MP News: हेमंत कटारे ने भूपेंद्र सिंह को क्यों बताया ‘सबसे डरा हुआ नेता’,जानिए, मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तूफान खड़ा हो गया है। अटेर से कांग्रेस विधायक और विधानसभा उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने खुरई विधायक व पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह पर सनसनीखेज हमला बोला है। भोपाल में अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कटारे ने भूपेंद्र को 'मध्यप्रदेश का सबसे डरा हुआ नेता' करार देते हुए उन पर मानवाधिकार उल्लंघन और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए।

यह मामला 12 साल के मासूम मानस शुक्ला के साथ हुई त्रासदी से जुड़ा है, जिसका हाथ भूपेंद्र के भतीजे लखन सिंह के अवैध क्रेशर के पास हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से कट गया। कटारे का दावा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के बार-बार निर्देश देने के बावजूद भूपेंद्र और उनके भतीजे पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, उल्टे पीड़ित की मदद करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता पर FIR दर्ज कर दी गई। यह प्रकरण अब विधानसभा से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचने की राह पर है।

Hemant Katare called Bhupendra Singh bjp scared leader in mp allegation of human rights violation

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मानस की दर्दनाक दास्तां

भोपाल में हेमंत कटारे के आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सागर जिले के बारदा गांव निवासी 12 साल का मानस शुक्ला और खुरई के कांग्रेस नेता अंशुल परिहार मौजूद थे। मानस ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "1 जनवरी 2025 को मैं और मेरे 5-6 दोस्त गांव से 2 किलोमीटर दूर चल रही भागवत कथा की जल यात्रा में शामिल होने गए थे। वापसी में हमें भूपेंद्र सिंह और लखन सिंह के अवैध क्रेशर के पास लगे गिट्टी के ढेर से होकर गुजरना पड़ा। ढेर पर चढ़ते वक्त मेरा हाथ ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से टकरा गया। मैं बेहोश हो गया। मेरे दोस्तों ने पापा को बुलाया। बीना अस्पताल से मुझे सागर रेफर किया गया, फिर एम्स भोपाल में मेरा हाथ काटना पड़ा। डॉक्टरों ने कहा, अगर हाथ नहीं काटा तो जान का खतरा है।"

मानस ने आगे कहा, "पांच महीने बीत गए, लेकिन भूपेंद्र सिंह और लखन सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस उनका साथ दे रही है। बीना थाने में दो महीने तक मेरी FIR नहीं लिखी गई। पापा ने घर के जेवर और जमीन गिरवी रखकर मेरा इलाज कराया। भूपेंद्र ने कभी हमसे मुलाकात नहीं की, न हाल पूछा। उल्टे, मेरी मदद करने वाले अंशुल भैया और उनके पिता पर FIR करा दी।"

कटारे का हमला 'भूपेंद्र डरे हुए नेता, पुलिस के पीछे छिपते हैं'

हेमंत कटारे ने भूपेंद्र सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "मानस का हाथ कट गया, उसका जीवन बर्बाद हो गया, लेकिन भूपेंद्र सिंह और उनके परिवार ने उसकी सुध नहीं ली। NHRC ने पांच महीनों में चार बार पत्र लिखकर भूपेंद्र और लखन सिंह पर कार्रवाई के निर्देश दिए। 8 अप्रैल को कलेक्टर और SP को तलब किया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। इससे साफ है कि खुरई में भारतीय न्याय संहिता नहीं, 'भारतीय षडयंत्र संहिता' चल रही है।"

कटारे ने भूपेंद्र को 'सबसे डरा हुआ नेता' बताते हुए कहा, "जब खुरई के कांग्रेस कार्यकर्ता अंशुल परिहार ने मानस की मदद के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तो भूपेंद्र ने नाराज होकर न केवल अंशुल, बल्कि उनके बुजुर्ग पिता पर भी 15 साल पुराने मामले में FIR दर्ज करा दी। यह साबित करता है कि भूपेंद्र हर संकट में पुलिस के पीछे दुबक जाते हैं। अगर हिम्मत है, तो मानस के परिवार से मिलें, उनकी मदद करें।"

Hemant Katare: NHRC की सख्ती, फिर भी कार्रवाई नहीं

कटारे ने बताया कि NHRC ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। आयोग ने चार बार पत्र लिखकर भूपेंद्र सिंह और लखन सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। 8 अप्रैल 2025 को सागर के कलेक्टर और SP को तलब किया गया, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। कटारे ने आरोप लगाया, "भूपेंद्र सिंह सत्ता के रसूख से पुलिस और प्रशासन पर दबाव डाल रहे हैं। NHRC की सख्त टिप्पणियों से डरकर वे पीड़ित परिवार पर समझौते का दबाव बना रहे हैं।"

