MP News: नागर सिंह चौहान से क्यों छीना गया था वन विभाग, यह नोट शीट के सामने आते ही मंत्री जी हुए शांत
मध्य प्रदेश में कुछ दिन पहले इस्तीफा की पेशकश करने वाले मंत्री नगर सिंह चौहान से आखिरकार क्यों वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय छीन लिया गया था। इसे लेकर अब एक बड़ी जानकारी सामने आई है। दरअसल, मंत्री की एक नोट शीट तेजी से वायरल हो रही है। इस नोट शीट में ऐसा क्या था जिसके कारण मंत्री से वन विभाग छीना गया।
जैसे ही वन विभाग की जिम्मेदारी कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए कैबिनेट मंत्री रामनिवास रावत को दी गई, वैसे ही मंत्री नगर सिंह चौहान को गुस्सा आ गया और उन्होंने मीडिया के सामने खुलकर इस्तीफे की पेशकश कर डाली। लग रहा था शाम तक मंत्री जी इस्तीफा भी दे देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मंत्री जी की तेवर कल तक पूरी तरह ठंडे पड़ गए थे और इसके पीछे की वजह यही नोटशीट बताई जा रही है।

दरअसल, यह पूरा मामला कटनी के ढीमरखेड़ा तहसील के झिन्ना और हरैया की 148 एकड़ जमीन के खनन के लिए देने से जुड़ा है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई है। इसमें से एक पक्ष वन विभाग का है तो दूसरा पक्ष खनन कारोबारी आनंद गोयंका (मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका) का है। मंत्री नागर सिंह चौहान ने इन्हीं कारोबारी के लिए वन विभाग को एसएलपी वापस लिए जाने के लिए नोट शीट लिखी थी। तत्कालीन प्रमुख सचिव वन विभाग जेएन कंसोटिया ने मंत्री की नोट शीट को आगे बढ़ते हुए डीएफओ गौरव चौधरी को एसएलपी वापस लिए जाने के लिए लिख दिया था।
लेकिन हाल में वन विभाग में पदस्थ हुए नए अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने मंत्री के फैसले वाली नोट शीट को हटाते हुए लिखा कि एसएलपी वापस नहीं ली जाए। साथ ही कटनी डीएफओ सरकार के अगले आदेश का इंतजार भी करें, ऐसा लिखा। वन विभाग का दावा है कि यह जमीन फॉरेस्ट की है सिर्फ रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। हालांकि गोइंग का पक्ष हाईकोर्ट में फैसला अपने पक्ष में ले चुका है इसके बाद वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी।
23 अप्रैल को एसएलपी वापस लेने के लिए लिखी गई थी नोटशीट
तत्कालीन वन मंत्री चौहान ने 23 अप्रैल को एसएलपी वापस लेने की नोटशीट पर मंजूरी दी थी। इसके बाद, यह फाइल तत्कालीन अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया के पास भेजी गई, और उसी तारीख को सचिव और फिर ओएसडी तक पहुंच गई। हालांकि, इसके क्रियान्वयन में बाद में बाधा उत्पन्न हो गई, और कटनी डीएफओ ने कलेक्टर के पास अपील कर दी।
फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर के आदेश अब अंतिम हो चुके हैं। वन और राजस्व विभाग के संयुक्त सीमांकन के आधार पर कार्यवाही की जाए। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विधि विभाग के प्रमुख सचिव भी मौजूद थे। विधि विभाग और महाधिवक्ता की राय भी प्राप्त है। इसलिए, पूर्व में अनुमोदित निर्णय के अनुसार प्रकरण को तुरंत वापस लिया जाए। इससे शासन को किसी भी राजस्व हानि का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जमीन को डी-नोटिफाई करने के आदेश जारी
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी को अधिकृत किया था। इस कमेटी की अनुशंसा के आधार पर, फोरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर (एफएसओ) ने जमीन को डी-नोटिफाई करने के आदेश जारी किए थे। एफएसओ के आदेश के खिलाफ कटनी डीएफओ गौरव चौधरी ने कलेक्टर कोर्ट में अपील की है। इसके अतिरिक्त, मंत्री चौहान द्वारा एसएलपी वापस लेने की सिफारिश की गई फाइल पर आगे की कार्रवाई भी रोक दी गई है। इससे पहले भी, कलेक्टर ने इस जमीन को डी-नोटिफाई करने के आदेश पर स्टे जारी किया था। फिलहाल, कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई जारी है।












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