यूपी: दो वरिष्ठ आईएएस अफसरों पर गिरी गाज, योगी सरकार ने हटाया
लखनऊ। भ्रष्टाचार के मामले में यूपी की योगी सरकार ने जीरों टॉलरेंस की नीति पर आगे बढ़ते हुए मंगलवार को दो आईएएस अफसरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सूत्रों की मानें तो लगातार मिल रही शिकायतों के बाद 1985 बैच के आईएएस अधिकारी व राजस्व परिषद में सदस्य डॉ. गुरुदीप सिंह व 2006 बैच के प्रमोटी आईएएस अधिकारी व परिषद में सदस्य (न्यायिक) राजीव शर्मा को हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया गया है। दोनों ही अफसरों को नई तैनाती नहीं दी गई है। गुरुदीप सिंह इसी साल दिसंबर में और राजीव शर्मा अगले साल जुलाई में प्रशासनिक सेवा पूरी कर रिटायर होने वाले हैं।

अब तक 6 आईएएस, 14 आईपीएस अफसर निलंबित
रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी सरकार के कार्यकाल में अब तक 6 आईएएस और 14 आईपीएस अफसरों को निलंबित किया जा चुका है। 6 आईएएस अफसरों में चार तो डीएम के पद पर तैनात थे। जितेन्द्र बहादुर सिंह को डीएम गोंडा के पद पर रहते हुए जून 2018 में सस्पेंड किया गया था। उनपर जिले में सरकारी अनाज की बंदरबांट का आरोप लगा था। कुमार प्रशांत को डीएम फतेहपुर रहते जून 2018 में निलंबित किया गया था। प्रशांत पर सरकारी गेहूं खरीद में धांधली का आरोप था। वहीं, देवेंद्र कुमार पांडेय को उन्नाव में डीएम रहते फरवरी में सस्पेंड किया गया था। इनपर बेसिक शिक्षा विभाग में हुई खरीद में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे।
डीएम महाराजगंज रहते सस्पेंड हुए थे अमरनाथ उपाध्याय
वहीं, अमरनाथ उपाध्याय को डीएम महाराजगंज रहते निलंबित किया गया था। उपाध्याय पर डीएम रहते गौ संरक्षण केन्द्रों के बजट में धांधली के आरोप लगे थे। इसी तरह केदारनाथ सिंह 2012 में पीसीएस से आईएएस बने थे, उनपर पिछले साल मई में गाज गिरी थी। तब वे पर्यटन विभाग में विशेष सचिव थे। शारदा सिंह को चकबंदी आयुक्त रहते इस आईएएस को योगी सरकार ने सस्पेंड किया था। इन पर आरोप था कि भर्ती में ओबीसी कोटे से किसी की भर्ती नहीं की।












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