MP news: बिजली उपभोक्तओं को नए साल में लगेगा बढ़े हुए बिल का 'करंट'? कंपनियों ने नियामक आयोग को भेजा प्रस्ताव
MP news: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो गए है और नई सरकार की शपथ का वक्त भी आ गया हैं। इस अच्छी खबर के साथ नए साल में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बुरी खबर भी हैं। कंज्यूमर को नए साल में अपनीं जेब ज्यादा ढीली करना पड़ सकता हैं।
बिजली कंपनियों ने रेट बढ़ोत्तरी के लिए आयोग को जो प्रस्ताव भेजा है, उसमें कई तर्क दिए गए हैं। पिछले साल भी बिजली दरों में इजाफा किया गया था। बिजली कंपनी अपने वित्तीय ढाँचे को बैलेंस करने की जुगत में हैं। एफसीए की पॉलिसी पहले ही बनाई जा चुकी हैं।

अगले वित्तीय वर्ष में बिजली के रेट बढ़ाने की नौबत आने के पीछे कई वजहें है। साल 2023 में कलेक्शन एफसियेंसी 90 फीसदी से घट कर 60 प्रतिशत पर पहुंची है। प्रदेश सरकार से लगभग 13 हजार करोड़ लेना बाकी है। जिससे लिये ठोस कदम नहीं उठाए गये हैं। इस कूप्रबंधन का नतीजा यह हुआ है कि बिजली कंपनियों के आमदनी तथा खर्च के बीच का रेवेन्यू अंतर बढ़ गया, लिहाजा 3 से 5 प्रतिशत तक बिजली के रेट बढ़ाने की नौबत आयी है।
एमपी पावर मेनेजमेंट कंपनी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करने के पूर्व में विद्युत नियामक आयोग को इन जानकारियों को बिजली कंपिनयों से लेना जरूरी है। यह पत्र डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गन ने आयोग के अध्यक्ष को भेजा है। पत्र में बताया कि विद्युत नियामक आयोग ने निंरतर स्पष्ट निर्देश जारी किये हैं कि बिजली बिलों की राशियों की वसूली का प्रतिशत हमेशा 90 फीसद से ज्रूादा होना चाहिये। लेकिन आदेश की अनदेखी की गई। नतीजे में कलेक्शन एफीसिएंशी घट कर 60 प्रतिशत तक पहुंच गयी।












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