MP Election 2023: राज्य लोक सेवा की परीक्षा पास करने वाले प्रहलाद पटेल ने जनसेवा के लिए छोड़ दिया था DSP का पद

Prahlad Patel News: पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने जन सेवा करने के लिए राज्य प्रशासनिक पद का छोड़ दिया था। इसके अलावा पटेल की कबड्डी वालीबाल और एथलेटिक्स में भी गहरी रुचि है। 1980 का दौर था जब पटेल जबलपुर के गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में थे और छात्र संघ के अध्यक्ष बने। बता दे प्रहलाद पटेल को इस भाजपा ने नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया हैं। मुख्यमंत्री पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।

राज्य प्रशासनिक सेवा में हुआ था चयन

वकालत की पढ़ाई करने के बाद प्रहलाद पटेल प्रशासनिक सेवा की तैयारी में लगे हुए थे और इस बीच उनका राज्य प्रशासनिक सेवा में चयन भी हो गया था। जिसमें उन्हें डीएसपी का पद मिल रहा था लेकिन प्रहलाद सिंह पटेल ने कार्यपालिका में सेवा देने की अपेक्षा व्यवस्थापिका के माध्यम से सेवा करने का मार्ग चुना।

Know how Prahlad Patel, BJP candidate from Narsinghpur Assembly, became a leader and minister.

प्रहलाद पटेल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की न्यायिक समिति के सदस्य रहे। पांच बार के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री पटेल को उनके गिरे जिले नरसिंहपुर से विधानसभा चुनाव के लिए इस बार बीजेपी ने चुनावी मैदान में उतारा है। यह पहली बार है जब वे अपने गृह नगर से चुनाव लड़ रहे है। 28 जून 1960 को नरसिंहपुर के गोटेगांव में प्रहलाद सिंह पटेल का जन्म हुआ। वे पिछड़ा वर्ग की लोधी जाति का प्रतिनिधित्व करते है और दमोह से सांसद है।

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प्रहलाद पटेल का राजनीतिक सफर

पहली बार 1989 में नौवीं लोकसभा के लिए पहलाद पटेल सिवनी से चुने गए। इसके बाद 1996 में 11वीं लोकसभा में उनका दूसरा कार्यकाल और फिर 1999 में बालाघाट से 13वीं लोकसभा में तीसरा कार्यकाल पूरा किया। चौथे कार्यकाल 2014 में 16वीं लोकसभा और 2019 में पांचवें कार्यकाल के तहत उन्हें दमोह से 17वीं लोकसभा के लिए चुनाव मैदान में उतारा गया और जनता ने उन्हें चुनाव जीता कर लोकसभा भेजा।प्रहलाद पटेल असंगठित मजदूर संघ के अध्यक्ष और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी है। छात्र संघ के अध्यक्ष बनने के बाद वे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे।

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छोटे भाई जालम सिंह पटेल के लिए कही थी बड़ी बात

प्रहलाद सिंह पटेल जितने राजनीति में सक्रिय उतने ही गंभीर परिजनों के प्रति भी दिखाई देते हैं कुछ दिन पहले उन्होंने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा था कि भले ही नरसिंहपुर से मुझे पार्टी ने टिकट दिया है लेकिन जी तो छोटे भाई जालम सिंह पटेल की ही होगी। बता दे भाजपा ने इस सीट से विधायक जालम सिंह पटेल का टिकट काटकर प्रहलाद सिंह पटेल को टिकट दिया है। पटेल दूसरी विधानसभा सीटों पर जाकर भी भाजपा की प्रत्याशियों के लिए प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। दरअसल, बुंदेलखंड क्षेत्र में पटेल का अच्छा खासा प्रभाव है।

उमा भारती के लिए हो गए थे बागी

प्रहलाद सिंह पटेल को अटल सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री (कोयला मंत्रालय) की जिम्मेदारी सौंप गई थी। इसके बाद 2004 में उन्हें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ छिंदवाड़ा से मैदान में उतर गया लेकिन इस बार उन्हें हर का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्हें प्रदेश में कई उतार चढ़ाव देखने को मिले। लेकिन 2005 ने जब उमा भारती भाजपा छोड़कर जनशक्ति पार्टी बनाई तो पटेल भी उनके साथ चले गए। लेकिन मार्च 2009 में उन्होंने भाजपा में घर वापसी कर ली। उन्हें कई और जिम्मेदारियां दी गई। उन्हें भारतीय जनता मजदूर महासंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारतीय जनता मजदूर मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। 2019 में उन्हें फिर जिम्मेदारी मिली और दामों से सांसद बने इसके बाद उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया।

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