MP assembly election 2023: '5 साल पहले कांग्रेस ने सत्ता में वापसी कर किया था धमाका', 2 साल बाद फिर बदली सरकार

Madhya Pradesh Assembly Election EC: मध्य प्रदेश, वो राज्य जहां से देश की केन्द्रीय राजनीति का यूपी के बाद सीधा रास्ता मजबूत होता हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मिजोरम के साथ सत्ता-संग्राम के मुहाने पर खड़ा हो गया हैं। इन सभी राज्यों में पिछली बार एमपी की सियासत का चुनावी हिसाब-किताब अन्य राज्यों से जुदा रहा। 2023 के चुनाव के वक्त कुछ बातें जानना बेहद जरुरी हैं।

2018 विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश ने नई करवट ली थी। जब कांग्रेस ने बीजेपी की जमीन खिसकाई और सत्ता हासिल कर ली थी। 6 अक्टूबर को चुनाव का ऐलान हुआ और 28 नवंबर 2018 को वोट डाले गए थे। कुल 2,899 कैंडिडेट्स में कांग्रेस के 114 प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया तो दूसरे नंबर पर बीजेपी के 109 प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए थे। 7 सीटें ऐसी रही जहां बसपा- 2, सपा- 1, निर्दलीय- 4 प्रत्याशियों ने भी अपनी आमद दर्ज कराई थी।

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आंकड़ों पर गौर करें तो 3,78,54,811 मतदाताओं ने प्रत्याशियों और उनके दलों के भाग्य का फैसला किया था। ख़ास बात यह रही कि बीजेपी, ज्यादा वोट शेयर हासिल करने के बावजूद भी सत्ता से बाहर हो गई थी। भाजपा को 41% जबकि कांग्रेस को 40.9% वोट हासिल हुए थे। एक तरह से चुनाव प्रचार से लेकर परिणाम तक अलग ही तरह का मिजाज देखने को मिला था। देश के कई राज्यों में बुरे हालातों से गुजर रही कांग्रेस के लिए एमपी में कमलनाथ सरकार की ताजपोशी ने ऑक्सीजन देने का काम किया।

लेकिन करीब दो साल बाद 2020 में कांग्रेस की फर्स्ट लाइन के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के दल-बदल की आंधी का दौर आया। पहले तो अपने स्व.पिता माधवराव सिंधिया की 75वीं वर्षगाँठ पर सिंधिया कांग्रेस को अलविदा कह बीजेपी के हो गए। मध्य प्रदेश की सियासत में कांग्रेस के लिए यह बहुत बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित होने वाला हैं, इस बारे में दिग्गजों ने भी नहीं सोचा था। नतीजतन सिंधिया गुट के जिन 22 समर्थक विधायकों के दम पर कांग्रेस ने 114 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया था, वो 22 कांग्रेसी MLA लंबी उठापटक के साथ बीजेपी में सिंधिया के ही हो गए।

आलम यह हुआ कि कांग्रेस के हाथ से सत्ता फिसल गई और फिर बीजेपी की शिवराज सरकार बन गई। सबसे बड़ा बदलाव यह था कि एमपी के चुनावी इतिहास में सबसे ज्यादा वोटिंग 2018 में हुई थी। महला मतदाताओं ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग कर पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। वर्ष 2018 में कुल मतदान प्रतिशत 74.84 रहा था। इसमें पुरुष मतदान 75.84 प्रतिशत और महिला मतदान 74.01 प्रतिशत रहा था। अब 2023 मध्यप्रदेश विधानसभा की बात करें तो इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। इस बीच, राज्य में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया। इसमें करीब 17 लाख मतदाता बढ़े हैं। प्रदेश में सामान्य मतदाताओं की संख्या 5 करोड़ 60 लाख 60 हजार 925 हो गई है। इसमें पुरुष मतदाता 2 करोड़ 88 लाख 25 हजार 607 और महिला मतदाता 2 करोड़ 72 लाख 33 हजार 945 और थर्ड जेंडर 1373 हैं। प्रदेश में कुल 5 करोड़ 61 हजार 36 हजार 229 मतदाता दर्ज हैं।

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