MP Election 2023: मध्य प्रदेश चुनाव में दो ही मुद्दे हावी, जो भुना पाया वही जीतेगा बाजी
Madhya Pradesh Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदान हो रहा है। राज्य में इस बार भी मुख्य मुकाबला सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच है।
यूं तो दोनों तरफ से प्रचार अभियान के दौरान कई मुद्दे उछाले गए हैं। लेकिन, आखिरकार मतदाता जिन चीजों को देखकर वोट करेंगे, ऐसे मुद्दे सीमित ही हैं।

कांग्रेस के लिए 'बदलाव' सबसे बड़ा मुद्दा
अगर हम कांग्रेस की ओर से देखें तो उसके पक्ष में सबसे बड़ा मुद्दा 'बदलाव' का है। जो वोटर कांग्रेस के लिए वोटिंग करेंगे, उनके मन में यही सबसे बड़ा मसला लग रहा है कि सरकार बदलनी है।
बीजेपी के लिए 'लाडली बहना' सबसे बड़ा हथियार
वहीं भारतीय जनता पार्टी की सरकार की वापसी के लिए वोटिंग का इरादा रखने वाले वोटरों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा लाडली बहना योजना हो सकती है। यानि यही दो मुद्दे हैं, जिसके आधार पर मुख्य तौर पर वोटिंग हो सकती है।
करीब दो दशकों की एंटी-इंकंबेंसी बीजेपी की मुश्किल
ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार करीब दो दशकों से सत्ता पर काबिज होने की वजह से बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती एंटी-इंकंबेंसी से निपटना है। यही वजह है कि कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया है, जिससे वह शिवराज सिंह चौहान के लंबे कार्यकाल की एंटी-इंकंबेंसी का फायदा उठा सके।
युवाओं के लिए रोजगार भी एक मुद्दा
मसलन, भोपाल के पास बरेली कस्बे के रहने वाले 23 साल के राहुल पटेल नाम के युवक का उदाहरण ले सकते हैं। वह एक ई-कॉमर्स कंपनी के लिए काम करते हैं। बी-टेक करने के बावजूद वह 10 हजार रुपए कमाते हैं। उन्हें लगता है कि बदलाव से उनकी कमाई बढ़ सकती है, 'बदलाव जरूरी है और कांग्रेस के अलावा ऑप्शन क्या है....।'
मुद्दों के आधार पर परिवार से वोटिंग की संभावना
इसके साथ ही पटेल एक और रोचक तथ्य भी सामने रखते हैं। वह बताते हैं कि उनकी लोधी जाति है और उनका परिवार कई बार से बीजेपी को वोट देता आ रहा है और इस बार भी ऐसा ही करने की संभावना है।
महिला वोटर बहुत बड़ी किरदार
दरअसल, मध्य प्रदेश की महिला वोटरों में लाडली बहना योजना को लेकर एक सकारात्मक माहौल नजर आ रहा है। इसके तहत राज्य सरकार योग्य लाभार्थियों के खाते में एक निश्चित रकम डालती है।
उदाहरण के तौर पर नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव का नाम लिया जा सकता है। यह एक आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है। यहां अनुसूचित जाति की कुछ महिलाएं पवित्र नर्मदा नदी की ओर जा रही थीं। उनके बीच लाडली बहना योजना को लेकर बातचीत चल रही थी कि, 'शिवराज डाल दियो पैसे हमारे अकाउंट में....'
तीन बच्चों की मां 38 साल की सरस्वती जहां इस योजना की सराहना करती है, वहीं बढ़ती महंगाई को लेकर खासकर दाल और खाने के तेल को लेकर भी उसकी चिंता जाहिर होती है।
ऐसे ही प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों में बढ़ने पर बीजेपी की ओर से की जा रही विकास, कल्याणकारी योजनाओं और राम मंदिर की बातों को बदलाव और पटवारी परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दों से चुनौती मिलती नजर आती है।
कई स्थानीय विश्लेषकों को लगता है कि सबकुछ इसपर निर्भर है कि भारतीय जनता पार्टी लाडली बहना योजना की लाभार्थी महिलाओं को किस हद तक एकजुट कर पाती है और बदलाव की आवाज से अपनी संगठनात्मक क्षमता के दम पर किस हद तक उबर पाती है।
मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों पर एक ही चरण में शुक्रवार को मतदान हो रहा है। वोटों की गिनती 3 दिसंबर को छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा के साथ ही होगी और उसी दिन सारे नतीजे आ जाने की भी संभावना है।












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