लुधियाना ब्लास्ट का मास्टरमाइंड मुल्तानी जर्मनी की कोर्ट ने छोड़ा, बोला- मैं सिर्फ खालिस्तानी प्रमोटर हूं
लुधियाना। पंजाब के सबसे बड़े जिले लुधियाना की कोर्ट (जिला न्यायालय परिसर) में बम विस्फोट के मामले में मास्टरमाइंड बताया जा रहा जसविंदर सिंह मुल्तानी छूट गया है। कुछ ही दिनों पहले उसे जर्मनी में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, वहां उसे कोर्ट में कुछ देर की पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। बता दें कि, जसविंदर सिंह मुल्तानी 'सिख फॉर जस्टिस' नामक खालिस्तानी संगठन के नेताओं में से एक है। वह उस संगठन के संचालक व आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का करीबी है। पन्नू ने ही मुल्तानी के साथ वीडियो कॉल का क्लिप जारी कर इस बात की पुष्टि की कि, जर्मन कोर्ट ने उसे छोड़ दिया है।

जो वीडियो कॉल-क्लिप सामने आई है, उसके वीडियो में मुल्तानी ने लुधियाना की कोर्ट के ब्लास्ट में अपनी कोई भूमिका न होने की बात कही है। उसकी ओर से कहा गया कि, मैंने कोई बम धमाका नहीं करवाया, मैं तो बस खालिस्तानी प्रमोटर हूं।'
मुल्तानी को छोड़ दिए जाने की खबरें आने पर अब भारतीय एजेंसियां इस मामले में जर्मनी की पुलिस व एंबेसी के साथ संपर्क बना रही हैं। बताया जा रहा है कि, मुल्तानी को जब जर्मनी की कोर्ट में पेश किया गया था तो वहां पर सबूतों के अभाव की वजह से उसे छोड़ दिया गया। हालांकि, कोर्ट द्वारा ये भी कहा गया है कि अगर उसके खिलाफ कोई भी सबूत मिलता है तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाए।
भारतीय एजेंसियों की अब तक की जांच में यह पाया गया कि, मुल्तानी लुधियाना जिला न्यायालय परिसर विस्फोट कांड में शामिल है। वह लंबे समय से एसएफजे के सभी मुख्य सदस्यों के साथ संपर्क में रहा है। उसे जर्मनी में 27 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों का कहना है कि, जसविंदर सिंह मुल्तानी एक कट्टरपंथी है। सरकार के प्रयास हैं कि, उसे भारत लाया जाए। बताया जा रहा है कि, मोदी सरकार ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से जर्मन पुलिस को कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी प्रदान की और यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के इशारे पर सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) आतंकी हमले की योजना बना रहा है। वहीं, उसके बाद जर्मन पुलिस द्वारा प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के कट्टरपंथी जसविंदर सिंह मुल्तानी की गिरफ्तारी की खबर आ गई।
जांच एजेसियों के मुताबिक, एसएफजे आतंकवादियों द्वारा मुंबई या दिल्ली को निशाना बनाए जाने की फिराक में था। हालांकि, मोदी सरकार द्वारा 72 घंटे से ज्यादा के प्रयास रंग लाए और नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि यदि मुंबई या दिल्ली में कोई बम विस्फोट होता है तो वह जर्मनी में बैठे एसएफजे सदस्यों को जवाबदेह ठहराएगा। बॉन और नई दिल्ली में मौजूद अधिकारियों के अनुसार, मोदी सरकार ने मामले की तात्कालिकता के बारे में संघीय पुलिस को समझाने के लिए दिल्ली और बॉन में जर्मन दूतावास को कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी प्रदान की। विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों द्वारा भारतीय दूतावास के अधिकारियों को उनकी क्रिसमस की छुट्टियों से वापस बुला लिया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जर्मन अधिकारी मुंबई पर हुए आतंकी हमले के मामले की गंभीरता को समझें। माना जा रहा है कि, मुल्तानी मुंबई में विस्फोटक भेजने की तैयारी में था और हमले के लिए एक आतंकवादी टीम को तैयार किया गया था।












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