की टॉर्च और हाथ के पंखों से काम चलाने को मजबूर थे। नर्मदापुरम जिला अस्पताल में साढ़े 4 घंटे बिजली गुल, प्रसूताएं और नवजात परेशान। जनरेटर और इनवर्टर बंद, प्रशासन की लापरवाही उजागर।

रातभर अंधेरा: मरीजों और नवजातों की पीड़ा
नर्मदापुरम जिला अस्पताल, जो संभाग का प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, शनिवार-रविवार की रात एक दुखद त्रासदी का गवाह बना। पहली बार रात 8:50 बजे से 10:20 बजे तक अस्पताल के आधे हिस्से और डॉक्टर्स कॉलोनी में बिजली गायब रही। इस दौरान एक गर्भवती महिला की डिलीवरी को रोकना पड़ा, क्योंकि ऑपरेशन थिएटर में अंधेरा था। दूसरी बार रात 2:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक फिर बिजली गुल हो गई, जिससे हालात और बदतर हो गए।
रसीदपुर की पार्वती बाई पाल ने बताया, "मेरी बहू की छह दिन पहले डिलीवरी हुई थी। रात को गर्मी और घुटन से मेरा नवजात पोता रोता रहा। पूरे वार्ड में अंधेरा और उमस थी। हम मोबाइल की टॉर्च और कपड़े से हवा करते रहे।" परिजनों ने बताया कि बच्चा वार्ड में ऑक्सीजन मास्क और अन्य उपकरणों के लिए बैटरी की व्यवस्था भी नहीं थी, जिससे नवजातों को खतरा बढ़ गया।
गेट पर ताला: परिजन फंसे, मदद की गुहार बेकार
दूसरे बिजली कट के दौरान, रात 2:30 बजे, अस्पताल स्टाफ ने प्रसूता वार्ड के रास्ते में गेट बंद कर ताला लगा दिया। इससे न केवल मरीज, बल्कि उनके साथ आए परिजन भी बाहर नहीं निकल सके"गर्मी से परेशान प्रसूताएं और उनके परिजन चिल्लाते रहे, लेकिन कोई मदद नहीं पहुंची। परिजन गेट खुलवाने की गुहार लगाते रहे ताकि बच्चों को खुली हवा में ले जा सकें।" एक परिजन, रमेश ठाकुर, ने कहा, "हम बच्चों को बाहर ले जाना चाहते थे, लेकिन ताला लगा होने से मजबूर थे। यह अमानवीय व्यवहार था।"
जनरेटर और इनवर्टर: कागजों में व्यवस्था, हकीकत में नाकामी
जिला अस्पताल में आपातकाल के लिए जनरेटर और इनवर्टर की व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, लेकिन दोनों बिजली कट के दौरान ये बंद रहे। नर्मदापुरम जिला अस्पताल में जनरेटर और इनवर्टर कागजों में हैं, लेकिन रातभर अंधेरा छाया रहा।" मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि ये व्यवस्थाएं केवल दिखावे के लिए हैं। एक परिजन, श्यामलाल, ने कहा, "अगर जनरेटर चालू होता, तो कम से कम ऑपरेशन थिएटर और बच्चा वार्ड को बिजली मिलती। लेकिन स्टाफ ने कोई ध्यान नहीं दिया।"
स्थायी इलेक्ट्रीशियन की कमी: प्राइवेट कर्मचारियों पर निर्भरता
अस्पताल में 33 केवी का HT कनेक्शन और अलग पावर स्टेशन है, लेकिन लंबे समय से स्थायी इलेक्ट्रीशियन की नियुक्ति नहीं हुई है। दो इलेक्ट्रीशियन के रिटायर होने के बाद अस्पताल प्राइवेट कर्मचारियों पर निर्भर है। शनिवार रात भी बिजली कंपनी के कर्मचारियों को बुलाकर लाइन ठीक कराई गई। मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के विनोद भदौरिया ने कहा, "अस्पताल का HT कनेक्शन ठीक था। यह उनकी आंतरिक खराबी थी, जिसे उनके कर्मचारियों को देखना चाहिए।"
प्रशासनिक लापरवाही: CMHO का बयान विवादास्पद
बिजली कट के दौरान सिविल सर्जन डॉ सुनीता कामले को दो बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। सीएमएचओ डॉ. नरसिंह गहलोत का जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा, "मेरे बंगले और कॉलोनी में भी लाइट नहीं थी।"
नर्मदापुरम अस्पताल: संभाग का केंद्र, लेकिन बदहाल व्यवस्था
नर्मदापुरम जिला अस्पताल न केवल जिले, बल्कि पूरे संभाग का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहां सीहोर जिले के बुधनी, नसरुल्लागंज, और रहती जैसे क्षेत्रों से भी मरीज, खासकर प्रसूताएं, इलाज के लिए आती हैं। @news18.com ने 3 अगस्त 2025 को बताया कि अस्पताल में रोजाना 50-60 डिलीवरी होती हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी मरीजों के लिए मुसीबत बन रही है। पिछले साल भी इसी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से एक नवजात की मौत का मामला सुर्खियों में रहा था।
स्थानीय निवासी रमेश पाल ने कहा, "यह अस्पताल संभाग का गौरव है, लेकिन बिजली और स्टाफ की कमी इसे मजाक बना रही है।" सामाजिक कार्यकर्ता रीना शर्मा ने कहा, "नवजात और प्रसूताओं की जान खतरे में डालना अपराध है। प्रशासन को तत्काल स्थायी इलेक्ट्रीशियन नियुक्त करना चाहिए।"
मध्य प्रदेश में अस्पतालों की स्थिति
नर्मदापुरम का यह मामला मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति को उजागर करता है। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में बिजली कट से ऑपरेशन थिएटर बंद रहा, जिससे कई सर्जरी टल गईं। इसी तरह 15 मई 2025 को रीवा के संजय गांधी अस्पताल में जनरेटर की खराबी से मरीजों को परेशानी का सामना करने की खबर दी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के 70% सरकारी अस्पतालों में बिजली और जनरेटर की समस्याएं आम हैं। 2025 में जनवरी से जुलाई तक 1,200 से अधिक शिकायतें बिजली कट और उपकरणों की खराबी से संबंधित दर्ज की गईं।
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