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MP चुनाव में वैतरणी पार लगाने नेताओं को कथाओं का सहारा, पक्ष-विपक्ष के नेता करा रहे कथाएं

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023: मप्र चुनाव से पहले कथाओं का दौर चल रहा है। सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता चुनाव से पहले कथा वाचकों को बुलाकर अपने-अपने इलाके में कथाएं करा रहे हैं। कथा वाचकों में भी बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री और पंडित प्रदीप मिश्रा सीहोर वाले नेताओं की पहली पंसद हैं। बता दें कि राजधानी भोपाल से लेकर प्रदेश के अलग-अलग शहरों और विधानसभा क्षेत्रों में नेता कथा कराने के लिए कथा वाचकों से तारीख लेने मशक्कत करते नजर आते हैं।

एमपी की राजनीति में कथाओं का दौर, चुनावी बेड़ा पार लगाने की आस

बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के गढ़ा गांव स्थित बागेश्वरधाम बालाजी मंदिर के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री श्री राम कथा, श्री हनुमंत कथा और श्री मद्भागवत कथा करते हैं, इसी प्रकार सीहोर जिले में स्थित कुबरेश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा श्री शिव महापुराण की कथा करते हैं। वर्तमान में यदि देश-प्रदेश में इनकी ख्याति की बात करें तो अन्य कथा वाचकों, संत-महात्माओं,संन्यासियों में इन दोनों की टीआरपी टॉप पर चल रही है। इस कारण प्रदेश भर के कांग्रेस नेता, भाजपा के मंत्री और विधायक इन्हीं की कथाएं कराने पर जोर दे रहे हैं।

खुरई में पं. धीरेंद्र शास्त्री तो​ छिंदवाड़ा में पं. प्रदीप मिश्रा
मप्र के सागर जिले की खुरई विधानसभा में बागेश्वरधाम के ​पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री बुधवार से तीन दिवसीय श्री हुनमंत कथा कर रहे हैं। बता दें कि खुरई प्रदेश के नगरीय आवास एवं विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह का विधानसभा क्षेत्र है। यहां वे पूर्व में भी कथाएं करा चुके हैं। इसी प्रकार वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व मुख्मंत्री ​कमल नाथ के गृहजिले छिंदवाड़ा में पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा चल रही है। यहां बीते महीने पं. धीरेंद्र शास्त्री की कथा हो चुकी है। इसमें यजमान कमल नाथ के बेटे व सांसद नकुल नाथ थे।

सभाओं में करोड़ों खर्च कर भीड़ जुटाते हैं, कथा में स्वत: आते हैं
प्रदेश में कहीं भी किसी की भी जनसभा कराई जाती है तो उसके लिए सरकार, राजनीतिक पार्टियों को करोड़ों खर्च कर भीड़ जुटाना पड़ती है। आसपास के जिलों सहित प्रदेशभर से कार्यकर्ताओं और आम पब्लिक के लिए बसें, गाड़िया लगानी होती हैं। आने-जाने, चाय-नाश्ते, भोजन का प्रबंधन करना पड़ता है। जबकि धार्मिक कथाओं और कथा वाचकों की प्रसिद्धि ऐसी है कि इसमें लाखों लोक स्वत: कथओं का श्रवण करने के लिए स्वयं के खर्चे पर आते हैं। कथा के पूरे समय रूककर भक्तिभाव से कथा श्रवण करते हैं। इसी दौरान आयोजक और नेता यहां मंच पर अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराते रहते हैं। पब्लिक के बीच तीन-तीन घंटे बैठकर कथा श्रवण करते हैं।

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