लॉकडाउन के दौरान लुधियाना में 100 लोगों ने किया सुसाइड, सामने आई ये बड़ी वजह
लुधियाना। कोरोना वायरस के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन की वजह से लोग घरों में रहने को मजबूर हो गए। जहां एक ओर लोगों को अपने परिवार के लोगों के साथ ज्यादा वक्त बिताने का मौका मिला। वहीं, लॉकडाउन के इन तीन महीनों में घरेलू हिंसा और सुसाइड के मामलों में बड़ी उछाल आया। पंजाब के लुधियाना में लॉकडाउन के दौरान सुसाइड के 100 केस सामने आए, जबकि घरेलू हिंसा से जुड़े 1500 केस दर्ज किए गए।

सुसाइड करने वालों में 30-40 वर्ष की उम्र के लोग ज्यादा
लुधियाना के पुलिस उपायुक्त अखिल चौधरी के मुताबिक, इस साल लॉकडाउन से पहले सुसाइड के 60 केस सामने आए थे, जबकि घरेलू हिंसा के 850 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, लॉकडाउन के दौरान इन मामलों में बढ़ोतरी हुई। लॉकडाउन के दौरान सुसाइड के 100 केस सामने आए, जबकि घरेलू हिंसा से जुड़े 1500 केस दर्ज किए गए। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांचों के मुताबिक, सुसाइड के इन मामलों की मुख्य वजह डिप्रेशन, बेरोजगारी और आर्थिक परेशानी सामने आई। ये भी देखा जा रहा है कि सुसाइड केस 30-40 वर्ष की उम्र के लोगों में ज्यादा बढ़े हैं।

डिप्रेशन के बाद घरेलू हिंसा आत्महत्या की दूसरी बड़ी वजह
आत्महत्या करने वालों में अधिकांश व्यक्ति वे थे जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनी नौकरी खो दी थी। 16 मई को धनंधर एन्क्लेव में 9 साल की लड़की ने आत्महत्या कर ली थी।उसके माता-पिता के मुताबिक, वह अपने भाई के साथ मोबाइल फोन पर गेम खेलने को लेकर झगड़े के बाद परेशान थी। लॉकडाउन के दौरान आत्महत्या के पीछे घरेलू हिंसा दूसरी बड़ी वजह रही। कुल 76 में से 16 मामलों में, महिलाओं की आत्महत्या की वजह घरेलू हिंसा थी। इनकी आयु 19 से 40 वर्ष के बीच थी। इसके अलावा आर्थिक परेशानी की वजह से पांच लोगों ने अपनी जान दे दी, सभी की आयु 32 से 40 वर्ष के बीच थी।

नौकरी जाने की वजह से शख्स ने की थी आत्महत्या
14 मई को रणधीर सिंह नगर निवासी निजी स्कूल के कर्मचारी ने वीडियो कॉल पर अपनी पत्नी से बात करते हुए अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। कर्मचारी एक निजी स्कूल में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करता था। उसने किसी से 2 लाख रुपए उधार लिए थे, जिस वजह से वह बेहद परेशान था। एक 40 वर्षीय कर्ज में डूबे व्यक्ति ने 1 अप्रैल को आत्महत्या कर ली थी। पुलिस उपायुक्त अखिल चौधरी ने कहा, 'पुलिस ने शहर में हुए सभी आत्महत्या के मामलों की जांच करने की कोशिश की, जिससे ये पता लगाया जा सके कि लोगों ने आत्महत्या जैसे कदम क्यों उठाए।'












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