Bhopal News: हिंदू छात्राओं से रेप के आरोपियों की वकीलों ने की पिटाई, भगवा गमछा देख भड़का गुस्सा

Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हिंदू कॉलेज छात्राओं से रेप और ब्लैकमेलिंग के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सोमवार को बागसेवनिया थाना क्षेत्र के इस सनसनीखेज मामले में तीन मुख्य आरोपियों-फरहान खान, अली खान, और साहिल खान-को कोर्ट में पेश किया गया, जहां वकीलों ने कोर्ट परिसर में ही उनकी जमकर पिटाई कर दी।

आरोपियों को भगवा रंग का गमछा पहनाकर कोर्ट लाया गया था, जिसे देखकर वकील भड़क उठे। इस घटना ने कोर्ट परिसर को रणक्षेत्र में बदल दिया, और पुलिस को हालात काबू करने के लिए भारी बल तैनात करना पड़ा। उधर, इस मामले में चौथी पीड़िता भी सामने आई है, जिसकी शिकायत पर बागसेवनिया पुलिस ने नई FIR दर्ज की है। यह मामला अब न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और सांप्रदायिक रूप से भी संवेदनशील हो चला है।

Lawyers beat up the accused of love jihad anger flared up after seeing the saffron scarf

कोर्ट में पेशी, भगवा गमछे ने भड़काया तनाव

सोमवार शाम करीब 4 बजे भोपाल की जिला अदालत में पुलिस ने तीनों आरोपियों-फरहान खान, अली खान, और साहिल खान-को जज आरती आर्य की कोर्ट में पेश किया। ये आरोपी बागसेवनिया के उस कथित लव जिहाद मामले से जुड़े हैं, जिसमें हिंदू कॉलेज छात्राओं को दोस्ती के जाल में फंसाकर रेप, ब्लैकमेलिंग, और जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप हैं। पुलिस ने आरोपियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट लाया था, लेकिन उनके गले में भगवा गमछे देखकर वकील आक्रोशित हो गए।

वकीलों का कहना था कि भगवा रंग हिंदू संस्कृति का प्रतीक है, और इसे पहनकर कोर्ट में आना "हिंदू भावनाओं का अपमान" है। जैसे ही आरोपी कोर्ट रूम में पहुंचे, वहां मौजूद वकीलों ने हंगामा शुरू कर दिया। "लव जिहादियों को फांसी दो" और "हिंदू बेटियों को इंसाफ दो" जैसे नारे गूंजने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कोर्ट परिसर के अंदर और बाहर अतिरिक्त बल तैनात किया।

तीन घंटे कोर्ट में फंसे रहे आरोपी, फिर हुई पिटाई

हंगामे के बीच जज आरती आर्य ने आरोपियों को कोर्ट रूम में ही रखने का आदेश दिया। करीब तीन घंटे तक, यानी शाम 7:30 बजे तक, आरोपी कोर्ट रूम में रहे। सूत्रों के मुताबिक, जज आरती आर्य शाम 6 बजे कोर्ट रूम से रवाना हो गईं, लेकिन वकीलों का गुस्सा कम नहीं हुआ। जब पुलिस ने कड़े पहरे में आरोपियों को कोर्ट रूम से बाहर निकालने की कोशिश की, तो आक्रोशित वकीलों ने फरहान खान और अली खान पर हमला बोल दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वकीलों ने दोनों आरोपियों को घूंसे और लातों से पीटा, जबकि साहिल खान को पुलिस ने तुरंत वैन में ले जाकर बचाया। इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही, और कुछ देर के लिए स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई। एक वकील, जो नाम न छापने की शर्त पर बोले, ने कहा, "ये लोग हमारी बेटियों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। भगवा गमछा पहनकर कोर्ट में आने की हिम्मत कैसे हुई? हमारी भावनाएं आहत हुई हैं।"

पुलिस ने अंततः स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपियों को रिमांड पर भेज दिया। DCP (जोन-1) प्रियंका शुक्ला ने कहा, "कोर्ट परिसर में हुई घटना की जांच की जा रही है। हमने हालात को काबू में कर लिया है, और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।"

Bhopal News: चौथी पीड़िता का खुलासा, मामले में नया मोड़

इस बीच, सोमवार को इस मामले में चौथी पीड़िता सामने आई, जिसने बागसेवनिया पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि उसे भी दोस्ती के बहाने जाल में फंसाया गया, नशीले पदार्थ देकर उसका शोषण किया गया, और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने चौथी FIR दर्ज की है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, चौथी पीड़िता सामाजिक डर और बदनामी के कारण पहले शिकायत करने से हिचक रही थी, लेकिन अन्य पीड़िताओं के सामने आने के बाद उसने हिम्मत दिखाई। बागसेवनिया थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह ने कहा, "हम सभी पीड़िताओं की शिकायतों को गंभीरता से ले रहे हैं। जांच में और भी खुलासे होने की संभावना है।"

