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MP news: बिहार से खंडवा तक का सफर, खराब रिजल्ट से नाराज लड़की प्रेमी से शादी को निकली, थाने में खत्म हुई कहानी

MP News: बिहार के मुजफ्फरपुर से एक सनसनीखेज और भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, पांच दिन पहले, यानी 4 अप्रैल 2025 को एक नाबालिग लड़की अपने खराब परीक्षा परिणाम से परेशान होकर घर छोड़कर निकल पड़ी। मंजिल थी मध्य प्रदेश का इंदौर, जहां उसका प्रेमी रहता था। उसने सोचा कि प्रेमी से शादी कर अपनी जिंदगी को नई दिशा दे देगी।

लेकिन यह कहानी न तो शादी के मंडप तक पहुंची और न ही प्रेम कहानी का कोई रोमांटिक अंत हुआ। 1200 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद यह लड़की खंडवा रेलवे स्टेशन पर उतरी, और अंत में उसकी यह यात्रा कोतवाली थाने में जाकर खत्म हुई। आइए, इस रोचक और हैरान करने वाली घटना की पूरी कहानी समझते हैं।

From Bihar to Khandwa a girl upset with the bad result went out to marry her boyfriend
खराब रिजल्ट, पिता की डांट और घर छोड़ने का फैसला

यह कहानी शुरू होती है बिहार के मुजफ्फरपुर से, जहां यह लड़की अपने परिवार के साथ रहती थी। उसने इस साल बिहार बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षा दी थी। जब रिजल्ट आया, तो उसे महज 40 प्रतिशत अंक मिले और वह थर्ड डिवीजन में पास हुई। पिता, जो एक सरकारी कर्मचारी हैं, को बेटी का यह प्रदर्शन बिल्कुल पसंद नहीं आया। उन्होंने उसे खूब डांटा और गुस्से में कह दिया, "अगर पढ़ाई में मन नहीं लग रहा, तो हम तेरी शादी करवा देते हैं।" पिता की यह बात लड़की के लिए बड़ा झटका बन गई। उसे लगा कि माता-पिता उसकी शादी कहीं और तय कर देंगे, और उसका भविष्य अंधेरे में चला जाएगा। डर और गुस्से में उसने एक बड़ा फैसला ले लिया-वह घर छोड़कर भाग जाएगी।

4 अप्रैल की सुबह, जब घरवाले सो रहे थे, उसने चुपचाप अपना बैग उठाया और निकल पड़ी। उसके पास ज्यादा पैसे नहीं थे, फिर भी वह मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पहुंची। उसका इरादा था इंदौर जाने का, जहां उसका प्रेमी रहता था। उसने सोचा कि वहां पहुंचकर वह अपने प्रेमी से शादी कर लेगी और नई जिंदगी शुरू करेगी। बिना टिकट लिए वह ट्रेन की महिलाओं वाली बोगी में बैठ गई और सफर शुरू कर दिया।

प्रेमी को फोन: "मैं शादी करने इंदौर आ रही हूं"

ट्रेन में बैठते ही लड़की ने अपने प्रेमी को फोन किया। उसने कहा, "मैं घर छोड़कर इंदौर आ रही हूं। हम शादी कर लेंगे।" दूसरी तरफ से प्रेमी घबरा गया। उसने जवाब दिया, "तुम तो नाबालिग हो। अभी शादी नहीं हो सकती। तुम वापस अपने घर चली जाओ।" लेकिन लड़की ने उसकी एक न सुनी। उसका कहना था कि वह अब घर नहीं लौटेगी, क्योंकि माता-पिता ने उसे बहुत डांटा है। उसने प्रेमी से कहा कि वह इंदौर के लिए निकल चुकी है और रास्ते में है। यह सुनकर प्रेमी और परेशान हो गया। उसने अपने बड़े भाई को सारी बात बताई और दोनों ने तय किया कि वे लड़की से मिलने जाएंगे।

लड़की को पता चला कि इंदौर जाने के लिए उसे खंडवा से बस लेनी पड़ेगी। उसने ट्रेन से खंडवा तक का सफर तय किया। 1200 किलोमीटर की यह यात्रा उसके लिए आसान नहीं थी। बिना टिकट, बिना खाने-पानी के उसने यह जोखिम उठाया। आखिरकार, वह खंडवा रेलवे स्टेशन पर उतर गई।

