मोहन यादव क्यों बने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री? क्या ओबीसी वोटरों का रखा ध्यान या संघ की है मर्जी
Mohan Yadav MP New CM: मध्य प्रदेश में भाजपा को मिली बंपर जीत के बाद नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो चुका है। मोहन यादव को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुना गया है। सियासी जानकारों की मानें तो ओबीसी वोटर्स को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने यह फैसला लिया है।
दरअसल लोकसभा चुनाव 2024 को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ओबीसी कार्ड को मजबूत करने में जुटी हुई है। ऐसे में पहले से तय था कि भाजपा आदिवासी या ओबीसी समाज से किसी को मुख्यमंत्री बना सकती है। ऐसे में सियासी जानकारों की मानें तो पार्टी ने यह फैसला राज्य में ओबीसी वोटर्स को ध्यान में रखते हुए लिया है।

मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव ओबीसी समुदाय से आते हैं। राज्य में ओबीसी की कुल आबादी 50 फीसदी के आसपास है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी ने मोहन को मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ा दांव चला है। सियासी जानकारों का कहना है कि भगवा दल को इसका आगामी लोकसभा चुनाव में फायदा मिल सकता है।
मोहन यादव को एबीवीपी, आरएसएस और बीजेपी- तीनों जगह काम करने का लंबा अनुभव है। साल 2013 में मोहन यादव उज्जैन दक्षिण सीट से पहली बार विधायक बने। वो साल 2018 और इस चुनाव (2023) में भी विधायक बने। इस सीट से यादव ने हैट्रिक लगाई है। दिल्ली से पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के तीन पर्यवेक्षकों- मनोहर लाल खट्टर, के लक्ष्मण, आशा लाकड़ा ने विधायक दल के साथ बैठक की। बैठक में मोहन यादव को सर्वसम्मति से सीएम बनाया गया है वहीं राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। भाजपा ने नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा का स्पीकर बनाया है।
58 वर्षीय मोहन यादव शिवराज सिंह चौहान कैबिनेट में उच्च शिक्षा मंत्री थे। यादव ने राजनीतिक करियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। मोहन यादव आरएसएस के बेहद करीबी माने जाते हैं। मोहन यादव ने साल 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी। वो साल 1993 से 1995 के बीच आरएसएस उज्जैन शहर के खंड कार्यवाह का पद संभाले। वो राज्य के सबसे बड़े यादव में चेहरे में से एक है।












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