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बाढ़ सर्वे में लापरवाही पर पटवारी के खिलाफ कलेक्टर का सख्त एक्शन, बरखेड़ा जमाल में दिए जांच के आदेश

MP News Collector: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में अतिवर्षा और बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता में देरी और सर्वे में लापरवाही ने प्रशासन की सख्ती को सामने ला दिया है। कलेक्टर आदित्य सिंह ने ग्राम बरखेड़ा जमाल के भ्रमण के दौरान पटवारी बाबूलाल कलावत की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब कलेक्टर ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और पाया कि बाबूलाल कलावत ने प्रभावित लोगों का सर्वे और आवश्यक जानकारी जमा करने में ढिलाई बरती।कलेक्टर आदित्य सिंह ने ग्राम बरखेड़ा जमाल के भ्रमण के दौरान अतिवर्षा एवं बाढ़ से प्रभावित लोगों का सर्वे एवं जानकारी नहीं देने पर पटवारी बाबूलाल कलावत के विरुद्ध कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए।

Collector takes strict action against Patwari for negligence in flood survey Barkheda Jamal

बरखेड़ा जमाल में बाढ़ का कहर: सर्वे में देरी की शिकायत

अशोकनगर जिला, जो इस मानसून में भारी बारिश और बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है, में ग्राम बरखेड़ा जमाल के निवासियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। मध्य प्रदेश के 17 जिलों की 14.62 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई, जिसमें अशोकनगर भी शामिल है। बरखेड़ा जमाल में फसलें, घर, और आजीविका को नुकसान पहुंचा, जिसके लिए तत्काल सर्वे और राहत कार्य जरूरी थे। कलेक्टर आदित्य सिंह ने 1 अगस्त 2025 को गांव का दौरा किया और पाया कि पटवारी बाबूलाल कलावत ने बाढ़ प्रभावित लोगों का सर्वे पूरा नहीं किया और न ही आवश्यक जानकारी प्रशासन को उपलब्ध कराई।

कलेक्टर ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तहसीलदार को निर्देश दिए कि बाबूलाल के खिलाफ तत्काल जांच शुरू की जाए और अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाए।

अशोकनगर में कलेक्टर आदित्य सिंह का सख्त एक्शन:

बाढ़ सर्वे में लापरवाही पर पटवारी बाबूलाल कलावत के खिलाफ कार्रवाई के आदेश।" यह कार्रवाई मध्य प्रदेश प्रशासन की उस नीति को दर्शाती है, जिसमें शासकीय कार्यों में ढिलाई बरतने वालों के खिलाफ सख्ती का संदेश दिया गया है।

पटवारी की भूमिका और लापरवाही का प्रभाव

पटवारी, जो राजस्व विभाग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन, फसल, और आपदा से संबंधित सर्वेक्षण के लिए जिम्मेदार होते हैं। बरखेड़ा जमाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों का सर्वे न होने के कारण राहत राशि और मुआवजे का वितरण प्रभावित हुआ। मध्य प्रदेश में बाढ़ के कारण 2,000 से अधिक घरों में पानी घुस गया और कई गांवों में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। बाबूलाल कलावत की लापरवाही ने न केवल प्रभावित परिवारों को राहत से वंचित किया, बल्कि प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।

कलेक्टर आदित्य सिंह ने कहा, "बाढ़ जैसी आपदा में त्वरित सर्वे और सटीक जानकारी जरूरी है। पटवारी का यह कर्तव्य है कि वह प्रभावित लोगों का डेटा समय पर उपलब्ध कराए। बाबूलाल कलावत की लापरवाही अस्वीकार्य है।" यह घटना अन्य मामलों से भी जुड़ती है, जहां पटवारियों की लापरवाही पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई। उदाहरण के लिए मुरैना में पटवारी महावीर करोरिया को फार्मर आईडी निर्माण और अन्य कार्यों में लापरवाही के लिए हटा दिया गया।

मध्य प्रदेश में पटवारियों पर सख्ती: अन्य उदाहरण

मध्य प्रदेश में हाल के महीनों में पटवारियों के खिलाफ लापरवाही और भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं। आगर-मालवा में नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी को डिमोशन कर पटवारी बनाया गया, जो लोकायुक्त जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई का परिणाम था। इसी तरह धार जिले में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने राजस्व अभियान 2.0 में लापरवाही के लिए पटवारी रोहित अचाले को निलंबित किया और अन्य को नोटिस जारी किए।

बरखेड़ा जमाल में बाढ़ की स्थिति और प्रशासन की चुनौतियां

बरखेड़ा जमाल में बाढ़ ने कई परिवारों को बेघर कर दिया और खेती-बाड़ी को भारी नुकसान पहुंचा। गुना जिले में बाढ़ के कारण गोपालपुरा बांध से पानी छोड़ने से पहले उचित चेतावनी नहीं दी गई, जिससे नुकसान बढ़ा। कलेक्टर आदित्य सिंह ने बरखेड़ा जमाल में प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और तत्काल राहत के लिए निर्देश दिए। लेकिन सर्वे में देरी ने मुआवजा वितरण को प्रभावित किया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के दौरान प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा, "सर्वे में खामियां हैं और प्रशासन मामले को रफा-दफा करना चाहता है।" बरखेड़ा जमाल में बाबूलाल कलावत की लापरवाही ने इस आलोचना को और हवा दी।

प्रशासनिक विशेषज्ञ डॉ संजय वर्मा ने कहा, "पटवारी स्तर पर लापरवाही आपदा प्रबंधन को कमजोर करती है। कलेक्टर आदित्य सिंह का सख्त रुख एक सकारात्मक संदेश है, लेकिन इसे सभी स्तरों पर लागू करना होगा।" सामाजिक कार्यकर्ता रीना शर्मा ने कहा, "बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित सर्वे और पारदर्शी मुआवजा वितरण जरूरी है। पटवारी की लापरवाही ने लोगों का भरोसा तोड़ा है।"

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