MP में उपचुनाव रिजल्ट: बीजेपी और कांग्रेस के बीच बराबरी, लेकिन पिछले दस वर्षों का ट्रेंड के पक्ष में
मध्य प्रदेश में हाल ही में दो विधानसभा उपचुनाव हुए, जिसमें बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला बराबरी का रहा। दोनों दलों ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की। हालांकि, यदि पिछले दस वर्षों में हुए उपचुनावों के नतीजों को देखा जाए, तो बीजेपी का पलड़ा कांग्रेस से काफी भारी रहा है।
2014 से 2024 तक उपचुनावों का आंकड़ा
मध्य प्रदेश में 2014 से लेकर 2024 तक कुल 53 उपचुनाव हुए, जिसमें से बीजेपी ने 62% की जीत दर (स्ट्राइक रेट) के साथ 33 सीटें जीतीं। वहीं, कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 38% रहा और उसने 20 सीटों पर विजय प्राप्त की। ये आंकड़े बीजेपी की मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं, जबकि कांग्रेस की जीत का प्रतिशत कहीं कम रहा है।

कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए विधायक
इन दस वर्षों के दौरान कांग्रेस से 30 विधायक बीजेपी में शामिल हुए, और इन विधायकों का स्ट्राइक रेट भी 70% रहा। इसका मतलब यह है कि बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस के विधायकों ने उपचुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया, और पार्टी को स्थानीय स्तर पर भी मजबूती प्रदान की।
उपचुनावों का ट्रेंड: सरकार का प्रभाव
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि उपचुनावों में अक्सर उसी पार्टी की जीत होती है, जिसकी सरकार सत्ता में होती है। यह ट्रेंड उपचुनावों में देखा जाता है, क्योंकि सरकार के पास संसाधन, प्रशासनिक मशीनरी और विकास कार्यों के आधार पर मतदाताओं को आकर्षित करने का मौका होता है। हालांकि, कुछ सीटों पर अपवाद भी देखने को मिले हैं, जिनमें मतदाताओं ने पार्टी की बजाय उम्मीदवारों को देख कर वोट किया। विजयपुर सीट पर भी ऐसा ही हुआ था।
अपवाद: विजयपुर और बुधनी
2020 में भी 28 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में कुछ सीटों पर यह ट्रेंड टूटता हुआ दिखाई दिया था। विजयपुर उपचुनाव में मतदाताओं ने पार्टी की बजाय उम्मीदवार की छवि को प्राथमिकता दी, जो पारंपरिक ट्रेंड से अलग था।
विधानसभा में नतीजों का असर
विजयपुर और बुधनी उपचुनाव के परिणामों के बाद विधानसभा में बीजेपी के विधायकों की संख्या 164 हो गई, जबकि कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर 65 हो गई। भारत आदिवासी पार्टी के पास एक सीट है।
मध्य प्रदेश में पिछले दस वर्षों के उपचुनावों के परिणाम यह बताते हैं कि बीजेपी का दबदबा कांग्रेस से कहीं अधिक है। हालांकि, कुछ सीटों पर अपवाद भी सामने आए हैं, जिनसे यह पता चलता है कि मतदाता सिर्फ पार्टी नहीं, बल्कि उम्मीदवार की कार्यक्षमता और छवि को भी महत्व देते हैं। आने वाले समय में कांग्रेस को अपनी रणनीति में बदलाव और उम्मीदवारों के चयन पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी, यदि वह बीजेपी से मुकाबला करना चाहती है।
2014 से 2018 तक मध्यप्रदेश में हुए उपचुनावों की समीक्षा: बीजेपी और कांग्रेस के प्रदर्शन की तस्वीर
मध्यप्रदेश में 2014 से 2018 के बीच विधानसभा और लोकसभा के कुल 15 उपचुनाव हुए थे। इन उपचुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला मुख्य रूप से विधानसभा की 13 सीटों और लोकसभा की 2 सीटों पर हुआ। इस दौरान बीजेपी का प्रदर्शन कांग्रेस से बेहतर रहा।
विधानसभा के 13 उपचुनावों का परिणाम
मध्यप्रदेश विधानसभा के 13 उपचुनावों में से बीजेपी ने 8 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 5 सीटें जीतकर प्रदर्शन किया। इस तरह बीजेपी का स्ट्राइक रेट 62% था, जबकि कांग्रेस का 38% था।

2014: विधानसभा की 3 सीटों पर उपचुनाव
- विजयराघवगढ़: कांग्रेस के विधायक संजय पाठक ने इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल होने का निर्णय लिया और बीजेपी के टिकट पर फिर से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के विजेंद्र मिश्रा को हराया।
- बहोरीबंद: बीजेपी के विधायक प्रभात पांडे के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के सौरभ सिंह कुंवर ने बीजेपी के प्रणय पांडे को हराया। यहां सहानुभूति का कोई असर नहीं दिखा।
- आगर: बीजेपी के गोपाल परमार ने मनोहर ऊंटवाल के त्यागपत्र के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के प्रतिद्वंदी को हराया।
- 2015: विधानसभा की 2 और लोकसभा की 1 सीट पर उपचुनाव
- देवास: बीजेपी की गायत्री राजे ने कांग्रेस को हराकर यह सीट जीती। यह सीट उनके पति तुकोजीराव पवार के निधन के कारण रिक्त हुई थी।
- गरोठ: बीजेपी के चंदर सिंह सिसोदिया ने कांग्रेस के सुभाष कुमार को हराया। यह उपचुनाव बीजेपी विधायक राजेश यादव के निधन के बाद हुआ था।
- रतलाम लोकसभा: कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा की निर्मला भूरिया को हराया। यह सीट भाजपा सांसद दिलीप सिंह भूरिया के निधन के बाद रिक्त हुई थी।
- 2016: विधानसभा की 3 और लोकसभा की 1 सीट पर उपचुनाव
- मैहर: कांग्रेस के विधायक नारायण त्रिपाठी ने भाजपा में शामिल हो कर उपचुनाव लड़ा और कांग्रेस के नवीन पटेल को हराया।
- घोड़ाडोंगरी: बीजेपी के मंगल सिंह धुर्वे ने कांग्रेस के प्रताप सिंह उइके को हराया। यह उपचुनाव बीजेपी विधायक सज्जन सिंह उइके के निधन के बाद हुआ था।
- नेपानगर: बीजेपी की मंजू राजेंद्र दादू ने कांग्रेस के अंतर सिंह देवी सिंह बर्डे को हराया। यह सीट श्यामलाल दादू के सड़क दुर्घटना में निधन के बाद रिक्त हुई थी।
- शहडोल लोकसभा: बीजेपी के ज्ञान सिंह ने कांग्रेस की हिमाद्री सिंह को हराया। यह उपचुनाव भाजपा सांसद दलपत सिंह परस्ते के निधन के कारण हुआ था।
- लोकसभा उपचुनावों का परिणाम (2014-2018)
- रतलाम लोकसभा (2015): कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने बीजेपी की निर्मला भूरिया को हराया।
- शहडोल लोकसभा (2016): बीजेपी के ज्ञान सिंह ने कांग्रेस की हिमाद्री सिंह को हराया।
- इन उपचुनावों के परिणामों में देखा गया कि बीजेपी ने अधिकतर सीटों पर विजय प्राप्त की। इस दौरान बीजेपी का स्ट्राइक रेट कांग्रेस से बेहतर रहा, जो आने वाले समय में राज्य में बीजेपी की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।












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