मामला क्या है? भोपाल का सनसनीखेज रेप और ब्लैकमेलिंग रैकेट

यह मामला भोपाल के एक निजी कॉलेज से जुड़ा है, जहां कुछ छात्रों और पूर्व छात्रों ने मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया था। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने हिंदू छात्राओं को टारगेट किया, उनसे दोस्ती की, और फिर नशीले पदार्थ देकर उनके साथ रेप किया। आरोपियों ने इन घटनाओं के वीडियो बनाए और पीड़िताओं को ब्लैकमेल कर अपनी सहेलियों को भी इस जाल में फंसाने के लिए मजबूर किया। इस मामले की तुलना 1992 के अजमेर रेप कांड से की जा रही है।

अब तक तीन आरोपी-फरहान खान, अली खान, और साहिल खान-गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि दो अन्य आरोपी, जो पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं, फरार हैं। पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) गठन किया है, जो इस रैकेट के पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश कर रहा है। फरहान के मोबाइल से मिले वीडियो और चैट्स की फॉरेंसिक जांच भी जारी है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है।

Bhopal News: वकीलों की पिटाई, सही या गलत?

कोर्ट परिसर में वकीलों द्वारा आरोपियों की पिटाई ने कई सवाल खड़े किए हैं। कुछ लोग इसे "जनता का गुस्सा" बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे कानून व्यवस्था की विफलता मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो वायरल हो गए हैं, एक यूजर ने लिखा, "वकीलों ने सही किया। जब कानून इन राक्षसों को सजा नहीं देता, तो जनता को सामने आना पड़ता है।" वहीं, एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया, "कोर्ट में पिटाई करना कहां का कानून है? क्या हम जंगलराज की ओर बढ़ रहे हैं?"

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्ट परिसर में हिंसा न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह न्याय प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती है। वरिष्ठ वकील अजय गुप्ता ने कहा, "वकीलों का गुस्सा समझा जा सकता है, लेकिन हिंसा का कोई औचित्य नहीं। कोर्ट में न्याय होना चाहिए, न कि सड़क पर।" उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाएं आरोपियों को अदालत में सहानुभूति का आधार दे सकती हैं।

इस बीच, हिंदूवादी संगठनों ने इस मामले को लेकर सड़कों पर उतरने की धमकी दी है। संस्कृति बचाओ मंच के एक नेता ने कहा, "हम कोर्ट और पुलिस की कार्रवाई पर नजर रखे हुए हैं। अगर पीड़िताओं को जल्द न्याय नहीं मिला, तो भोपाल में बड़ा आंदोलन होगा।"

प्रशासन की चुनौती: न्याय और शांति का संतुलन

यह घटना भोपाल पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। एक तरफ, उन्हें पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए तेजी से जांच करनी है, वहीं दूसरी तरफ, कोर्ट परिसर जैसी जगहों पर हिंसा को रोकना भी जरूरी है। गृह मंत्री विश्वास सारंग ने इस मामले को "गंभीर" बताते हुए कहा, "दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। लेकिन कानून को अपने हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है।"

पुलिस ने कोर्ट परिसर में पिटाई की घटना की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ वकीलों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) (हमला) और 351(3) (उपद्रव) के तहत कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, पुलिस इस मामले में सावधानी बरत रही है, क्योंकि वकील समुदाय का गुस्सा और बढ़ सकता है।

पीड़िताओं का दर्द, सामाजिक डर और न्याय की राह

इस मामले में अब तक चार पीड़िताएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन पुलिस का मानना है कि और भी लड़कियां इस रैकेट का शिकार हो सकती हैं। कई पीड़िताएं सामाजिक डर और बदनामी के कारण सामने आने से हिचक रही हैं। एक पीड़िता ने पुलिस को बताया, "मुझे धमकी दी गई थी कि अगर मैंने मुंह खोला, तो मेरे वीडियो मेरे परिवार को भेज दिए जाएंगे। मैंने अपनी सहेली को भी उनके जाल में फंसने से बचाने की कोशिश की, लेकिन वे बहुत शातिर थे।"

पुलिस ने पीड़िताओं के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था की है और उनकी पहचान को गोपनीय रखने का वादा किया है। सामाजिक कार्यकर्ता रीना वर्मा ने कहा, "इन लड़कियों को न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और मानसिक समर्थन की जरूरत है। समाज को चाहिए कि वह पीड़िताओं को दोषी ठहराने की बजाय उनके साथ खड़ा हो।"

भोपाल में तनाव: क्या है आगे की राह?

यह मामला भोपाल में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकता है, खासकर तब जब इसे "लव जिहाद" का रंग दिया जा रहा है। कोर्ट परिसर में हुई हिंसा ने यह भी दिखाया कि लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है, और वे कानून के बजाय त्वरित "न्याय" चाहते हैं। लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या भीड़ द्वारा की गई हिंसा से वाकई न्याय मिलेगा, या यह समाज को और बांट देगा?

प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है-पहली, इस रैकेट के पूरे नेटवर्क को उजागर कर पीड़िताओं को न्याय दिलाना, और दूसरी, शहर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना। पुलिस ने फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पश्चिम बंगाल में टीमें भेजी हैं, और उम्मीद है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां होंगी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+