MP assembly election 2023: विधानसभा चुनाव ऐलान होते ही लागू हो गई आचार संहिता, जानिए किन बातों का रखे ख्याल?
MP assembly election 2023: भारत निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश समेत अन्य पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी हैं। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष नियम बनाए। जिसका पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य हैं। इन्ही नियमों को आचार संहिता का नाम दिया गया हैं।
लेकिन चुनाव के वक्त कई लोगों की जिज्ञासा रहती हैं कि आखिर आदर्श आचार संहिता में किन बातों का विशेष तौर पर ख्याल रखना जरुरी हैं। इसके अलावा वो कौन सी पावंदीयाँ है, जिनका उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती हैं।
चुनाव की घोषणा होते ही किसी भी राज्य में सरकार की शक्तियों पर ब्रेक लग जाता हैं। कोई भी जनप्रतिनिधि, मंत्री या सरकार के बड़े ओहदे पर आसीन राजनीतिक व्यक्ति सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जिससे किसी मतदाता का हित प्रभावित हो या फिर अपने फायदे के लिए उसे लुभाया जाए।

मध्य प्रदेश में चुनाव की घोषणा होने के साथ प्रशासनिक अफसरों की शक्ति बढ़ गई हैं। बिना अनुमति अब किसी भी जगह राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हो सकेंगे। संबंधित व्यक्ति को जिला निर्वाचन अधिकारी से अनुमति लेने के साथ आयोजित कार्यक्रम संबंधी समस्त जानकारी देनी होगी।
देश के पांच राज्यों में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने के पूरे आसार है। इन चुनावी राज्यों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, मिजोरम, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। दरअसल, आज दोपहर 12 बजे चुनाव आयोग एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी, जिसमें वह इन राज्यों के चुनावी तारीखों की घोषणा करेगी।
इन बातों का ध्यान रखना है जरुरी
- चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कई नियम भी लागू हो जाते हैं। इनकी अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं कर सकता।
- सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता को फायदा पहुंचाने वाले काम के लिए नहीं होगा।
- सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जाएगा।
- किसी भी तरह की सरकारी घोषणा, लोकार्पण और शिलान्यास आदि नहीं होगा।
- किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, राजनेता या समर्थकों को रैली करने से पहले पुलिस से अनुमति लेनी होगी।
- किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जाएंगे।
निर्वाचन के आयोजन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए सभी अधिकारियों/पदाधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती पर संपूर्ण प्रतिबंध होगा। यदि किसी अधिकारी का स्थानांतरण या तैनाती आवश्यक मानी जाती है तो आयोग की पूर्व-अनुमति ली जाएगी। इसका एकमात्र अपवाद तभी होगा जब कोई मंत्री संबंधित विभाग के प्रभारी होने के नाते या कोई मुख्यमंत्री कानून एवं व्यवस्था के असफल हो जाने या प्राकृतिक आपदा या किसी आपातकाल में ऐसे किसी निर्वाचन क्षेत्र का आधिकारिक दौरा करते हैं जिसमें अधीक्षण, मदद, राहत और इसी प्रकार के विशेष प्रयोजनार्थ ऐसे मंत्री/मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत उपस्थिति अपेक्षित होती है।












Click it and Unblock the Notifications