कांग्रेस के आरोपों पर भड़के सीएम मोहन यादव, बोले- मांफी मांगिए
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पार्टी नेता जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद कांग्रेस से माफ़ी मांगने की मांग की है। पटवारी ने दावा किया कि अधिकारी भाजपा सरकार को अनुकूल पोस्टिंग के लिए पैसे दे रहे हैं। कांग्रेस की "किसान न्याय यात्रा" की एक सार्वजनिक बैठक के दौरान पटवारी ने आरोप लगाया कि होशंगाबाद (नर्मदापुरम) के कलेक्टर ने अपना पद सुरक्षित करने के लिए पैसे दिए हैं।
पटवारी ने कहा, "मैं पत्रकारों से कहना चाहता हूं कि होशंगाबाद (नर्मदापुरम) के कलेक्टर का ईमानदारी से स्टिंग ऑपरेशन होना चाहिए। वह बताएंगे कि उन्होंने पद खरीदने में कितना पैसा खर्च किया। पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, पटवारी, एसडीएम और पुलिस थानों के प्रभारी, एक भी अधिकारी या कर्मचारी को थाना या पोस्टिंग (पैसे की पेशकश के बिना) नहीं मिलती है। यह भाजपा सरकार की हकीकत है।"

मुख्यमंत्री का जवाब
इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कांग्रेस नेताओं द्वारा नर्मदापुरम जिले में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा को अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का समर्थन करती है और कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की। यादव ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस 20 साल से अधिक समय से मध्य प्रदेश में सत्ता से बाहर है और 2019-20 में अपने संक्षिप्त शासन के दौरान भी विफल रही।
यादव ने राज्य के अधिकारियों का बचाव करते हुए कहा कि वे समर्पित और ईमानदार हैं। उन्होंने कहा, "कोई भी उनकी निष्ठा और सरकार की व्यवस्था पर सवाल नहीं उठा सकता। उन्हें लोगों की भलाई के लिए निडर होकर काम करना चाहिए।" उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों को बिना किसी डर के अपना काम जारी रखना चाहिए।
कांग्रेस का रुख
वरिष्ठ कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने पटवारी के बयान का समर्थन करते हुए हाल ही में एक घटना का हवाला दिया जिसमें एक अतिरिक्त कलेक्टर स्तर के अधिकारी को उनके कार्यालय में रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। मिश्रा ने तर्क दिया कि अधिकारी अपने पद को सुरक्षित रखने के लिए खर्च किए गए पैसे की वसूली के लिए रिश्वत ले सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के दावों को चुनौती देते हुए सुझाव दिया कि अगर यह सच है, तो राज्य सरकार को काम करवाने के लिए आवश्यक रिश्वत की दर सूची प्रकाशित करनी चाहिए।
आरोपों ने काफी विवाद पैदा कर दिया है, दोनों ही पार्टियां अपने-अपने रुख पर अड़ी हुई हैं। कांग्रेस जहां बीजेपी पर पोस्टिंग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाती है, वहीं बीजेपी अपने प्रशासन का बचाव करती है और कांग्रेस से उनके बयानों के लिए जवाबदेही की मांग करती है।
मध्य प्रदेश में राजनीतिक गतिशीलता के भीतर चल रही बहस गहरी जड़ें जमाए बैठी समस्याओं को उजागर करती है। चूंकि दोनों पक्ष इन गंभीर आरोपों को लेकर लगातार भिड़ रहे हैं, इसलिए सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और ईमानदारी के लिए यह महत्वपूर्ण बना हुआ है।
यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने और सरकारी नियुक्तियों में निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करने वाली पारदर्शी प्रणाली की जरूरत को रेखांकित करती है। इस राजनीतिक खींचतान के आगे के घटनाक्रमों का जनता को इंतजार है।












Click it and Unblock the Notifications