'मुंह में पानी जा रहा था...', इंदौर हादसे में बची जुड़वां बहनों ने सुनाई आपबीती, मां की हो गई मौत

Indore Temple Tragedy: मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर हादसे में अब तक 36 लोगों की मौत हो चुकी है।

Indore Temple Tragedy

Indore Temple Tragedy: मध्य प्रदेश के इंदौर में बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में हुए हादसे में अब तक 36 लोगों की मौत हो गई है। रामनवमी के दिन बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर की बावड़ी धंसने से हादसा हुआ है। इस हादसे में 18 लोग अस्पताल में एडमिट हैं। इंदौर मंदिर के बावड़ी ढहने की घटना के पीड़ितों में दो जुड़वां बहनें भी शामिल है। इन दोनों बच्ची की मां की हादसे में मौत हो गई है।

बावड़ी हादसे में इन मासूम जुड़वां बहनों की दुनिया उजड़ गई है लेकिन इन मासूमों को इस दुख की गंभीरता का एहसास नहीं है। अब इन दोनों बहनों का वीडियो ट्विटर पर वायरल हो रहा है। जिसमें ये अपनी आपबीती बता रही हैं।

Indore Temple Tragedy

वायरल हो रहे है वीडियो में पत्रकार बच्ची से पूछता है, वहां कितने देर रहे बेटा पानी में...? बच्ची कहती है, ''वहां पर मेरे मुंह में थोड़ा-थोड़ा पानी जा रहा था। तो मैंने मुंह से पानी को निकाल लिया। फूंक मार कर। मेरी मम्मी उस वक्त पानी में थी।''

एक अन्य वीडियो में दोनों बच्ची हॉस्पिटल के बेड पर लेटी हुई है और कहती है, ''पानी में गिर गए थे। शिव के मंदिर गए थे।'' इसके बाद दोनों बच्चियां मोबाइल देखने लगती हैं। सोशल मीडिया पर इन बच्चियों की वीडियो शेयर करते हुए कई लोगों ने भावुक करने वाले मैसेज लिखे हैं।

Indore Temple Tragedy

वहीं घटना के पीड़ितों में से एक एजेंसी एएनआई से बात करते हुए ललित कुमार सेठिया ने कहा, 'हम बावड़ी पर खड़े थे, जब बावड़ी गिरी। महिलाओं और बच्चों सहित लगभग 40-50 लोग थे। हम हवन कर रहे थे, बहुत भीड़ थी। अंतिम आहुति चल रही थी जब कुआं धंस गया। बावड़ी का पता ही नहीं था। बहुत से लोग गिरे, जिसमें बच्चे और महिलाएं ज्यादा थीं।''

ललित कुमार सेठिया ने कहा, 'हर कोई मदद के लिए चिल्ला रहा था। नीचे का पानी इतना मैला था, जिससे सांस लेना भी असंभव हो गया था...तबाही मच गई थी"।

ललित कुमार सेठिया ने कहा, 'मुझे एक स्थानीय ने रस्सी के सहारे बाहर निकाला था। मैं वह पहला व्यक्ति था, जिसको बचाया गया था।'

ललित सेठिया के दाहिने हाथ में फ्रैक्चर हुआ है और उन्हें मामूली चोटें आई हैं।

मंदिर हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान में मदद करने वाला एक स्थानीय निवासी ने कहा, ''बावड़ी में लगभग 40-50 लोग गिर गए थे। हमने घरेलू रस्सियों, साड़ियों आदि के माध्यम से लोगों को बाहर निकाला। आपदा प्रबंधन की टीमें भी मौजूद थीं।''

मंदिर के प्रधान पुजारी ने क्या कहा?

अब सवाल उठ रहे हैं कि प्रशासन ने एक प्राचीन कुएं के ऊपर स्लैब बनाने की इजाजत कैसे दे दी। मंदिर के प्रधान पुजारी लक्ष्मीनारायण शर्मा ने कहा कि बिना किसी ठोस सहारे के पत्थर की पटिया लगाकर छत का निर्माण किया गया था और लोहे की छड़ें लगाकर कंक्रीट का निर्माण किया गया था।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। 2 लाख की अनुग्रह राशि प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से दी जाएगी।

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