अंशुल पर FIR, 'सच बोलने की सजा'

कटारे ने अंशुल परिहार पर दर्ज FIR को 'सच बोलने की सजा' करार दिया। अंशुल ने खुरई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भूपेंद्र के अवैध क्रेशर और मानस की त्रासदी को उजागर किया था। इसके जवाब में भूपेंद्र ने अंशुल और उनके पिता पर FIR दर्ज करा दी। कटारे ने तंज कसते हुए कहा, "भूपेंद्र सिंह कौन-सी तोप हैं कि उनके खिलाफ बोल नहीं सकते? हम सौ बार बोलेंगे। यह मध्यप्रदेश है, कोई तानाशाही नहीं।"

मानस का परिवार, 'गरीब को कुचलने की साजिश'

मानस के पिता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "मैं हर महीने भूपेंद्र सिंह के घर गया। मुझे तीन-चार घंटे बिठाकर कहा गया कि 'भैया कहीं गए हैं।' पांच महीने में उन्होंने एक बार फोन तक नहीं किया। वे सोचते हैं कि हम गरीब हैं, हमारा क्या बिगाड़ लेंगे। मेरी जमीन और जेवर बिक गए, लेकिन न्याय नहीं मिला।" मानस ने भारत सरकार से मांग की, "हमें इंसाफ चाहिए। भूपेंद्र और लखन सिंह पर कार्रवाई हो।"

Hemant Katare: कटारे की चेतावनी, 'हाईकोर्ट और विधानसभा में उठेगा मुद्दा'

कटारे ने इस मामले को विधानसभा और हाईकोर्ट तक ले जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा, "मैं मांग करता हूं कि NHRC के निर्देशों के मुताबिक भूपेंद्र और लखन सिंह पर कार्रवाई हो। अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो हम विधानसभा में यह मुद्दा उठाएंगे। हम हाईकोर्ट में रिट दायर करेंगे। कोई कानून नहीं कि प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पर गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज हो।"

कटारे ने अंशुल और मानस से कहा, "न्यायालय जाएं, मैं आपकी मदद करूंगा। पुलिस और अफसरों को चेतावनी देता हूं कि आपके गलत कारनामों का दंड आज नहीं तो कल मिलेगा।"

भूपेंद्र सिंह की चुप्पी

वन इंडिया हिंदी ने भूपेंद्र सिंह का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। उनके करीबी सूत्रों ने कहा कि भूपेंद्र इस मामले पर जल्द बयान दे सकते हैं। कुछ BJP नेताओं ने इसे 'कांग्रेस की सियासी चाल' करार दिया।

कानूनी और नैतिक सवाल

  • NHRC के निर्देश: आयोग ने चार बार पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। सागर प्रशासन की चुप्पी क्या सत्ता के दबाव को दर्शाती है?
  • FIR का दुरुपयोग: अंशुल और उनके पिता पर दर्ज FIR को कटारे ने 'बदले की कार्रवाई' बताया। क्या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है?
  • अवैध क्रेशर: लखन सिंह का क्रेशर अवैध रूप से चल रहा था। क्या प्रशासन इसकी जांच करेगा?
  • मानस का भविष्य: एक हाथ खो चुके मानस के इलाज और पुनर्वास के लिए सरकार क्या करेगी?
  • पृष्ठभूमि: भूपेंद्र सिंह का विवादों से नाता

भूपेंद्र सिंह मध्यप्रदेश की राजनीति में दिग्गज नाम हैं। पूर्व गृहमंत्री और परिवहन मंत्री रह चुके भूपेंद्र खुरई से लगातार विधायक हैं। लेकिन उनका नाम विवादों से भी जुड़ा रहा है:

  1. जनवरी 2025: हेमंत कटारे ने भूपेंद्र पर RTO घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगाया था।
  2. मई 2025: अंजना मामले में उनकी भूमिका की जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट में उठी।
  3. आगे क्या?
  4. कानूनी लड़ाई: कटारे ने हाईकोर्ट में रिट दायर करने की बात कही। अगर मामला कोर्ट पहुंचा, तो भूपेंद्र और लखन सिंह पर दबाव बढ़ेगा।
  5. विधानसभा में हंगामा: आगामी सत्र में कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी।
  6. NHRC की कार्रवाई: अगर प्रशासन जवाब नहीं देता, तो आयोग सख्त कदम उठा सकता है, जैसे अधिकारियों पर जुर्माना या जांच।
  7. सियासी जंग: यह मामला BJP और कांग्रेस के बीच नई सियासी जंग छेड़ सकता है, खासकर सागर और खुरई में।

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