Bhopal news: "‘अब तुम भोपाल में हंगामा करके दिखाओ’ — बीजेपी नेता घाड़गे ने विधायक आरिफ मसूद को दी धमकी
Bhopal news: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर राजनीतिक और साम्प्रदायिक तनाव के मुहाने पर खड़ी है। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर जहांगीराबाद चौराहे पर दिए गए एक भड़काऊ भाषण ने शहर की फिज़ा में तल्ख़ी घोल दी है।
आरोप है कि बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी नेता कृष्णा घाड़गे ने मंच से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को "पाकिस्तान का एजेंट", "कुत्ता" और "चोर" कहते हुए जान से मारने की धमकी दी।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो से न केवल सियासी पारा चढ़ गया है, बल्कि कानून व्यवस्था, साम्प्रदायिक सौहार्द और राजनीति में मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मंच से खुलेआम धमकी: पुलिस के सामने दी गई हिंसा की चेतावनी
27 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव के शोभायात्रा मंच पर कृष्णा घाड़गे ने आक्रोशित अंदाज़ में कहा:"जो हमारे धर्म का विरोध करेंगे, उन कुत्तों को नहीं छोड़ेंगे... जो सामने दिखेगा, पुलिस बाद में पकड़ेगी, घाड़गे जूते मारेगा।" घाड़गे यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह भी कहा कि जो पाकिस्तान के दलाल हैं, वे इसी चौराहे पर खड़े हैं और अब "हम भी अपनी जाति बताकर मारेंगे।"
यह बयान न केवल विधायक आरिफ मसूद को लक्षित करता दिखा, बल्कि उपस्थित जनसमूह में भी साम्प्रदायिक उत्तेजना फैलाने की आशंका को जन्म देता है। विशेष रूप से चिंताजनक यह रहा कि यह सब पुलिस की उपस्थिति में कहा गया, जिसे घाड़गे ने मंच से खुली चुनौती दी।
कांग्रेस का आक्रोश: पुलिस में शिकायत, गिरफ्तारी की मांग
घाड़गे के बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भोपाल नगर निगम की कांग्रेस पार्षदों नसीम गफूर और शीरीन खान ने जहांगीराबाद थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की कि कृष्णा घाड़गे के खिलाफ भड़काऊ भाषण, आपराधिक धमकी और साम्प्रदायिक उकसावे की धाराओं में केस दर्ज किया जाए।
शिकायत में विशेष रूप से यह कहा गया कि घाड़गे ने जानबूझकर धार्मिक और जातीय पहचान को निशाना बनाते हुए भीड़ को भड़काने की कोशिश की, जो सांप्रदायिक दंगों की आशंका को जन्म दे सकता है।
दिग्विजय सिंह का सवाल: "क्या आरिफ मसूद की सुरक्षा बढ़ेगी?"
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस विवाद में कूदते हुए X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: "क्या भोपाल पुलिस आरिफ मसूद की सुरक्षा पर Threat Perception का आकलन कर सुरक्षा बढ़ाएगी? क्या सचिन सूर्यवंशी पर भी कानूनी कार्यवाही होगी?"
दिग्विजय ने यह भी बताया कि इससे पहले सचिन सूर्यवंशी नामक एक व्यक्ति ने मसूद को फेसबुक पर जान से मारने की धमकी दी थी। इससे मसूद समर्थकों और अल्पसंख्यक समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।

राजनीतिक इतिहास: मसूद और घाड़गे दोनों विवादों के चेहरे
विधायक आरिफ मसूद की छवि हमेशा से मुखर और विवादास्पद रही है। 2001 में फिल्म 'गदर' के विरोध में हिंसक प्रदर्शन से लेकर 2020 में फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ रैली, और वक्फ संपत्तियों को लेकर हालिया बयान, मसूद को कट्टर राजनीति का चेहरा भी माना जाता है।
वहीं कृष्णा घाड़गे सिंधिया के करीबी और भाजपा के आक्रामक युवा चेहरों में गिने जाते हैं। मंच से हिंसा की खुली धमकी देना न केवल बीजेपी की राजनीतिक छवि को झटका दे सकता है, बल्कि इस वक्त जब पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, यह बयान विपरीत असर डाल सकता है।
Bhopal News: कानूनी दृष्टिकोण: गंभीर धाराओं में दर्ज हो सकता है केस
- घाड़गे और सूर्यवंशी के बयानों के आधार पर विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय न्याय संहिता की निम्नलिखित धाराएं लागू हो सकती हैं:
- BNS धारा 351(2) - हत्या की धमकी
- BNS धारा 295A - धार्मिक भावनाएं भड़काना
- BNS धारा 153A - समुदायों में वैमनस्य फैलाना
- BNS धारा 505(2) - साम्प्रदायिक हिंसा को उकसाना
वरिष्ठ वकील अजय गुप्ता के अनुसार, "यह मामला साफ़ तौर पर नफरत फैलाने और सार्वजनिक हिंसा को भड़काने का प्रयास है। पुलिस को स्वतः संज्ञान लेकर FIR दर्ज करनी चाहिए।"
पुलिस की चुप्पी और राजनीतिक संकट
अब तक भोपाल पुलिस ने इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं की है, न ही पुलिस आयुक्त की ओर से कोई बयान सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस उच्च स्तर से निर्देशों का इंतजार कर रही है, क्योंकि मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। वहीं बीजेपी की तरफ से भी अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे पार्टी की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
Bhopal news: सोशल मीडिया पर उबाल
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा बड़ा बन गया है। जहां एक ओर हिंदुत्व समर्थक घाड़गे के बयान को "हिम्मत" बता रहे हैं, वहीं कई यूज़र्स इसे "नफरत की राजनीति" करार दे रहे हैं। एक यूज़र ने लिखा, "भोपाल में गुंडों को मंच और माइक दोनों मिल गया है। लोकतंत्र शर्मिंदा है।" दूसरे ने लिखा, "मसूद जैसे नेता हर बार हिंदुओं को उकसाते हैं, अब हिंदू जवाब दे रहे हैं।"
यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया इस विवाद को दो धाराओं में ध्रुवीकृत कर रहा है - एक में "हिंदू स्वाभिमान" का नारा है, तो दूसरे में "अल्पसंख्यकों की सुरक्षा" की चिंता।
सवाल जो अब उठ रहे हैं
- क्या भोपाल की पुलिस इस मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करेगी?
- क्या बीजेपी घाड़गे को अनुशासनात्मक नोटिस देगी या चुप्पी साधे रखेगी?
- क्या यह बयान 2025 के अंत में संभावित उपचुनाव या नगरीय निकाय चुनावों से पहले समुदायों के ध्रुवीकरण की सियासत है?
- क्या कांग्रेस इसे भाजपा की "सांप्रदायिक राजनीति" के सबूत के रूप में इस्तेमाल करेगी?












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