Panna Tiger Reserve: जंगल के राजा को वनवास, वंशजों ने छीने इलाके, गुमनाम हो गया पन्ना का टाइगर No-1

सागर, 10 अगस्त। कभी हीरों की नगरी पन्ना के जंगलों पर उसका राज चलता था, वह मांद से निकलता था तो पूरा जंगल सहम जाता था, उसकी एक दहाड से जंगल का जर्रा-जर्रा थर्रा उठता था! भारी-भरकम ढीलढोल वाले खुंखार Tiger को यहां बाघों का जनक कहा जाता है। पन्ना टाइगर रिजर्व में देश-विदेश से आने वाले पर्यटक उसकी एक झलक पाने ललायित रहते थे। बाघ विहीन पन्ना को एक से एक नायाब नगीने उसी ने दिए़़, लेकिन अब वह उपेक्षित है, गुमनाम जीवन जी रहा है। उसी से पैदा हुए वंशजों ने उसकी टेरिटरी पर कब्जा जमाकर उसे खदेड दिया! हम बात कर रहे हैं पन्ना टाइगर रिजर्व के टाइगर नंबर-1 बाघ T-3 की जिसने पन्ना को बाघों से आबाद किया था।

14 साल में 80 तक पहुंचाया बाघ परिवार

14 साल में 80 तक पहुंचाया बाघ परिवार

मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने में पन्ना के बाघ T-3 ने अहम भूमिका निभाई है। पन्ना टाइगर रिजर्व में उसने दो से 80 बाघों तक का सफर पूरा कराया। महज 14 साल में उसने अकेले तीन दर्जन से अधिक बाघ सदस्यों को जन्म दिया था। अब वह बूढा हो चुका है। उसके इलाकों पर उसके बेटे, नाती-पोतों ने कब्जा जमा लिया है। उसकी साथी बाघिन, उसके बेटों और उनसे जन्में बाघों ने उसकी टेरिटरी पर ही कब्जा जमाकर उसे खदेड दिया है।

तालगांव पठार को बनाया था T-3 ने ठिकाना

तालगांव पठार को बनाया था T-3 ने ठिकाना

पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन के बाद आए पहले बाघ T-3 ने जंगलों की खाक छानकर यहां स्थित तालगांव पठार को अपना पहला इलाका बनाया था। इस इलाके में वह साथी बाघिन टी1 और टी 2 के साथ इसी इलाके को टेरिटरी बनाकर रखा था। यह वह इलाका था जहां से पन्ना में बाघों की वंश बढ़ना शुरू हुआ था।

दबंग बेटे पी-111 ने ही छीना था इलाका

दबंग बेटे पी-111 ने ही छीना था इलाका

बाघ T-3 की पहली संतान पी 111 पन्ना टाइगर रिजर्व का हीरा कहलाता था, जो पिछले दिनों खत्म हो गया। यह वहीं टाइगर था, जो बिलकुल अपने पिता के जैसे ही दबंग, तेज, खुंखार था। जवानी में कदम रखते ही उसने सबसे पहले अपने पिता का इलाका तालगांव पठार पर कब्जा जमाया था। उसके कारण ही पिता बाघ T-3 को अपना इलाका छोड़ना पड़ा था।

पीटीआर प्रबंधन ने उतारा रेडियो काॅलर लोकेशन भी ट्रेस नहीं करते

पीटीआर प्रबंधन ने उतारा रेडियो काॅलर लोकेशन भी ट्रेस नहीं करते

बाघ टी-3 के बूढे़ होने और जंगल में दहशत व रूतबा खत्म होने के बाद उसके वंशजों, साथी बाघिनों ने साथ छोड़ा तो ठीक पन्ना टाइगर रिजर्व ने भी उस पर ध्यान देना बंद कर दिया। प्रबंधन ने उसके गले में पहनाया गया रेडियो काॅलर आईडी उतार लिया है। अब यह बाघ जंगल में कहां किस लोकेशन पर है, इसकी जानकारी प्रबंधन को भी नहीं रहती। महीने 15 दिन में उसकी मैन्युअल लोकेशन ट्रेस कर ली जाती है। अमले ने भी उसे उपेक्षित कर खुद के हाल पर छोड़ दिया है।

बाघ विहीन पन्ना के लिए पेंच से 2008 में लाया गया था

बाघ विहीन पन्ना के लिए पेंच से 2008 में लाया गया था

साल 2008 के पहले बाघ विहीन हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनस्र्थापन का कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके लिए बांधगढ़ से बाघिन टी-1 और पेंच टाइगर रिजर्व से पर बाघ टी-3 व कान्हा से एक अन्य बाघिन टी-2 को लाया गया था। दो बाघिनों के साथ टाइगर ने अपना वंश बढ़ाना शुरू किया तो यह सिलसिला लगातार आज तक जारी है।

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