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MP News: 13 साल की आयु में स्वतंत्रता सेनानी बने चंद्रभान राय का निधन, राजकीय सम्मान से हुआ अंतिस संस्कार

मध्य प्रदेश के कटनी जिले के ढीमरखेड़ा तहसील के सिलौंडी गांव में जन्मे चंद्रभान राय का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे 14 वर्ष की उम्र में आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे। आज उन्होंने आखिरी सांस ली। उन्हें मुक्ति धाम में गॉड ऑफ ऑनर दिया गया। यहां उल्लेखनीय है कि चंद्रभान राय के पिता स्व. रघुनाथ प्रसाद राय भी स्वतंत्रता सेनानी थे।

स्वतंत्रा सेनानी चंद्रभान राय के छोटे भाई प्रताप भानु राय ने जंग-ए-आजादी किताब लिखी थी। जिसका विमोचन तात्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने किया था। इनका पूरा परिवार समाज सेवा में लगा रहता है। वर्तमान में इस परिवार की तीसरी पीढ़ी की बहू जिला पंचायत सदस्य कविता पंकज राय है। इनका परिवार तीन पीढ़ी से देश की सेवा कर रहा है।

13 साल की आयु में स्वतंत्रता सेनानी बने चंद्रभान राय का निधन

रधुनाथ प्रसाद राय 23 अगस्त 1942 से 24 दिसंबर 1942 तक तथा सन 1930 से 1942 तक भूमिगत सेनानी थे। इनके पुत्र चंद्रभान राय जिनका जन्म ग्राम सिलौंडी में हुआ था। भारत में आजादी के बाद भी गोबादमन और द्वीप में पुर्तगाली शासन मौजूद रहा था। जो भारत के लिए कलंक था। पुर्तगाली शासन को खत्म करने के लिए अखिल भारतीय समिति ने गोबा मुक्ति आंदोलन का श्रीगणेश 15 जून 1955 को किया था।

इस समिति की स्थापना जबलपुर में भी हुई थी। जिसके मंत्री प्रोफेसर एम.जी ताम्हणकार थे। गोबा मुक्ति आंदोलन मे 12 जुलाई 1955 से 2 अक्टूबर 1955 तक मध्य प्रदेश में 15 जत्थों में 78 सत्याग्रही थे, जिसमें जबलपुर जिले के 46 जबलुपर से 29 कटनी से 16 और सिहोरा से 1 सत्याग्रही गया था। जबलपुर से 8 सदस्यीय प्रथम जत्था गोबा सत्याग्रह में भाग लेने 11 जुलाई 1955 को रवाना हुआ।

जिसमें सर्व श्रमिक नेता महेंद्र बाजपेयी, रामचरण रैकवार, चंद्रभान यादव, केदारनारायण स्वामी, हबीब अंसारी, लक्ष्मीनारायण मल्होत्रा, और पंडित भोलानाथ पुरोहित थे। गोबा प्रस्थान करते समय नगर में सभी सत्याग्रहियों का जगह-जगह तिलक लगाकर फूल मालाओं से स्वागत किया गया और एक बड़े जुलूस ने मुंबई मेल से सत्याग्रहियों को सम्मान के साथ रवाना किया।

12 जुलाई 1955 को पुणे में गोबा विमोचन समिति कार्यालय में बाहर से आने वाले सभी सत्याग्रहियों के नाम, पते, आयु की जानकारी लिखी गई। जिसमें जबलपुर जत्थे में चद्रभान राय की उम्र कम होने की वजह से इन्हें सत्याग्रह करने भेजने केंद्रीय समिति सहमत नहीं थी। लेकिन राय की जिद्द पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी के हलफनामा लेकर सी मन्नादेडकर धुलिया महाराष्ट्र वालों के नेतृत्तव में 108 सत्यार्ग्रहियों का जत्था 14 जुलाई 1955 को पुणे से रवाना हुआ।

16 जुलाई 1955 को सभी 108 सत्याग्रही नेव्रदा ग्राम से गोवा सीमा में निहत्थे प्रवेश हुए और राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए नागझिरी चौकी पहुंचे। वहां पर मिलिट्री पुर्तगालियों ने सत्याग्रहियों को चेतावनी देते हुए रोका और सभी की तलाशी थी। फिर तब तक पिटाई की जब तक मुंह से आवाज निकालना बंद नहीं हुई। होश आने पर सभी कपड़े उतरवा कर सामान छीनकर नागझिरी चौकी ले जाकर मिलिट्री कोर्ट में पेश किया और 20-20 साल की कारावास की सजा सुनाई।

17 जुलाई 1955 को सभी सत्याग्रहों को भारतीय मिलिट्री में भर्ती किया गया। जिसमें चंद्रभान राय, रामचरण रैकवार और भोलेनाथ पुरोहित थे। उस समय के सभी समाचार पत्रों और रेडियो प्रसारण में यह खबर प्रसारित हुई कि ये तीनों गोवा मुक्ति आंदोलन में शहीद हो गए हैं।

गोवा विमोचन समिति के महान क्रांतिकारी कटनी के सिलौडी में जन्मे वीर सपूत चंद्रभान राय का जबलपुर में दुःखद निधन हो गया। नर्मदा नदी के ग्वारीघाट में पूरे राजकीय सम्मान से स्वर्गीय श्री राय की अंत्येष्टि हुई। स्वतंत्रता संग्राम का यह देदीप्यमान नक्षत्र अस्त हो गया।

संवाद सूत्र-सत्येंद्र गौतम, कटनी, मध्यप्रदेश

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