इस अनूठी पहल से फिर जीवित होंगे पितर

इंदौर। अपने पूर्वजों को याद करने का पर्व है पितृपक्ष। इस पर्व पर हिंदू समाज के लोग अपने-अपने तरीके से धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य कर अपने पितरों की आत्मा की शांति की कामना करते हैं। लेकिन इंदौर में एक ऐसी अनूठी पहल की जा रही है, जिससे पितर फिर जीवित हो उठेंगे। बस फर्क इतना होगा कि इस बार मनुष्‍य के रूप में नहीं, बल्कि पौधे के रूप में। इंदौर का सूर्योदय आश्रम पितरों की याद में पौधरोपण का अभियान चला रहा है। यह संस्थान बीते तीन वर्षो से पूर्वजों की याद में पौधरोपण कर उनके रख-रखाव की भी जिम्मेदारी निभाता आ रहा है।

सनातन धर्म की परंपरा के मुताबिक वर्ष में एक बार पितृपक्ष आता है। यह पर्व 15 दिन का होता है, जिसमें पूर्वजों को याद किया जाता है। मान्यता है कि पितर अर्थात पूर्वज भौतिक तौर पर हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनका अस्तित्व किसी न किसी रूप में हमारे आस-पास रहता है, अर्थात आत्मा अमर है। पितृपक्ष में पितरों का स्मरण कर पिंडदान से लेकर अन्नदान, वस्त्रदान कर कष्टों से मुक्ति की कामना की जाती है।

Pind daan

इस 15 दिन के पर्व के दौरान इंदौर में सूर्योदय आश्रम पूर्वजों की याद को चिरस्थाई बनाए रखने के लिए पौधरोपण का अभियान चलाता है। आश्रम की ओर से आम लोगों को पूर्वजों की याद में पौधरोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इतना ही नहीं जो लोग ऐसा नहीं कर पाते हैं, उनके पूर्वजों के नाम पर आश्रम की ओर से पौधे रोपे जाते हैं।

आध्यात्मिक संत भय्यूजी महाराज का मानना है कि आज दुनिया ग्लोबल वार्मिग के दौर से गुजर रही है। वहीं वृक्षों की कटाई से पर्यावरण का संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। वर्षा आदि पर भी असर पड़ रहा है। इस स्थिति में पौधरोपण कर पर्यावरण को बचाया जा सकता है। इसके लिए उनका आश्रम तीन वर्षो से पितृपक्ष के मौके पर पौधरोपण का अभियान चलाता आ रहा है। इस अभियान के तहत महाराष्ट्र के खामगांव व तुलजापुर में पौधे रोपे जाते हैं। अब तक पितरों की याद में 9,000 पौधे रोपे जा चुके हैं।

आश्रम के अनिल परदेसी बताते हैं कि इस योजना के मुताबिक संबंधित व्यक्ति द्वारा अपने पूर्वज का नाम, पता और निधन की तारीख का ब्योरा दिए जाने पर पूरे 15 दिन तर्पण किया जाता है और आश्रम की ओर से उनके नाम पर एक पौधा रोप दिया जाता है। इस वृक्ष पर उस व्यक्ति के ब्योरे वाली तख्ती लगाई जाती है। यह वृक्ष देववृक्ष (पीपल, बरगद व ओदंबर आदि) होता है। रोपे गए पौधे की तस्वीर संबंधित परिजनों को भेजी जाती है, ताकि वह कभी मौके पर जाकर उस वृक्ष को देख भी सकें।

एक तरफ जहां आश्रम की ओर से पौधरोपण किया जाता है, वहीं इंदौर स्थित आश्रम में पितृपक्ष में विशेष पूजा-अर्चना का दौर चलता है। कन्या भोज व हवन आदि होता है। उसके बाद भय्यूजी महाराज के सानिध्य में अंतिम दिन महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के खामगांव में ऋषि संकुल पारदी आश्रम शाला के अलावा प्रस्तावित पितृवन में पौधों का रोपण किया जाता है।

सूर्योदय आश्रम के पितृपक्ष पर किए जाने वाले पौधरोपण से जहां एक ओर पूर्वजों की यादों को लंबे अरसे तक बनाए रखा जा सकता है, वहीं यह कोशिश पर्यावरण की रक्षा के लिए कारगर मुहिम साबित हो सकती है। शर्त यही है कि इस अभियान को हर वर्ग का साथ मिले।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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