MP News: मध्य प्रदेश के जबलपुर समेत 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 24 घंटे में 4.5 इंच बारिश की संभावना
MP weather News: मध्य प्रदेश में चार दिन की शांति के बाद मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। सोमवार रात से भोपाल, इंदौर, उज्जैन सहित कई जिलों में तेज बारिश ने दस्तक दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार, 22 जुलाई 2025 को जबलपुर सहित 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
इन जिलों में अगले 24 घंटों में 4.5 इंच (लगभग 115 मिमी) तक बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी दी है, क्योंकि साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम और सक्रिय मानसून ट्रफ लाइन के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी में 24 जुलाई से एक नया लो प्रेशर क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने जा रहा है। यह मौसमी सिस्टम मध्य प्रदेश में बारिश की तीव्रता को और बढ़ाएगा।

भारी बारिश का अलर्ट: प्रभावित जिले
- मौसम विभाग ने निम्नलिखित 12 जिलों में भारी बारिश (64.5 मिमी से 115.5 मिमी) का अलर्ट जारी किया है:
- जबलपुर, मंडला, दिनदोरी, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, देवास, सीहोर
इन जिलों में अगले 24 घंटों में 4.5 इंच तक बारिश की संभावना है, जिसके कारण निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। इसके अलावा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, और उज्जैन जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।
पिछले 24 घंटों का बारिश का लेखा-जोखा
- पिछले 24 घंटों में मध्य प्रदेश के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- इंदौर और सिवनी: 19 मिमी (लगभग 0.75 इंच)
- सतना और सीधी: 12.7 मिमी से अधिक (लगभग 0.5 इंच)
- खजुराहो, उमरिया, और बालाघाट (मलाजखंड): करीब 12.7 मिमी (0.5 इंच)
- भोपाल, दमोह, जबलपुर, सागर, और रायसेन: हल्की बारिश
इंदौर में सोमवार को अचानक हुई तेज बारिश के कारण खजराना मंदिर और तीन इमली चौराहे के पास जलभराव की स्थिति बनी, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। भोपाल में भी देर रात बारिश का दौर चला, हालांकि दिन में मौसम साफ रहा।
मौसमी सिस्टम: बारिश का कारण
- मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में बारिश का यह दौर निम्नलिखित मौसमी सिस्टमों के कारण है:
- साइक्लोनिक सर्कुलेशन: वर्तमान में मध्य प्रदेश के ऊपर एक सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम बना हुआ है, जो भारी बारिश का प्रमुख कारण है।
- मानसून ट्रफ लाइन: यह लाइन भी सक्रिय है, जो बारिश की तीव्रता को बढ़ा रही है।
- बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर क्षेत्र: 24 जुलाई से बंगाल की खाड़ी में एक नया लो प्रेशर क्षेत्र बनने की संभावना है, जो 23 और 24 जुलाई को मध्य प्रदेश में बारिश को और तीव्र करेगा।
- IMD भोपाल के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, "साइक्लोनिक सर्कुलेशन और मानसून ट्रफ लाइन की सक्रियता के कारण अगले चार दिनों तक मध्य प्रदेश में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश, विशेष रूप से जबलपुर, सागर, और रीवा संभाग, सबसे अधिक प्रभावित होंगे।"
चार दिन का मौसम पूर्वानुमान
- 22 जुलाई (मंगलवार): जबलपुर, मंडला, दिनदोरी, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, देवास, और सीहोर में भारी बारिश (4.5 इंच तक)। बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, और उज्जैन में हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना।
- 23-24 जुलाई: भारी बारिश का अलर्ट जारी रहेगा, खासकर पूर्वी मध्य प्रदेश (जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल) में। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया लो प्रेशर क्षेत्र बारिश को और तीव्र करेगा।
- 25 जुलाई: मालवा-निमाड़ क्षेत्र (इंदौर, उज्जैन, देवास) में भी बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है।
मध्य प्रदेश में मानसून की स्थिति
इस मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में अब तक 20.7 इंच (लगभग 526 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत 13.2 इंच (335 मिमी) से 57% अधिक है। यह अतिरिक्त बारिश पूर्वी मध्य प्रदेश (जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल) में विशेष रूप से देखी गई है, जबकि इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, बुरहानपुर, और आगर-मालवा जैसे जिले अभी भी 10 इंच से कम बारिश के साथ पीछे हैं।
जबलपुर, जो मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में सबसे अधिक बारिश प्राप्त करता है, जुलाई में औसतन 17 इंच (432 मिमी) बारिश दर्ज करता है। इसका ऐतिहासिक रिकॉर्ड जुलाई 1930 में 45 इंच और 30 जुलाई 1915 को एक दिन में 13.5 इंच बारिश का है। इस साल जुलाई में अब तक जबलपुर में 21.6 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से अधिक है।
प्रभाव और चुनौतियां
जलभराव: इंदौर में सोमवार की बारिश से खजराना मंदिर और तीन इमली चौराहे के पास जलभराव हुआ, जिससे यातायात बाधित हुआ। भोपाल में भी निचले इलाकों में जलभराव की शिकायतें आईं।
बाढ़ का खतरा: पूर्वी मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मंडला, नरसिंहपुर, और उमरिया में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। उमरिया में जोहिला बांध के दो गेट खोले गए हैं।
यातायात और सुरक्षा: सागर और नरसिंहपुर में नदियों और नालों के उफान पर होने से सड़कें और पुल बंद किए गए हैं। नरसिंहपुर में स्टेट हाईवे-22 पर एक पुलिया ढह गई, और शक्कर नदी को रस्सियों के सहारे पार करना पड़ा।
गांधी सागर बांध और बारिश का प्रभाव
मंदसौर और नीमच जिलों में चंबल नदी पर स्थित गांधी सागर बांध, जो हाल ही में नवीनीकरण के लिए मंजूरी प्राप्त परियोजना का हिस्सा है, भारी बारिश के कारण विशेष निगरानी में है। मंत्रि-परिषद ने इसके नवीनीकरण के लिए 464 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जो बांध की संरचनात्मक मजबूती और बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगा।
हालांकि, भारी बारिश के कारण बांध के जल स्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिसके लिए जल संसाधन विभाग सतर्कता बरत रहा है। बांध के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, और स्थानीय प्रशासन को निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की सलाह दी गई है।
सावधानियां और सलाह
- मौसम अपडेट्स: स्थानीय मौसम अपडेट्स और IMD की वेबसाइट (www.imd.gov.in) पर नजर रखें।
- जलभराव से बचाव: निचले इलाकों में रहने वाले लोग अपने घरों को जलरोधी बनाने और कीमती सामान को सुरक्षित रखें।
- यात्रा सावधानी: बारिश और जलभराव के कारण सड़कों पर सावधानी बरतें और प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा से बचें।
- आपातकालीन तैयारी: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन किट (खाना, पानी, दवाइयां, टॉर्च) तैयार रखें।












Click it and Unblock the Notifications