MP News: वनपाल को न्यायालय ने सुनाई 4 साल की सजा, जप्त ट्रैक्टर छोड़ने के ऐवज में मांगी गई थी रिश्वत
एक बड़ी सजा का फैसला विशेष न्यायालय द्वारा सुनाया गया, जिसमें वन विभाग के एक भ्रष्ट कर्मचारी, वनपाल राधेश्याम श्रीवास्तव को रिश्वत लेने के आरोप में दोषी करार देते हुए उसे 04 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा और 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
यह मामला तब सामने आया था जब राधेश्याम श्रीवास्तव ने एक ट्रैक्टर की जप्ती को छुड़वाने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

घटना 11 दिसंबर 2019 की है, जब आवेदक उत्तम पटेल, जो खेती-बाड़ी का काम करते हैं, ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर से शिकायत की। उन्होंने बताया कि वह अपने खेत पर मकान निर्माण के लिए फर्सियां (इमारत की निर्माण सामग्री) खरीदी थी। इन फर्सियों को अपने ट्रैक्टर (नंबर एमपी 34 ए 2845) पर लोड करवा कर लेबर शंकर पटेल के पास रखवा दिया था। जब वह दूसरे दिन अपना ट्रैक्टर लेने गए, तो उन्होंने पाया कि ट्रैक्टर वहाँ नहीं था।
उत्तम पटेल ने इसकी रिपोर्ट थाना नोहटा में दर्ज करवाई, जहां उसे बताया गया कि उसका ट्रैक्टर वन विभाग के पास है। इसके बाद वह वन विभाग के सगौनी बीट ऑफिस गया, लेकिन वहाँ कोई अधिकारी मौजूद नहीं थे। 25 नवंबर 2019 को जब वह फिर से वन विभाग के कार्यालय गया, तो वह कार्यालय बंद था और कोई अधिकारी नहीं मिला।
उत्तम पटेल को बाद में वन विभाग से ट्रैक्टर की जप्ती का नोटिस प्राप्त हुआ, और उसने 10 दिसंबर 2019 को वनपाल राधेश्याम श्रीवास्तव से मुलाकात की। इस मुलाकात में आरोपी राधेश्याम श्रीवास्तव ने उसे ट्रैक्टर छोड़ने के बदले 10,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। उत्तम पटेल ने रिश्वत देने का इरादा नहीं किया और आरोपी को रंगे हाथ पकड़वाने का निर्णय लिया।
रिश्वत की मांग और ट्रैप
उत्तम पटेल ने लोकायुक्त को इस मामले की जानकारी दी और शिकायत की पुष्टि के बाद एक ट्रैप की योजना बनाई गई। आवेदक ने आरोपी के साथ रिश्वत की मांग पर बातचीत की, जिसे रिकार्ड किया गया। बातचीत में आरोपी ने 10,000 रुपये की रिश्वत लेने पर सहमति जताई, लेकिन जब आवेदक ने कहा कि वह पूरी राशि नहीं दे पाएगा, तो उसने 7,000 रुपये की राशि में समझौता किया।
रिश्वत के रूप में 7,000 रुपये लेकर आवेदक लोकायुक्त कार्यालय पहुंचा और ट्रैप के दौरान आरोपी वनपाल राधेश्याम श्रीवास्तव से 7,000 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई। लोकायुक्त की टीम ने मौके पर ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
जांच और न्यायालय का फैसला
इस मामले की जांच के दौरान, लोकायुक्त की टीम ने भौतिक, मौखिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए। आरोपी के खिलाफ इस मामले में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत सभी साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करते हुए आरोपी राधेश्याम श्रीवास्तव को दोषी ठहराया।
आज दिनांक 28 फरवरी 2025 को विशेष न्यायाधीश श्री संतोष कुमार गुप्ता ने आरोपी वनपाल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधन-2018) की धारा 13(1)(बी) और धारा 13(2) के तहत दोषी पाते हुए उसे 04 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये का अर्थदंड लगाया।
अभियोजन की ओर से पैरवी
इस मामले में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्री अनंत सिंह ठाकुर ने पैरवी की। इसके अलावा श्री विनय नामदेव ने भी आवश्यक सहयोग प्रदान किया।
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