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MP News: क्या करोड़पति पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा ने भोपाल कोर्ट में किया सरेंडर, जानिए पूरा सच

MP News: मध्य प्रदेश के करोड़पति पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा ने सोमवार को भोपाल की स्पेशल कोर्ट में सरेंडर करने की कोशिश की, लेकिन इस प्रक्रिया में करीब तीन घंटे तक ड्रामा चलता रहा।

सौरभ के वकील राकेश पाराशर ने दावा किया कि उन्होंने सौरभ को कोर्ट में सरेंडर करा दिया है, लेकिन लोकायुक्त पुलिस ने इस दावे का खंडन किया है। फिलहाल सौरभ की लोकेशन के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है, और उसकी तलाश जारी है।

Bhopal millionaire constable Saurabh Sharma not surrenders in court reveals illegal assets

लोकायुक्त और ईडी की लगातार दबिश

लोकायुक्त पुलिस के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सौरभ शर्मा की तलाश में जुटा हुआ है। दोनों जांच एजेंसियों के सूत्रों ने यह कहा कि उन्हें सौरभ के बारे में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं है, और उसकी लोकेशन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।

लोकायुक्त का छापा और सौरभ की संपत्ति

19 दिसंबर को लोकायुक्त की टीम ने सौरभ शर्मा के भोपाल स्थित अरेरा कॉलोनी में घर और ऑफिस पर छापा मारा था। इस छापे के दौरान टीम को 2.95 करोड़ रुपये की नकदी, करीब 50 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण, 234 किलो चांदी और अन्य संपत्ति के दस्तावेज मिले थे।

इसके बाद, उसी रात में भोपाल के मेंडोरी इलाके के एक जंगल में लावारिस खड़ी कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये की कैश राशि बरामद की गई। यह कार सौरभ के सहयोगी चेतन सिंह गौर के नाम पर थी। चेतन ने जांच एजेंसियों को बताया कि यह सोना और नकदी सौरभ शर्मा का ही है।

ईडी की कार्रवाई और सौरभ का फरार होना

इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सौरभ और उसके परिवार तथा परिचितों के ठिकानों पर छापे मारे, जिनमें 23 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की गई। लोकायुक्त के छापे के बाद से ही सौरभ फरार था, और जांच एजेंसियों को यह जानकारी मिली थी कि सौरभ उस वक्त दुबई में था। उसके बाद से वह लगातार फरार चल रहा है, और उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उमा भारती ने मध्य प्रदेश के परिवहन घोटाले को लेकर गंभीर आरोप लगाए

भोपाल, 26 जनवरी 2025: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने राज्य के चर्चित परिवहन घोटाले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कमलनाथ ने जहां सरकारी अनुकंपा नियुक्ति नीति में नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया, वहीं उमा भारती ने इस घोटाले को व्यापमं घोटाले से भी बड़ा बताया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि इस मामले में कुछ बड़े अधिकारियों और नेताओं का हाथ हो सकता है, और उनकी जांच होनी चाहिए।

कमलनाथ का आरोप: नियमों की अनदेखी और अनुकंपा नियुक्ति की गड़बड़ी

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि राज्य सरकार की अनुकंपा नियुक्ति नीति में यह प्रावधान है कि यदि संबंधित विभाग में कोई पद खाली नहीं है, तो ऐसे मामलों में उम्मीदवार को संविदा नियुक्ति पर रखा जाता है। इसके बाद, जब विभाग में पद खाली होते हैं, तो उसे नियमित करने का प्रावधान भी होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सौरभ शर्मा की नियुक्ति के मामले में इस नीति के तहत नियमों की अनदेखी की गई थी। कमलनाथ ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री द्वारा इस मामले में नोटशीट लिखी गई, और जब परिवहन विभाग ने सौरभ शर्मा की नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किया, तो उसमें तत्कालीन परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह की 14 सितंबर 2016 को भेजी गई नोटशीट का हवाला दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले से जुड़े दस्तावेज लोकायुक्त को सौंपने की बात कही और जांच की मांग की।

उमा भारती ने कहा: घोटाला व्यापमं से भी बड़ा है

पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने इस मामले को लेकर भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, "जिस घोटाले में सिपाही करोड़ों कमा रहे हों, आप सोचिए अधिकारियों और नेताओं का क्या हाल होगा। मुझे तो यह व्यापमं से भी बड़ा घोटाला लगता है।" उमा भारती ने यह भी कहा कि सौरभ शर्मा इस घोटाले में "चूहा" है, और अब "अजगर" का बाहर आना बाकी है। उन्होंने यह टिप्पणी इस घोटाले में और बड़े नामों के शामिल होने के संकेत के तौर पर की।

2003 में हुई थी गड़बड़ी की शुरुआत: उमा भारती का खुलासा

उमा भारती ने अपने मुख्यमंत्री काल का जिक्र करते हुए बताया कि 2003 में जब उन्होंने परिवहन से जुड़ी समस्याओं को देखा, तो उन्होंने तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विषय में सलाह ली थी। उन्होंने बताया कि उस समय, मोदी ने उनसे कहा था कि शराब नीति में बदलाव कर रेवेन्यू बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। इसके साथ ही, चेक पोस्टों की गड़बड़ियों के बारे में भी चर्चा हुई थी, और सुधार की योजना बनाई जा रही थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस मामले में वे अपनी सरकार के रहते सुधार कार्य शुरू कर पातीं, लेकिन उन्हें जल्द ही पद से हटा दिया गया।

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