MP election 2023: 'जिस डील की वजह से सरकार गिरी थी..’, कमलनाथ उनसे कहते थे कि मौज करो, कुर्सी जाती है तो जाए
MP election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में 2018 में बनी कमलनाथ सरकार के गिरने का डील चैप्टर खुला हुआ था। लगभग हर चुनावी सभा में कमलनाथ खुद इसे जनता को सुना रहे हैं। बताने की कोशिश हो रही है कि कांग्रेस सौदागर नहीं हैं।
नर्मदापुरम के पिपरिया पहुंचे कमलनाथ चुनावी सभा में जमकर दहाड़े। उन्होंने बीजेपी को आड़े हाथों लिया। अपने 15 माह के कार्यकाल की उपलब्धियों का बखान किया और राज्य के भविष्य की बात करते हुए कांग्रेस के पक्ष में वोट देने की अपील की।
जनसभा में कमलनाथ ने कहा कि साल 2020 में करोड़ों रुपये की पेशकश की गई थी। लेकिन वह इस सौदेबाजी के चक्कर में नहीं फंसे। ने कहा कि मैं किसी के साथ डील नहीं करूंगा। कुर्सी जाती है तो जाए..."। कमलनाथ ने इशारों में कहा कि दौलत के चक्कर में कई लोगों ने अपना इमान बेच दिया।

MLA के कहते थे करोड़ों मिल रहे..
किसी की जिंदगी में पैसा क्या नहीं होता? लाख-पचास हजार नहीं जब करोड़ों की बात हो तो किसी का भी मन डील के लिए डोल जाए। कमलनाथ ने कहा कि "जब विधायक मुझसे कहते थे कि उन्हें करोड़ों मिल रहे हैं, तो मैं कहता था मौज करो, मैं किसी के साथ सौदा नहीं कर सकता।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सभी प्रस्तावों को ठुकरा दिया क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि मप्र की पहचान उस राज्य के रूप में हो जहां इस तरह के सौदे होते हैं।
इस तरह धराशाही हुई थी कमलनाथ सरकार
पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 230 में से 114 सीटें जीती थी। पूर्ण बहुमत से सिर्फ दो सीट कम थी। चुनाव जीतकर सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर मिला था। क्योकि बीजेपी कांग्रेस से 5 सीट कम यानि 109 सीट पर ही जीत हासिल हुई थी। करीब दो साल बाद एमपी की सियासत ने यूटर्न लिया और लोकसभा चुनाव हारकर बैठे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी का दामन थाम लिया। यही वो घड़ी थी, जहां से कमलनाथ सरकार की उल्टी गिनती शुरू हुई। फिर सिंधिया खेमे के 22 विधायकों ने भी पाला बदल लिया।












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