खंडवा स्टेशन पर मुलाकात और थाने का रुख

खंडवा पहुंचने के बाद लड़की ने फिर से अपने प्रेमी को फोन किया। उसने कहा, "मैं खंडवा स्टेशन पर हूं। अब तुम मुझे लेने आओ।" प्रेमी और उसका भाई, जो इंदौर से खंडवा के लिए निकल चुके थे, कुछ घंटों बाद स्टेशन पहुंच गए। दोनों ने लड़की से मुलाकात की और उसे समझाने की कोशिश की। प्रेमी ने कहा, "तुम अभी नाबालिग हो। हमारी शादी कानूनी तौर पर नहीं हो सकती। तुम्हें घर वापस जाना चाहिए।" लेकिन लड़की टस से मस न हुई। उसने कहा, "मैं वापस नहीं जाऊंगी। मुझे मम्मी-पापा से डर लगता है। तुम मुझसे शादी करो, वरना मैं कहीं और चली जाऊंगी।"

प्रेमी और उसके भाई के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा। उन्हें डर था कि अगर लड़की कुछ गलत कदम उठा लेगी, तो वे मुसीबत में पड़ सकते हैं। आखिरकार, उन्होंने फैसला किया कि इस मामले को पुलिस के हवाले करना ही सही होगा। दोनों लड़की को लेकर खंडवा के कोतवाली थाने पहुंचे। वहां उन्होंने पुलिस को पूरी कहानी सुनाई-कैसे लड़की बिहार से भागकर आई, और कैसे वह शादी की जिद कर रही है। इसके बाद वे लड़की को पुलिस के सुपुर्द कर इंदौर लौट गए।

पुलिस और बाल कल्याण समिति का हस्तक्षेप

पुलिस ने लड़की को तुरंत वन स्टॉप सेंटर भेज दिया, जहां उसकी देखभाल की गई। अगले दिन, 5 अप्रैल 2025 को उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने बताया कि लड़की ने काउंसिलिंग के दौरान अपनी पूरी कहानी बयां की। उसने कहा, "मैं मुजफ्फरपुर की रहने वाली हूं। मेरे पापा ने रिजल्ट खराब होने पर बहुत डांटा और शादी की बात कही। मैं डर गई थी, इसलिए घर छोड़कर प्रेमी से शादी करने निकल पड़ी।"

लड़की ने यह भी बताया कि उसकी प्रेमी से दोस्ती सोशल मीडिया पर हुई थी। दोनों की बातचीत धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। उसने कहा, "ट्रेन में बैठकर मैंने उसे फोन किया था। खंडवा पहुंची, तो वह और उसका भाई आए। लेकिन उसके भाई ने कहा कि मैं नाबालिग हूं और अभी शादी नहीं हो सकती। मैंने जिद की, तो वे मुझे थाने छोड़कर चले गए।"

काउंसिलिंग और घर वापसी

बाल कल्याण समिति ने 6 अप्रैल को लड़की का मेडिकल करवाया और उसकी काउंसिलिंग शुरू की। शुरुआत में वह अपने माता-पिता के पास लौटने को तैयार नहीं थी। उसका कहना था, "मुझे घर में डांट पड़ेगी। मैं नहीं जाऊंगी।" समिति ने उसकी मां से फोन पर बात कराई। मां ने उसे प्यार से समझाया और कहा, "बेटी, तुम घर आ जाओ। हम तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे।" इसके बाद समिति की महिला सदस्यों ने भी उसे समझाया। उन्होंने कानून का हवाला देते हुए कहा, "तुम नाबालिग हो। तुम्हारी शादी अभी नहीं हो सकती। तुम्हें अपने परिवार के पास ही जाना होगा।"

लंबी काउंसिलिंग के बाद लड़की आखिरकार घर जाने को राजी हो गई। समिति ने उसके माता-पिता को खंडवा बुलाया। 9 अप्रैल 2025 को माता-पिता खंडवा पहुंचे और लड़की को उनके सुपुर्द कर दिया गया। जाते वक्त उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन वह चुपचाप माता-पिता के साथ लौट गई।

सोशल मीडिया का प्यार और टूटी उम्मीदें

यह पूरी घटना सोशल मीडिया की दोस्ती से शुरू हुई थी। लड़की और इंदौर का युवक सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के करीब आए थे। उनकी बातचीत प्यार में बदल गई, और लड़की को लगा कि वह अपने प्रेमी के साथ नई जिंदगी शुरू कर सकती है। लेकिन उसकी यह उम्मीद तब टूट गई, जब प्रेमी ने उसकी उम्र का हवाला देकर शादी से इनकार कर दिया। प्रेमी के भाई की समझदारी और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस कहानी को गलत दिशा में जाने से बचा लिया।

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