असल जिंदगी में रियल हीरो, कहलाते हैं जेम्स बॉन्ड! साथी बुलाते हैं सुपरकॉप
मप्र की दमोह पुलिस में उनका अपना जेम्स बॉन्ड हैं। प्रधान आरक्षक संतोष तिवारी को गुमशुदगी के केस को सुलझाने में महारात हासिल हैं। पुलिस में नौकरी करते हुए उन्होंने 300 से अधिक लापता, गुमशुदगी के केस सुलझाए हैं।

पुलिस विभाग के 300 से मामलों को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले संतोष कुमार तिवारी मध्य प्रदेश पुलिस के सुपरकॉप में गिने जाते हैं। जिस प्रकार दर्शक फिल्मों के एक्सपर्ट पुलिस वाले के हैरत अंगेज काल्पनिक कारनामों को देख कर तालियां बजाने लगते हैं। उन सब से कहीं ज्यादा रियलस्टिक किरदार एएसआई संतोष कुमार तिवारी का है। जिन्होंने अपने जीवन काल में पुलिस विभाग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। गुमशुदगी के मामलों में महारत हासिल कर चुके संतोष को आसपास के जिलों के पुलिस थानों के कर्मचारी भी उनसे संपर्क कर सलाह लेते रहते हैं।

सामान्य से दिखने वाले संतोष तिवारी ने अपनी नौकरी पूरी निष्ठा से करते हुए यह साबित कर दिया है कि नामुमकिन जैसी कोई चीज इस दुनिया में नहीं होती। दमोह जिले के अधरोटा गांव के निवासी संतोष 4 भाई एक बहन थे। इनके पिता भी पुलिस में नौकरी करते थे। अचानक हुई बीमारी से पिताजी का देहांत हो गया और 1986 में संतोष को अनुकंपा नियुक्ति बतौर सहायक उप निरीक्षक के रूप में मिली। वर्ष 2013 में पदोन्नत होकर हवलदार बने। इसके बाद 2021 में प्रधान आरक्षक के रूप में बटियागढ़ थाने में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

8 राज्यों से गुमशुदा को तलाश कर ला चुके हैं
आरक्षक संतोष तिवारी के बारे में विभाग में चर्चा आम है। कहा जाता है कि वे दिन रात एक कर गुमशुदा लोगों की तलाश करते हैं। वे देश के कई अन्य राज्यों तक जाकर लापता व्यक्ति को तलाशकर परिजनों को सौंप चुके हैंं। सैकड़ों लोगों को उनके बिछड़े परिजनों से मिलवा कर संतोष तिवारी ने बहती आंखों के आंसू पोंछे हैं। बातचीत के दौरान एएसआई ने बताया की वह अपनी सेवा के दौरान वह कोलकाता, तमिलनाडु, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा से तक गुमशुदा लोगों को ढूंढ कर लाए हैं।
फिल्मी अन्दाज में फेरे लेते समय पकड़ा था
एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि दमोह की एक लड़की लापता हो गई थी जिसकी 7 दिन बाद शादी थी। मामले की पड़ताल उन्हें सौंपी गई। 3 दिन और चार रातों के लगातार परिश्रम के बाद उस लड़की को जबलपुर के एक मंदिर में फेरे लेते समय फिल्मी अंदाज में जाकर रोक लिया था और परिजनों के सुपुर्द किया। वहीं ललितपुर से दमोह आया एक वृद्ध अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। मानसिक रूप से वह सक्षम नहीं था। केवल जैन मंदिर शब्द बोलते हुए वह बेहोश हो गया था। इसके बाद संतोष तिवारी ने प्राथमिक उपचार करवाकर उस वृद्ध को दमोह शहर के प्रत्येक जैन मंदिर मैं अपने वाहन पर बैठा कर ले गए। उसके बाद उसकी फोटो जैन मंदिरों के जुड़े ट्रस्टों को भेजे। तब कहीं जाकर वह अपने परिजनों से मिल पाया।

लड़की बिकने वाली ही थी और पहुंच कर बचा लिया
दमोह शहर के स्कूल में 11 वीं पढ़ने वाले नाबालिक लड़का लड़की आकर्षण का शिकार होकर घर से भाग गए थे, जो भटकते हुए मुंबई जा पहुंचे जहां किसी ठग ने शातिराना तरीके से उन्हें मदद के बहाने शिवपुरी के पास अपने गांव भेज दिया था। जानकारी में पता चला कि वह गांव कई अपराधों में लिप्त होने के कारण बदनाम था। साथ ही मानव तस्करी के सैकड़ों मामले उस गांव के लोगों पर चल रहे थे। जिसमें छोटी बच्ची को उन्होंने कहीं बेचने की तैयारी भी कर ली थी। बड़ा संघर्ष करते हुए समय रहते उन्हें उस गांव से छुड़ाकर परिजनों के सुपुर्द किया था। उन्होंने इसी तरह के 300 से भी ज्यादा गुमशुदगी के मामलों में सफलता पाई है। जो एक रिकॉर्ड है इसके अलावा 40 से भी ज्यादा स्थाई वारंटी, जिन्हें 10 वर्षों तक पुलिस ढूंढ नहीं पा रही थी। उन्हें भी पकड़कर थाने में बंद किया है।
हमेशा साथ रखते हैं गुमशुदाओं के कागज
प्रधान आरक्षक संतोष तिवारी के काम करने का तरीका कुछ अलग हैं। वे ऐसे दस्तावेज हमेशा अपने साथ रखते हैं, जिसमें गुमशुदा लोगों के फोटो व संकलित जानकारी रहती है। वे कहीं भी जाएं पूछताछ करते रहते हैं। सामान्य ड्यूटी लगने पर भी वह अपनी पूछताछ जारी रखते हैं, यहां तक कि रिश्तेदारी और शादी विवाह में जाते समय भी अपने साथ नौकरी के दस्तावेजों को भी लेकर जाते हैं।
जब तकनीक, फोन कॉल लोकेशन नहीं थी, तब भी सुलझाए केस
उन्हें अब तक जितने भी मामले सौपे गए उनमें शत-प्रतिशत रिजल्ट तक पहुंचे हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई मामले तो उस समय के हैं जब काल- लोकेशन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी उस समय इन्होंने इन बड़े बड़े शहरों की खाक छान मारी। आज उन्हें दिल्ली गुड़गांव जैसे बड़े शहरों की तंग गलियां तक रट गईं है। उनकी कार्यकुशलता के चर्चे पूरे मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में की जाती हैं। हॉलीवुड का जासूसी किरदार जेम्सबॉन्ड के फिल्मी कारनामे फिल्मों हल होते दिखाए जाते हैं, लेकिन यहां जमीन पर इतने मामले हल करने वाले वास्तविकता में संतोष तिवारी जेम्सबांड हैं।












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