PAK समर्थक नारे लगाने पर फैजान को भारत में मिली ऐतिहासिक सजा! तिरंगे को देनी पड़ी 21 बार सलामी
Faizan Salute Tiranga: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के आरोपी फैजान को एक ऐसी अनोखी सजा दी, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। फैजान, जिसे इस साल मई में गिरफ्तार किया गया था, ने अदालत के निर्देश के अनुसार मिसरोद पुलिस थाने में तिरंगे को 21 बार सलामी दी और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि फैजान को जमानत पर कुछ शर्तों के साथ रिहा किया जा सकता है। इन शर्तों का उद्देश्य उसके अंदर देशभक्ति और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना था। न्यायमूर्ति डी के पालीवाल ने इस सजा का आदेश दिया, जिसमें फैजान को महीने के पहले और चौथे मंगलवार को थाने में तिरंगे को सलामी देने और 'भारत माता की जय' के नारे लगाने का निर्देश दिया गया।

फैजान को ऐतिहासिक सजा
मिसरोद पुलिस थाने के प्रभारी मनीष राज भदौरिया ने बताया कि फैजान ने अदालत के निर्देशानुसार 21 बार तिरंगे को सलामी दी और यह पूरी प्रक्रिया मीडिया की मौजूदगी में हुई। इस दौरान पूरे कृत्य की वीडियोग्राफी भी की गई ताकि उच्च न्यायालय को साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सके। यह सजा मुकदमे के अंत तक जारी रहेगी।
फैजान का पछतावा
फैजान ने पीटीआई से बात करते हुए स्वीकार किया कि पाकिस्तान समर्थक नारे लगाना और इस तरह की रील बनाना उसकी बड़ी गलती थी। उन्होंने कहा कि अब उन्हें इस बात का पछतावा है और उन्होंने अपने दोस्तों से भी आग्रह किया है कि वे इस तरह की गतिविधियों से दूर रहें। फैजान ने यह भी माना कि किसी भी व्यक्ति को अपने देश के खिलाफ नहीं जाना चाहिए और उन्हें इस बात का अहसास हुआ है कि देशभक्ति क्या होती है।
पाकिस्तान समर्थक नारे का विवाद
फैजान उर्फ फैजल को आईपीसी की धारा 153 बी के तहत गिरफ्तार किया गया था, जो कि राष्ट्रीय एकता और सद्भावना के खिलाफ कार्यों से संबंधित है। उनके खिलाफ आरोप था कि उन्होंने एक वीडियो में पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए थे, जो कि समाज में दुश्मनी और विभाजन को बढ़ावा देने वाले थे। अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह कृत्य न केवल विभिन्न समूहों के बीच तनाव को बढ़ावा देता है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए भी हानिकारक था।
न्यायालय का उद्देश्य
न्यायालय ने इस सजा का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका मकसद फैजान को अपने देश के प्रति गर्व और जिम्मेदारी का अहसास कराना था। न्यायालय के अनुसार, जिस देश में वह पैदा हुआ और पला-बढ़ा, उसके खिलाफ नारे लगाना एक गंभीर अपराध है। फैजान को यह सजा दी गई ताकि वह अपनी गलती को समझे और भविष्य में ऐसी गतिविधियों से दूर रहे।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि किसी भी तरह के देशविरोधी कृत्य के लिए सजा का मकसद केवल दंड देना नहीं है, बल्कि उसमें सुधार की भी गुंजाइश होती है। फैजान की इस सजा ने उन्हें देशभक्ति का महत्व सिखाया और यह संदेश दिया कि हर नागरिक का फर्ज है कि वह अपने देश का सम्मान करे। ऐसी सजा न केवल आरोपी को बल्कि समाज के बाकी लोगों को भी एक सशक्त संदेश देती है।












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