MP: हनुमानजी की कृपा से चलती है 'सीताराम की रसोई', इसल‍िए शहर में कोई भूखा नहीं सोता

सागर, 08 जुलाई। सनातन धर्म में एक ध्‍येय वाक्‍य है, 'यथा नामे तथा गुणे'... सागर में "सीताराम रसोई" के मामले में यह वाक्‍य सौ फीसदी सच है। कहा जाता है सीताराम रसोई पर हनुमानजी की कृपा है, इस कारण सागर में अब कोई भूखा नहीं सोता है। दरअसल बीते 19 साल संचाल‍ित रसोई में एक भी द‍िन ऐसा नहीं गया, जब कोई व्‍यक्‍त‍ि बगैर भोजन किए लौटा हो। भगवान सीताराम के नाम से संचाल‍ित इस रसोई के संचालक और सदस्‍यों का कहना है भगवान की रसोई है और हनुमानजी महाराज की कृपा से संचालति होती हैं। रोज सैकडों लोग रसोई में भोजन करते हैं, करीब 200 असहायों को उनके घर और ठ‍िकानों तक भोजन पहुंचाया जाता है।

सीताराम रसोई कर रही गरीब असहायों की सेवा

सागर के कुछ समाजसेव‍ियों ने असहायों, गरीबों, जरूतमंदों मानस‍िक बीमार व्‍यक्‍त‍ियों को भोजन उपलब्‍ध कराने के ल‍िए आज से 19 साल पहले जनवरी 2004 में सीताराम रसोई नाम से संस्‍था बनाई थी। संस्‍था ने रसोई में क‍िचन और गरीबों को बैठाकर भोजन कराने के ल‍िए हॉल बनवाया था। कर्मचार‍ियों की व्‍यवस्‍था की और रसोई का न‍ि-शुल्‍क संचालन प्रारंभ क‍िया था। तब से अब तक यह संस्‍था अनवरत असहाय, मजबूर, बीमार, न‍ि-शक्‍तों को रोजाना भोजन उपलब्‍ध करा रही है। रसोई में भोजन से पहले भगवान स‍ियाराम का नाम जप भी क‍िया जाता है।

जो रसोई नहीं आ पाते, उनके घर, ठ‍िकानों पर पहुंचाते हैं भोजन
सीताराम रसोई के सच‍िव व समाजसेवी इंजीन‍ियर प्रकाश चौबे बताते हैं कि संस्‍था रोजाना करीब 300 लोगों को न‍ि:शुल्‍क भोजन करा रही है। रसोई परिसर में 150 से अध‍िक लोग दोनों समय आकर भोजन करते हैं। 150 लोगों को संस्‍था के वाहन से घरों-झोपड‍ियों में भोजन पहुंचाया जाता है। करीब 70 लोगों को रोज रात में रेलवे स्‍टेशन, बस स्‍टैंड, फुटपाथ क‍िनारे, पार्क के आसपास, चबूतरें पर, अस्‍पताल पर‍िसर में बसर करने वालों को तलाश-तलाश कर भोजन पहुंचा रहे हैं।

सीताराम रसोई

200 से अध‍िक कुपोष‍ित बच्‍चों को स्‍वस्‍थ बना चुके
संस्‍था ने ज‍िला प्रशासन के साथ म‍िलकर नवाचार करते हुए शहर की आंगनवाड‍ियों में दर्ज कुपोष‍ित बच्‍चों को गोद ल‍िया था। इनमें करीब 200 बच्‍चे दर्ज थे, ज‍िन्‍हें पौष्‍टि‍क आहार उपलब्‍ध कराया गया और चंद महीनों में ये बच्‍चे सामान्‍य बच्‍चों की श्रेणी में आ गए। वर्तमान में हफस‍िली और मोलाली की झुग्‍गी बस्‍त‍ी के करीब 15 बच्‍चों को गोद लेकर पोष्‍ट‍िक आहार उपलब्‍ध कराया जा रहा है।

गरीब मह‍िलाओं को स्‍वालंबन से जोडने प्रश‍िक्षण
सीताराम रसोई संस्‍था केवल भोजन नहीं कराती बल्‍क‍ि रेलवे स्‍टेशन व अन्‍य इलाकों में गरीब बेरोजगार मह‍िलाओं को स‍िलाई-कढाई का काम स‍िखा रहे हैं। उन्‍हें स्‍वावलंबन से जोडने के ल‍िए उनकी रूच‍ि अनुसार काम स‍िखाया जा रहा है, वहीं गरीबों के बच्‍चों को संस्‍था में ही दोपहर में न‍िशुल्‍क कम्‍प्‍यूटर ट्रेंन‍िंग दी जा रही है।

मानव सेवा ही नारायण सेवा है
सीताराम रसोई संस्‍था ने ध्‍येय वाक्‍य बनाया है कि सागर में भूखा न सोए कोई। इसी को लेकर हमारी संस्‍था के सदस्‍य न‍िरंतर काम कर रहे हैं। संस्‍था में शहर के सभी समाजसेवी और अलग-अलग व्‍यावसायों के लोग जुडे हैं। ब‍िना की श्रेय या नाम के सभी काम कर रहे हैं। संस्‍था न‍ि-शुल्‍क भोजन, कम्‍प्‍यूटर श‍िक्षा, स्‍वावलंबन प्रश‍िक्षण, कुपोष‍ित बच्‍चों को गोद लेकर उन्‍हें स्‍वस्‍थ बना रही है।
- डॉ. राजेंद्र चउदा, अध्‍यक्ष, सीताराम रसोई सागर

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