मनचलों की खैर नहीं! सीएम योगी के बाद अब शिवराज सिंह चौहान ने बनाया 'एंटी मजनूं दल'

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम मजनूं टाइप के लोगों को सबक सिखाएंगे। ये लोग महिलाओं का सम्मान करना नहीं जानते। ऐसे लोग एक सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं हैं।

भोपाल। यूपी में महिलाओं से छेड़छाड़ करने वाले मनचलों पर लगाम कसने के लिए गठित सीएम योगी आदित्यनाथ के 'एंटी रोमियो दल' का असर अब भाजपा शासित दूसरे राज्यों में भी दिखने लगा है। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने राज्य में मनचलों को सबक सिखाने का मन बना लिया है। इसके लिए राज्य में एंटी रोमियो दल की तर्ज पर 'एंटी मजनूं दल' शुरू किया गया है।

'मजनूं टाइप के लोगों को सबक सिखाएंगे'

'मजनूं टाइप के लोगों को सबक सिखाएंगे'

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'हम मजनूं टाइप के लोगों को सबक सिखाएंगे। ये लोग महिलाओं का सम्मान करना नहीं जानते। ऐसे लोग एक सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं हैं। ऐसे मजनुंओं के लिए सरकार अभियान चलाने जा रही है।' उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ऐसे लोगों पर नजर रखेगी और लोगों को एक सुरक्षित माहौल देगी।

पुलिस में एक तिहाई महिलाएं

पुलिस में एक तिहाई महिलाएं

सीएम चौहान ने कहा कि साहस, बहादुरी और कर्तव्य पूरे करने के मामले में महिलाएं किसी से भी कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इसीलिए राज्य के पुलिस विभाग में एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखे गए हैं। सीएम ने कहा कि पुलिस को राज्य में एक ऐसा माहौल पैदा करना चाहिए कि महिलाएं बिन किसी भय के कहीं भी आ जा सकें। इसके लिए पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कड़ा रवैया अपनाना चाहिए।

यूपी में बना है एंटी रोमियो दल

यूपी में बना है एंटी रोमियो दल

आपको बता दें कि योगी आदित्यनाथ ने यूपी के सीएम पद की शपथ लेते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एंटी रोमियो दल का गठन करने के निर्देश दिए थे। हालांकि सीएम के इस कदम का आलोचना भी हुई है। राज्य में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें पुलिसकर्मियों ने भाई-बहन और सहमति से साथ घूम रहे जोड़ों पर भी कार्रवाई की। इसके बाद सीएम ने आदेश जारी किया कि सहमति से साथ घूम रहे जोड़ों को परेशान ना किया जाए।

हाईकोर्ट ने एंटी रोमियो दल को सही ठहराया

हाईकोर्ट ने एंटी रोमियो दल को सही ठहराया

एंटी रोमियो दल को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि किसी मामले में पुलिस की ज्यादती सामने आती है तो कानून के दरवाजे खुले हैं। सरकार को पुलिस बल बढ़ाना चाहिए। तमिलनाडु में 1998 में महिलाओं का उत्पीड़न रोकने के लिए कानून बनाया गया और गोवा में भी 2013 से ऐसा ही कानून है। यदि पुलिस दल के नामकरण पर आपत्ति है तो सरकार उसे बदलने को स्वतंत्र है। ये भी पढ़ें- राम मंदिर के लिए बीजेपी नेता ने कर दिया 'गलत काम'

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