उज्जैन: राजा सागर के खैजरा में विराजे, महाकाल का सजा दिव्य और भव्य दरबार
सागर, 20 जुलाई। उज्जैन के राजाधिराज को सागर के खैजरा की धरा इतनी भायी कि वे यहीं विराजमान हो गए। यहां के नवनिर्मित महाकाल मंदिर में बाबा महाकाल ने दिव्य और भव्य दरबार सजाया है, जहां वे भक्तों और श्रद्धालुओं को दर्शन देकर कृतार्थ कर रहे हैं। सबसे खास बात एक बार दर्शन करने पर आप भी चौंक जाएंगे, यहां महाकाल बिलकुल उज्जैन के स्वरुप में विराजमान है।

उज्जैन में जैसा महाकाल मंदिर, वैसा ही सागर में धाम बनाया
उज्जैन के महाकाल की प्रतिकृति सागर में बन कर तैयार है। सागर से 25 किमी दूर मालथौन रोड पर खैजरा गांव में महाकाल धाम बनाया गया है। इसमें काफी कुछ वैसा ही है जैसा महाकाल मंदिर उज्जैन में है। शिवलिंग, प्रवेश-निकास सब कुछ दिशा और डिजाइन व वास्तुशास्त्र में महाकाल मंदिर जैसे ही तैयार किया गया है।

महाकाल मंदिर सिर्फ 108 पुष्य नक्षत्र में बनाया गया
खैजरा धाम में निर्मित मंदिर की सबसे खास बात यह भी है कि इसका निर्माण कार्य सिर्फ पुष्य नक्षत्र के दिन ही किया गया है। यानी माह में सिर्फ एक दिन ही निर्माण हुआ। जय महाकाल सेवा समिति खैजरा दरबार के संयोजक पंडित महेश तिवारी ने बताया वर्ष 2015 में पुष्य नक्षत्र से लेकर अब तक बिलकुल ऐसा ही चला। इस दौरान कुल 108 पुष्य नक्षत्र में हुए कार्य से ही मंदिर की संरचना से लेकर, महाकाल की मूर्ति, प्रवेश स्थल से लेकर काफी कुछ उज्जैन की तरह हूबहू काम जनसहयोग से किया गया है।

मंदिर के शिखर की ऊंचाई 52 फीट
मंदिर कमेटी जय महाकाल के सेवा समिति खैजरा दरबार के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ठाकुर के अनुसार हजारों लोगों ने मंदिर निर्माण के लिए श्रमदान किया। मंदिर के शिखर की ऊंचाई 52 फीट है। भविष्य में मंदिर के विस्तार के साथ ही शिखर 96 फीट तक होगा। महाकाल की वैदिक मंत्रों से प्रतिष्ठा की गई है।

मंदिर की संरचना प्रतिमा, प्रवेशद्वार, गर्भ गृह सब उज्जैन जैसा
महाकाल मंदिर के संयोजक पंडित महेश तिवारी गुरूजी ने बताया मंदिर निर्माण पुष्य नक्षत्र में संपन्न हुआ है, कुल 108 पुष्य नक्षत्र में मंदिर का कार्य संपन्न हुआ, मंदिर की सरंचना से लेकर महाकाल की मूर्ति, प्रवेश द्वार काफी कुछ उज्जैन कि तरह है। बाबा महाकाल के दर्शन मात्र से लोगों के चार प्रकार के दोष दैहिक ,दैविक, तापिक और भौतिक का निवारण होता है।

जो उज्जैन नहीं जा पाते वे यहां दर्शन पाकर निहाल हुए
सावन माह में भगवान बाबा महाकाल की विशेष पूजा अर्चना होती है। यह माह भगवान भोले भंडारी को बहुत प्रिय है। भगवान शिव कि पूजा आराधना और हर तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए सावन का महीना बहुत ही शुभ और खास मना जाता है। जो भक्त उज्जैन नहीं जा पते हैं वो महाकाल धाम खेजरा दरबार में दर्शन करके बहुत ही ज्यादा प्रसन्न होते हैं।
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