MP News: लाड़ली बहना योजना की 23वीं किस्त इस दिन होगी ट्रांसफर, CM मोहन यादव मंडला से करेंगे राशि का वितरण
MP News Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना एक बार फिर से राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गई है। इस बार मुद्दा है योजना की 23वीं किस्त के भुगतान में हुई देरी, जिसने एक ओर लाखों लाभार्थी महिलाओं को चिंता में डाल दिया है, तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच सियासी घमासान को और तेज कर दिया है।
हर महीने की तरह इस बार भी महिलाओं को उम्मीद थी कि 10 अप्रैल को या उसके आसपास उनके खातों में योजना की राशि - 1,250 रुपये प्रति माह - पहुंच जाएगी। लेकिन इस बार यह नहीं हुआ। नतीजा: सवाल, गुस्सा, बयानबाज़ी और अब सरकार की तरफ से आश्वासन।

16 अप्रैल को आएगी राशि, मंडला से सीएम करेंगे ट्रांसफर
सरकारी सूत्रों और महिला एवं बाल विकास विभाग की पुष्टि के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 16 अप्रैल 2025 को मंडला जिले के टिकरवारा गांव से योजना की 23वीं किस्त का औपचारिक रूप से ट्रांसफर करेंगे। इस दिन सभी पात्र लाभार्थी महिलाओं के खातों में राशि भेजी जाएगी।
मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में शिरकत करेंगे, जहां 1,100 बेटियों की शादी करवाई जाएगी। इसी मंच से मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की राशि का बटन दबाकर ऑनलाइन वितरण करेंगे। इसके साथ ही कुछ विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया जाएगा।
कांग्रेस का हमला, वादाखिलाफी और अनदेखी के आरोप
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने योजना की किस्त में हुई देरी को लेकर बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर तीखा हमला बोला:
"पहले पोस्टर लगते थे - 'लाड़ली बहनों, 10 तारीख आ रही है!' अब 10 तारीख निकल गई, पर बहनों के खाते खाली हैं। क्या सरकार का खजाना खाली है या नीयत बदल गई?"
पटवारी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने राशि को 3,000 रुपये तक बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन सरकार ने विधानसभा में साफ कर दिया कि यह बढ़ोतरी नहीं होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार चुपचाप बड़ी संख्या में महिलाओं को योजना से बाहर कर रही है, जिनमें से कई के नाम मृत्यु या आयुसीमा के आधार पर पोर्टल से हटा दिए गए हैं।
पटवारी की चार प्रमुख मांगें:
- न्यूनतम आयु सीमा को 21 से घटाकर 18 वर्ष किया जाए।
- अधिकतम आयु सीमा को 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष किया जाए।
- राशि को तुरंत 3,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए।
- नई पात्र महिलाओं को जोड़ा जाए, जिनके नाम अब तक शामिल नहीं हुए हैं।
सरकार की सफाई, कोई किश्त नहीं रुकेगी
कांग्रेस के हमलों के बीच महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा: "लाड़ली बहना योजना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। तकनीकी कारणों से थोड़ी देरी हुई है, लेकिन कोई भी किश्त रोकी नहीं गई है। 16 अप्रैल को सभी महिलाओं के खाते में राशि पहुंचा दी जाएगी।" सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि देरी के पीछे प्रक्रियागत और तकनीकी अपडेट्स हैं, जिन्हें जल्द ही सुधार लिया गया है।
लाभार्थियों की बेचैनी और प्रतिक्रिया
योजना पर लाखों महिलाओं की आर्थिक निर्भरता है। इस महीने जब तय तारीख तक पैसा नहीं आया तो महिलाओं में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया।
जबलपुर की रीना बाई, जो घरेलू सहायिका हैं, ने कहा: "हर महीने बच्चों की फीस, राशन और घर का खर्च इसी पैसे से चलता है। 10 तारीख निकल गई और अब तक पैसा नहीं आया। परेशान हूं कि इस बार क्या होगा?"
इसी तरह ग्वालियर, रीवा, बैतूल, उज्जैन जैसे जिलों से भी महिलाएं सोशल मीडिया के ज़रिए सरकार से सवाल पूछ रही हैं और तत्काल भुगतान की मांग कर रही हैं।
बीजेपी का पलटवार, विपक्ष कर रहा है राजनीतिकरण
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक ड्रामा करार देते हुए कहा कि यह योजना सरकार की जनहित में बड़ी उपलब्धि है। एक प्रवक्ता ने कहा "हर महीने समय पर राशि ट्रांसफर की गई है। यह पहली बार है जब थोड़ी देरी हुई है, वो भी तकनीकी कारणों से। कांग्रेस इस मुद्दे को बेवजह उछालकर महिलाओं की भावनाओं से खेल रही है।"
मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी कह चुके हैं कि योजना की राशि को भविष्य में बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए वित्तीय स्थिति और व्यापक समीक्षा की जरूरत है।
लाड़ली बहना योजना: एक नजर में
- शुरुआत: 28 जनवरी 2023 (शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में)
- लाभ: हर माह ₹1,250 (प्रारंभ में ₹1,000)
- पात्रता: 21-60 वर्ष की विवाहित महिलाएं, पारिवारिक आय ₹2.5 लाख से कम
- लाभार्थी संख्या: लगभग 1.26 करोड़
- वर्तमान मुद्दा: 23वीं किस्त की देरी
- नई तारीख: 16 अप्रैल 2025
सियासत गरम, निगाहें 16 अप्रैल पर
लाड़ली बहना योजना की किस्त में हुई देरी से एक बात साफ है कि जनकल्याण योजनाएं अब केवल प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक भी हैं। कांग्रेस इसे 'भ्रष्ट वादा' कह रही है, वहीं बीजेपी इसे 'छोटा व्यवधान, बड़ी योजना' कह रही है।
अब सबकी निगाहें 16 अप्रैल पर टिकी हैं, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं राशि ट्रांसफर करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस कदम से सरकार लाभार्थियों की नाराजगी को शांत कर पाती है, या विपक्ष इसे अगला बड़ा चुनावी मुद्दा बना देता है।












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